सूर्य के पिता नरेंद्र ने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले रत्ना के पति की बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद रत्ना ने उनके परिवार से मदद मांगी। बीबीडी स्थित मकान किराये पर देने के लिए कहा था। तब रत्ना को मकान किराये पर दे दिया गया था। वहां भी सूर्य प्रताप बच्चियों को पढ़ाने जाते थे।
घरवालों की बात भी नहीं सुनते थे सूर्य
इसी दौरान सूर्य प्रताप व रत्ना की नजदीकियां बढ़ गईं। परिवार ने जब रत्ना से संबंध में बारे में सवाल किए तो सूर्य प्रताप ने किसी भी तरह के संबंध से साफ इन्कार किया। शक के आधार पर परिवार ने दोनों के संबंधों का विरोध किया तो सूर्य प्रताप रत्ना के साथ ही रहने लगे। वह अपने घरवालों की बात भी नहीं सुनते थे।
शादी के लिए चल रही थी बात
सूर्य प्रताप के पिता ने बताया कि वह बेटे की शादी करना चाहते थे। कुछ जगह बातचीत भी चल रही थी। रविवार शाम बेटे से आखिरी बार फोन पर बात भी हुई थी। उस वक्त सब कुछ सामान्य था। सुबह करीब 10 बजे पुलिस से फोन करके बताया कि बेटे की हत्या कर दी गई है।
मोहल्ले में तरह-तरह की चर्चाएं
मोहल्ले के लोगों के अनुसार, पति की मौत के बाद से रत्ना को करीब 30 हजार रुपये पेंशन मिल रही थी, जिससे घर चलता था। सूर्य प्रताप भी घर के खर्चे में मदद करते थे। यह भी चर्चा है कि सूर्य प्रताप की हत्या के पीछे का कारण मकान पर कब्जा नहीं था।
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