कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी बीते कई दिनों से एक राजनीतिक संकट से जूझ रही थी। दरअसल कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा थी और इसे लेकर सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच खींचतान थी। शनिवार को दोनों नेताओं की नाश्ते पर मुलाकात हुई और इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने कयासों पर विराम लगा दिया और पार्टी आलाकमान के फैसले का पालन करने की बात कही। हालांकि ये पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर इस तरह की खींचतान हुई है। दरअसल साल 2007 में भी ऐसी ही पटकथा लिखी जा चुकी है।
क्या हुआ था 2006-07 में?
कर्नाटक में साल 2004 में विधानसभा चुनाव हुआ था, जिसमें किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में जेडीएस किंगमेकर की भूमिका में उभरी और जेडीएस ने पहले कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई, लेकिन साल 2006 में दोनों दलों में मतभेद हो गए और गठबंधन टूट गया। इसके बाद जेडीएस के नेता एचडी कुमारस्वामी भाजपा के पाले में चले गए और उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई।
जेडीएस और भाजपा के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत 20-20 महीने सरकार चलाने की बात तय हुई, जिसमें पहले 20 महीने एचडी कुमारस्वामी सीएम बने और बाद के 20 महीनों में भाजपा के बीएस येदियुरप्पा को सीएम पद संभालना था। हालांकि साल 2007 में जब 20 महीने का समय पूरा हुआ तो कुमारस्वामी ने सत्ता हस्तांतरण में आनाकानी की। इसके चलते जेडीएस और भाजपा का गठबंधन भी टूट गया और कुछ समय के लिए कर्नाटक में राज्यपाल शासन लगाना पड़ा। हालांकि नवंबर 2007 में भाजपा के बीएस येदियुरप्पा सीएम बने और कुछ दिनों में ही उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। साल 2008 में कर्नाटक में फिर से विधानसभा चुनाव हुए और उन चुनाव में भाजपा ने बहुमत हासिल किया।
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2007 की कहानी क्या फिर दोहराई जा रही?
आज की कर्नाटक की स्थिति भी 2007 जैसी ही है, तब भी सत्ता हस्तांतरण को लेकर खींचतान हुई थी और अब भी ऐसा ही हो रहा है। उस वक्त भी केंद्रीय नेतृत्व ने दखल देने और मामले को संभालने में देरी की, जिसके चलते राज्य में राज्यपाल शासन लागू हुआ। कहा जा सकता है कि कांग्रेस नेतृत्व भी अब वैसी गलती न करे कि हालात संभालने मुश्किल हो जाएं। डीके शिवकुमार कर्नाटक के प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। डीके शिवकुमार की कथित अनदेखी को लेकर वोक्कालिगा समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है और आशंका है कि समुदाय कांग्रेस से छिटक सकता है।













