पश्चिम चंपारण के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक महिला वार्ड के अंदर नवजात शिशु को गोद में लिए जाती दिख रही है, जबकि उसके साथ चल रहा एक युवक हाथ में ऑक्सीजन सिलेंडर उठाए हुए बच्चे को ऑक्सीजन दे रहा है। यह दृश्य जिला अस्पताल की प्रशासनिक अव्यवस्था, संसाधनों की कमी और गंभीर लापरवाही की पोल खोलता है।
सरकारी दावों के अनुसार अस्पताल में वार्मर बेड, स्ट्रेचर, सुरक्षित ट्रांसपोर्ट सिस्टम और आधुनिक उपकरण उपलब्ध होने चाहिए, लेकिन वीडियो इन दावों को पूरी तरह कटघरे में खड़ा करता है। संवेदनशील नवजात वार्ड में भर्ती बच्चे को न स्ट्रेचर मिला, न वार्मर बेड और न ही सुरक्षित ट्रॉली। परिजन खुद नवजात को हाथ में पकड़कर दूसरे वार्ड तक ले जाने को मजबूर दिखे।
पढ़ें: दिल्ली से पहुंची NIA की टीम, शेखपुरा में हथियार तस्कर धराया; लक्जरी कार और मोबाइल किया जब्त
सूत्रों के मुताबिक, नवजात पश्चिम चंपारण के ज्योगिया टोला के एक परिवार से संबंधित है। वीडियो वायरल होने के बाद परिजन और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर जमकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि अस्पताल में आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। दो दिन पहले प्रसव के बाद एक महिला की मौत पर भी हंगामा हुआ था, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। आरोप है कि सवाल पूछने पर परिजनों से बदसलूकी की जाती है और पत्रकारों को अंदर जाने से रोका जाता है। वीडियो बनाने वाले युवकों के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार हुआ।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन व्यवस्था सुधारने की बजाय हर बार मामलों को दबाने की कोशिश करता है। लगातार वायरल हो रहे ऐसे वीडियो स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों ने जिला स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि नवजात और प्रसूति वार्ड की सुविधाएं तत्काल बहाल की जाएं तथा लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही अस्पताल में स्ट्रेचर, वार्मर बेड और ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसी बुनियादी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।











