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कोल्ला हेमा को कर्नाटक हाईकोर्ट ने 2024 रेव पार्टी केस से बरी कर दिया है. लेकिन उन्होंने इस कानूनी लड़ाई की वजह से अपनी मां को खो दिया था. एक्ट्रेस ने इसके लिए मीडिया ट्रायल को जिम्मेदार ठहराया और करियर पर पड़े बुरे असर पर बात की.
नई दिल्ली: टॉलीवुड एक्ट्रेस कोल्ला हेमा डेढ़ साल से कानूनी और मानसिक परेशानियों का सामना कर रही थीं, जो आखिरकार खत्म हो गया है. कर्नाटक हाईकोर्ट ने उन्हें 2024 के रेव पार्टी केस से बरी कर दिया है. अब हेमा ने एक इमोशनल वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि इस केस ने उनके करियर के साथ उनकी मां को भी उनसे छीन लिया था. हेमा ने वीडियो में बताया कि हाईकोर्ट ने 3 नवंबर को ही केस खत्म कर दिया था, लेकिन ऑफिशियल ऑर्डर मिलने तक उन्हें इसे पब्लिक न करने के लिए कहा गया था. इस बीच, उनकी मां को स्ट्रोक आया और कुछ दिनों बाद उनका निधन हो गया.
हेमा ने कहा, ‘मां मेरी ताकत थीं, वही मुझे हिम्मत देती थी और मैं आज जो भी हूं, मां की वजह से हूं. सोशल मीडिया की ट्रोलिंग, मीडिया में लगातार चल रही खबरें और गलत आरोप मां सहन नहीं कर पाईं. मैंने बार-बार सोशल मीडिया यूजर्स और मीडिया चैनलों से निवेदन किया था कि बिना सबूत के गलत बातें न फैलाएं और ऐसे आरोप न लगाएं जो मेरे और परिवार के जीवन पर असर डालती हों. मैंने कई बार बताया कि मेरी मां की तबीयत खराब है, फिर भी निगेटिव बातें रुकने का नाम नहीं ले रही थीं.’
मां को खोने का दुख
हेमा ने कहा, ‘कुछ मीडिया चैनलों ने एक गलत खबर चलाने के लिए मेरे ऊपर दूसरी और तीसरी गलत बातें जोड़ दीं और इस तरह अफवाहें फैलती चली गईं. मैं शुरुआत से कह रही थी कि मैंने कुछ गलत नहीं किया है और सच सामने आएगा, मगर इस सफर में मुझे अपनी मां को खोना पड़ा. इस लंबे कानूनी स्ट्रगल ने मेरी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया. डेढ़ साल से मेरा जीवन परेशानियों में घिरा रहा. मैं न तो किसी डायरेक्टर से बात कर सकीं और न ही कोई नया काम कर सकीं. एक कलाकार के लिए इमेज का टूट जाना सबसे बड़ा झटका होता है और मीडिया के दबाव ने मुझे मानसिक रूप से बहुत परेशान किया.’
रेव पार्टी से हिरासत में आई थीं कोल्ला हेमा
हेमा ने वीडियो में पूछा, ‘मैं केस तो जीत गई, लेकिन अपनी मां को हमेशा के लिए खो दिया. क्या कोई मेरी मां वापस ला सकता है? जीत के इस मोड़ पर भी मेरे दिल में सिर्फ खालीपन और दर्द है.’ कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि केस में पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूत वैज्ञानिक मानकों पर खरे नहीं उतरते. हेमा उन 88 लोगों में शामिल थीं जिन्हें 19 मई 2024 को हेब्बागोडी के जीआर फार्म में एक रेव पार्टी से हिरासत में लिया गया था.
88 लोगों के खिलाफ दाखिल की थी चार्जशीट
पुलिस ने दावा किया था कि वहां एमडीएमए और कोकीन जैसे ड्रग्स का इस्तेमाल हुआ था और सब पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. हेमा का मेडिकल टेस्ट एक निजी अस्पताल में कराया गया था, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि यह रिपोर्ट भरोसेमंद नहीं है क्योंकि देश में अभी भी ड्रग टेस्टिंग के लिए एकसमान नियम और मानक उपलब्ध नहीं हैं. कोर्ट ने साफ शब्दों में बताया कि भारत में ड्रग टेस्टिंग के लिए कोई नेशनल लेवल की नोडल लैब नहीं है, और न ही ब्लड व यूरिन में ड्रग्स की जांच के लिए तय और मान्य प्रक्रिया उपलब्ध है. ऐसे में किसी व्यक्ति को सिर्फ इन टेस्ट रिपोर्ट्स के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं है. कोर्ट ने माना कि जांच में कई महत्वपूर्ण कमियां थीं और उस आधार पर केस आगे नहीं चल सकता. इसलिए कोर्ट ने हेमा के खिलाफ दर्ज मामला पूरी तरह से खत्म कर दिया. सीसीबी ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 88 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद हेमा ने हाईकोर्ट का रुख किया और मामले को रद्द करने की मांग की. अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दी.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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