अजय की मौत के बाद विजय ने दुकान की जिम्मेदारी संभाल ली थी। तीसरे नंबर का बेटा संजय अहमदाबाद में काम करता है। दो दिन पहले ही होली पर घर आया है। चौथे नंबर के अरविंद और पांचवें नंबर के पंकज गांव में रह कर पशुपालन में करते हैं। अजय के बाद विजय ही बुजुर्ग माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा थे।
मंगलवार सुबह फोन कॉल आया। सुखराम और सुनीता के आंसू नहीं रुक रहे। बोले कि बेटे और बहू से पहले ईश्वर उन्हें ही उठा लेता। बुढ़ापा कैसे कटेगा? बच्चे कैसे पलेंगे? उनके करुण क्रंदन पर हर किसी के आंसू निकल आए। घायल बच्चों के इलाज में भी परिवार लगा हुआ है। वहीं चौरंगाबीहड़ गांव शोक है।
प्रवेश दिलाने गई थी हादसे में घायल हुए अजय के बेटा बेटी
सादाबाद हादसे में मरने वाले दंपती विजय और पिंकी के साथ उनके भाई अजय का बेटा आर्यन और बेटी अंशु भी थे। विजय के भाई पंकज ने बताया कि 15 दिन पहले आर्यन और अंशु को दिल्ली में प्रवेश दिलाने के लिए अजय का साला सूरज छोड़ने गया था जबकि चौरंगाबीहड़ में अजय बघेल के बेटे आर्यन के साथ उनकी पत्नी प्रीति गांव में रह रही है। विजय पर अपने और अजय के परिवार की देखभाल का जिम्मा था। प्रीति बच्चों के घायल होने एवं जेठ और जेठानी की मौत से सुधबुध खो बैठी है।
ये हुए घायल
हादसे में विजय का बेटा लक्ष्य (एक), बेटी प्राची (3), भतीजे आर्यन (08), अंशु (06), साली पूनम बघेल (15) घायल हो गईं। इनके अलावा ईको चालक वीरेंद्र निवासी गडरपुर, राजाखेड़ा, वीरेंद्र का बेटा आयुष, मनोज निवासी बाजना, मनोज की पत्नी रानी व तीन साल का बेटा जयदीप उर्फ रोहिल घायल हुए हैं।
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