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Bollywood Best Horror Movie : बॉलीवुड में कितनी फिल्में हैं जिनकी कहानी-पटकथा-संवाद-स्क्रीनप्ले सब कुछ अलग था लेकिन जब ये मूवी रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहीं. किसी ने इनको बहुत ज्यादा नहीं देखा और ये फिल्में फ्लॉप साबित हुई लेकिन जब यही फिल्म दोबारा रिलीज की गई तो मैसिव हिट निकली. ऐसी ही एक फिल्म 2018 में सिनेमाघर में आई थी. करीब 15 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म सिर्फ अपनी लागत निकाल पाई थी. आगे चलकर जब यह फिल्म 2024 में फिर से रिलीज की गई तो मैसिव हिट निकली. फिल्म की गिनती आज कल्ट क्लासिक फिल्मों में होती है. फिल्म की एंडिंग कई दर्शकों के समझ में नहीं आई थी. फिर भी यह फिल्म मैसिव हिट रही. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं……
<br />बॉलीवुड में कुछ ऐसी फिल्में बनी जो लीक से हटकर थी. इन्हें आउट ऑफ बॉक्स फिल्में भी कहा जा सकता है. इनकी कहानी-पिक्चराइजेशन भले कभी हिंदी सिनेमा में नजर नहीं आया. कहानी इतनी दिलचस्प थी कि दर्शक उसे सच मान बैठे. दुर्भाग्य यह है कि जब यह फिल्म रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई. पूरे छह साल 2024 जब फिल्म को फिर से रिलीज किया गया तो यह फिल्म मैसिव हिट रही. नाम था : तुम्बाड़. यह बॉलीवुड की अब तक की एक बेस्ट एक्सपेरिमेंटल फिल्म में से एक है.

फिल्म तुम्बाड़ की कहानी इतनी यूनिक थी, तो फिल्म ने अपना एक अलग से फैन बेस बना लिया है. आज यह फिल्म कल्ट क्लासिक मूवी में शामिल है. फिल्म में माइथोलॉजी, हॉरर और थ्रिलर का ट्रिपल डोज देखने को मिला था. यह फिल्म 12 अक्टूबर 2018 को रिलीज हुई थी. डायरेक्टर राही अनिल भार्वे थे. उनको आनंद गाधी-आदेश प्रसाद ने असिस्ट किया था. दोनों ने स्क्रीनप्ले लिखा था. स्टोरी नारायण धरप की थी. प्रोड्यूसर आनंद एल. राय, सोहम शाह, मुकेश शाह-अमिता शाह और आनंद गांधी थे.

तुम्बाड़ फिल्म में सोहम शाह, ज्योति मालशे, धुंधीराज जोगालेकर और अनीता दाते लीड रोल में थे. करीब 15 करोड़ में तैयार यह फिल्म 2018 में कमाई के मामले में 48वें नंबर पर थी. धीरे-धीरे इसकी पॉप्युलैरिटी बढ़ी. यह फिल्म किसी मास्टरपीस से कम नहीं है.
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तुम्बाड़ फिल्म को बनने में करीब 6 साल का समय लगा. फिल्म के डायरेक्टर राही अनिल के एक दोस्त ने 1993 में महाराष्ट्र के भंडारा-गोंदिया जिएले में स्थित नागजीरा वर्ल्डलाइफ सेंक्चुरी एक बहुत ही डरावनी कहानी सुनाई. यह स्टोरी महाराष्ट्र के एक जाने-माने लेखक नारायण धरप की स्टोरी थी. अनिल राही उस समय 18 साल के थे. उन्होंने बेसिक स्टोरी तैयार कर ली थी. उन्होंने फिल्म का टाइटल महाराष्ट्र के श्रीपद नारायण पेंडसे के 1987 में आए एक नॉवेल तुम्बाड़ के नाम पर रखा.

अनिल राही ने 2009 से 2010 के बीच एक साल के दौरान 700 पेज की स्क्रिप्ट लिखी. स्क्रिप्ट के साथ स्कैच भी बनाए. राही अनिल ने कई प्रोडक्शन हाउस के चक्कर लगाए. कोई भी प्रोड्यूसर इस फिल्म पर पैसा लगाने के लिए तैयार नहीं था. इसी बीच अनिल राही की मुलाकात सोहम शाह से हुई. वह इस फिल्म में काम करने और पैसा लगाने के लिए भी तैयार हो गए.

फिल्म में विनायक राव के बेटे का किरदार मोहम्मद समद ने निभाया था. मोहम्मद समद ने ही फिल्म में नजर आने वाली भूतनी दादी का भी किरदार निभाया था. यह फैक्ट बहुत कम लोग जानते हैं. दरअसल, यह फिल्म 6 साल के अंतराल में बनकर तैयार हुई. ऐसे में मोहम्म्द समद फिल्म पूरे-पूरे 18 साल के हो चुके थे. वो 6-7 घंटे मेकअप लगाकर दादी बनते थे. इसी तरह विनायक राव के बचपन का किरदार धुंधीराज प्रभाकर ने निभाया था. मोहम्मद समद और धुंधीराज प्रभाकर की आवाज में काफी बदलाव आ गया था, इसलिए मल्हार प्रवीण ने दोनों की अपनी आवाज में डब किया था.

