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Raj Kapoor Superhit Moives : बॉलीवुड में ऐसी कितनी ही फिल्में हैं जो बनते-बनते नहीं बन पातीं. कभी फाइनेंशियल दिक्कत से तो कभी किसी और वजह से फिल्म अधूरी रह जाती है. 1950 में राज कपूर एक फिल्म बना रहे थे. फिल्म पर कुछ काम हुआ लेकिन किसी वजह से यह फिल्म बंद कर दी गई. दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म के लिए गीतकार हसरत जयपुरी ने एक गाना लिखा था. शंकर-जयकिशन ने इसकी ट्यून भी बनाई थी. फिल्म बंद हो गई लेकिन यह सुरीली ट्यून दो फिल्मों में सुनाई दी. दिलचस्प बात यह है कि दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुईं. दोनों ही फिल्मों का म्यूजिक सुपरहिट रहा था. ये दोनों फिल्में कौन सी हैं, आइये जानते हैं……
बॉलीवुड फिल्मों का म्यूजिक जितना अच्छा होता है, मूवी के बॉक्स ऑफिस पर सफल होने की गारंटी उतनी ही बढ़ जाती है. धुरंधर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई है. फिल्म का म्यूजिक भी कमाल का है. फिल्म की कव्वाली, सॉन्ग लोगों की जुबान पर छा गए हैं. मूवी अब तक 900 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन कर चुकी है. बॉलीवुड की कई फिल्मों में एक जैसे सुरीले गाने-ट्यून भी सुनने को मिल जाती है. 1950 के दशक में राज कपूर की एक अधूरी फिल्म ‘अजंता’ के एक गाने के लिए बनाई गई ट्यून दो फिल्मों में सुनाई दी. दोनों ही फिल्में सुपरहिट रहीं. ये फिल्में थीं : संगम और राम तेरी गंगा मैली. आइये जानते हैं इन फिल्मों से जुड़े कई दिलचस्प फैक्ट्स……

सबसे पहले बात करते हैं 1964 में रिलीज हुई फिल्म संगम की. राज कपूर के मन में इस मूवी को बनाने का आइडिया 1949 में आया था. राज कपूर ने आरके बैनत के तले पहली फिल्म ‘आग’ बनाई थी जो कि 1949 में ही रिलीज हुई थी. इस फिल्म की स्टोरी, स्क्रीनप्ले और डायलॉग इंदर राज ने लिखे थे. इंदर राज बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर-प्रोड्यूसर टीनू आनंद के पिता थे. उन्हीं दिनों राज कपूर और इंदर राज ने एक और कहानी पर काम करना शुरू किया. इसे ‘घरौंदा’ टाइटल दिया. यह कहानी लव ट्रायंगल पर बेस्ड थी. दो लड़के सुंदर-गोपाल और राधा नाम की लड़की की कहानी थी.

राज कपूर उन्हीं दिनों मेहबूब खान की फिल्म ‘अंदाज’ में भी काम कर रहे थे. दिलीप कुमार, नगरिस फिल्म में उनके साथ थे. राज कपूर ने अपनी अगली फिल्म ‘घरौंदा’ को इन्हीं दोनों के साथ बनाने का मन बनाया लेकिन दिलीप कुमार ने काम करने से इनकार कर दिया. फिल्म शुरू ही नहीं हो पाई. 1949 में बरसात, 1951 में आवारा और 1955 में श्री 420 जैसी फिल्मों में बिजी हो गई. ये तीनों ही फिल्में भारतीय सिनेमा के इतिहास की क्लासिक फिल्में मानी जाती हैं. ये तीनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रहीं. राज कपूर के निर्देशन में बनी इन फिल्मों ने आरके बैनर को ब्रांड बना दिया.
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1960 की ‘जिस देश में गंगा बहती’ फिल्म के प्रोड्यूसर राज कपूर ही थे. 1962 की शुरुआत में राज कपूर ने राइटर इंदर राज से ‘घरौंदा’ फिल्म की स्क्रिप्ट फाइनल करने के लिए कहा. घरौंदा की कहानी का आइडिया 20 साल पुराना था. नरगिस फिल्मों से दूरी बना चुकी थीं, ऐसे में वैजयंती माला को फाइनल किया गया. राज कपूर के साथ काम करने वाले दूसरे हीरो की तलाश शुरू की गई. दिलीप कुमार ने एक बार फिर से काम करने से इनकार कर दिया. देवानंद भी अपनी फिल्मों में बिजी थे. राज कपूर ने राजेंद्र कुमार और फिरोज खान को अप्रोच किया. फिरोज खान उन दिनों बी ग्रेड की फिल्मों में काम करते थे. राजेंद्र कुमार फिल्म में काम करने के लिए तैयार हो गए. फिरोज खान का सपना चकनाचूर हो गया. हालांकि जल्द ही उन्हें इसी दौरान रामानंद सागर की फिल्म ‘आरजू’ मिल गई.