तुम्बाड़ फिल्म पूर्ति की देवी और हस्तर से शुरू होती है. महाराष्ट्र के तुम्बाड़ गांव के रियल सीन फिल्म में दिखाए गए हैं. सीन इस तरह से शूट किए गए कि आधुनिक चीजें फ्रेम में नजर ना आएं. हस्तर श्रापित देवता है. पौराणिक कथाओं के मुतातिक, पूर्ति की देवी के गर्भ में रहता है. फिल्म में दिखाया जाता है कि तुम्बाड़ गांव श्रापित है. यहां के लोगों ने हस्तर का मंदिर बनवाया था और उसकी पूजा की थी. पूर्ति की देवी अंतहीन अनाज-धन का प्रतीक है. पृथ्वी देवी मां की कोख है. देवी मां को अपनी पहली संतान हस्तर से लगाव था.

हस्तर बहुत लालची था. उसने धोखे से देवी का सोना चुराया था लेकिन जैसे ही वह अनाज की ओर बढ़ा, सभी देवी-देवताओं ने उस पर हमला कर दिया. देवी ने उसे इस शर्त पर बचा लिया कि उसे कोई नहीं पूजेगा. कई साल तक हस्तर देवी मां की कोख में सोता रहा. तुम्बाड़ जिले के लोगों ने उसकी पूजा शुरू की, उसका मंदिर बना दिया. तुम्बाड़ पर देवता कुपित हो गए. लगातार वहां बारिश होने लगी लेकिन हस्तर खुश हुआ. उसने अपना सोना मंदिर के गर्भगृह में दफना दिया.

फिल्म में विनायक राव नाम का एक कैरेक्टर इसी सोने के खजाने की तलाश में तुम्बाड़ गांव में किले के नीच खुदाई करता है. अपने बेटे को भी अपने साथ लेकर जाता है. अपने बेटे को किले के नीचे खजाने तक पहुंचने की ट्रेनिंग देता है. फिल्म के लास्ट सीन में कई दर्शकों की समझ में नहीं आया था. दरअसल, विनायक का बेटा उससे भी ज्यादा लालची निकलता है. वो आटे की ज्यादा की ज्यादा गुड़ियां लेकर आता है ताकि खजाना बहुत ज्यादा निकाल सके.

तुम्बाड़ फिल्म पूर्ति की देवी और हस्तर से शुरू होती है. महाराष्ट्र के तुम्बाड़ गांव के रियल सीन फिल्म में दिखाए गए हैं. सीन इस तरह से शूट किए गए कि आधुनिक चीजें फ्रेम में नजर ना आएं. हस्तर श्रापित देवता है. पौराणिक कथाओं के मुतातिक, पूर्ति की देवी के गर्भ में रहता है. फिल्म में दिखाया जाता है कि तुम्बाड़ गांव श्रापित है. यहां के लोगों ने हस्तर का मंदिर बनवाया था और उसकी पूजा की थी. पूर्ति की देवी अंतहीन अनाज-धन का प्रतीक है. पृथ्वी देवी मां की कोख है. देवी मां को अपनी पहली संतान हस्तर से लगाव था.

हस्तर बहुत लालची था. उसने धोखे से देवी का सोना चुराया था लेकिन जैसे ही वह अनाज की ओर बढ़ा, सभी देवी-देवताओं ने उस पर हमला कर दिया. देवी ने उसे इस शर्त पर बचा लिया कि उसे कोई नहीं पूजेगा. कई साल तक हस्तर देवी मां की कोख में सोता रहा. तुम्बाड़ जिले के लोगों ने उसकी पूजा शुरू की, उसका मंदिर बना दिया. तुम्बाड़ पर देवता कुपित हो गए. लगातार वहां बारिश होने लगी लेकिन हस्तर खुश हुआ. उसने अपना सोना मंदिर के गर्भगृह में दफना दिया.

फिल्म में विनायक राव नाम का एक कैरेक्टर इसी सोने के खजाने की तलाश में तुम्बाड़ गांव में किले के नीच खुदाई करता है. अपने बेटे को भी अपने साथ लेकर जाता है. अपने बेटे को किले के नीचे खजाने तक पहुंचने की ट्रेनिंग देता है. फिल्म के लास्ट सीन में कई दर्शकों की समझ में नहीं आया था. दरअसल, विनायक का बेटा उससे भी ज्यादा लालची निकलता है. वो आटे की ज्यादा की ज्यादा गुड़ियां लेकर आता है ताकि खजाना बहुत ज्यादा निकाल सके.

कहनी में रोमांचक मोड़ उस समय आता है जब आटे की हर गुड़िया से एक हस्तर जन्म लेता है. विनायक यह देखकर घबरा जाता है. वह आटे की बची हुई गुड़ियां अपने शरीर से बांध लेता है और रस्सी के सहारे वहां से भागने की कोशिश करता है. इस दौरान सारे हस्तर उसकी ओर लपकते हैं. अपने बेटे की जान बचाने के लिए विनायक खुद को हस्तर के श्राप में फंसा देता है. हस्तर से पोटली चुराकर अपने बेटे की ओर फेंकता है लेकिन उसका बेटा समझ जाता है कि लालच बुरी बला है. वो विनायक के शरीर में आग लगा देता है और उसे जलाकर श्राप से मुक्ति देता है.
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