इधर, ‘घरौंदा’ फिल्म का नाम बदलकर ‘संगम’ रख लिया गया. संगम एक रोमांटिक म्यूजिकल ड्रामा थी जो कि 18 जून 1964 को रिलीज हुई थी. फिल्म में राज कपूर-राजेंद्र कुमार और वैजयंती माला लीड रोल में थे. म्यूजिक शंकर-जयकिशन का था. डायरेक्टर-प्रोड्यूसर राज कपूर थे. गीतकार शैलेंद्र और हसरत जयपुरी थे. संगम का म्यूजिक 1960 के दशक का बेस्ट सेलिंग म्यूजिक में शामिल है. राज कपूर ने वैजयंती माला को कहानी सुनाई थी. वो उन दिनों मद्रास में शूटिंग कर रही थीं. कई दिनों तक जवाब नहीं आया तो राज कपूर ने उन्हें टेलीग्राम भेजा था. उन्होंने संकेत में लिखा था कि ‘बोल राधा बोल संगम होगा की नहीं’. इसके जवाब में वैजयंती माला ने लिखा था कि ‘होगा, जरूर होगा.’ आगे चलकर राज कपूर ने इसी मजबून पर फिल्म में एक गाना रखा जो कि आज भी उतना ही पॉप्युलर है.

संगम राज कपूर की पहली रंगीन फिल्म थी. फिल्म का बैकबोन उसका म्यूजिक ही था. फिल्म का एक और मशहूर गाना ‘मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज ना होना’ दिल्ली में फिल्माया गया था. ऐसा कहा जाता है कि संगीतकार जय किशन ने अपनी मंगेतर को चिट्ठी लिखी थी. उसकी पहली लाइन थी. राज कपूर ने इसे फिल्म में ले लिया. बाकी गाना हसरत जयपुरी ने पूरा किया था. संगम फिल्म के बाद शंकर-जयकिशन के बीच रिश्ते और खराब हो गए.

संगम फिल्म का एक गाना विवियन लोबो ने गाया था. विवियन लोबो मुंबई के चर्च गेट इलाके में एक होटल में गाते थे. संगीतकार जयकिशन का वहां पर आना-जाना था. जय किशन ने ही यह गाना उनसे गवाया था. गाने की एक ही लाइन ‘आई लव यू’ अंग्रेजी के साथ कई भाषाओं में बोली गई थी. गाना की शुरुआत जर्मन से हुई. यह धुन शंकर-जयकिशन ने राज कपूर की एक फिल्म ‘अजंता’ के लिए तैयार की थी. यह फिल्म अधूरी ही रह गई लेकिन इस धुन पर गाना संगम में डाला गया.

आगे चलकर इसी धुन का इस्तेमाल राज कपूर ने 1985 में रिलीज हुई फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ में किया. राम तेरी गंगा मैली फिल्म में राजीव कपूर- मंदाकिनी लीड रोल में थे. इस फिल्म का एक गाना था ‘सुन साहिबा सुन, प्यार की धुन’. इस गाने को शंकर-जयकिशन ने ही रिकॉर्ड किया था. गीतकार हसरत जयपुरी थे.<br />संगम के विवियन लोबो के सॉन्ग ‘आई लव यू’ और ‘सुन साहिबा सुन’ की धुन एक जैसी है. बस गाने के बोल अलग हैं. संगीतकार रविंद्र जैन ने गाने को पूरा किया था.

वैसे राज कपूर के मन में ‘राम तेरी गंगा मैली’ फिल्म को बनाने का आइडिया एक भजन से ‘रामकृष्ण को तोतापुरी ने ताना मारा…राम तेरी गंगा मैली.’ से आया था. राज कपूर ‘जिस देश में गंगा बहती है’ फिल्म बना चुके थे, ऐसे में ‘राम तेरी गंगा मैली’ के टाइटल को जस्टिफाइ करने वाली कहानी-सॉन्ग की उन्हें जरूरत थी. पुणे के फॉर्म हाउस में पार्टी के दौरान संगीतकार रविंद्र जैन ने अपनी चंद लाइन से कहानी पूरी कर दी थी. रवींद्र जैन ने ‘एक दुखियारी ने बात कही रोते-रोते, राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते-धोते.’ मुखड़ा बनाकर कहानी पूरी कर दी थी. मुखड़ा सुनकर राज साहब खुश हो गए थे. ‘राम तेरी गंगा मैली हो गई’ 1985 की ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर मूवी साबित हुई थी. फिल्म में मंदाकिनी के झरने वाले सेंसुअल सीन्स पर काफी विवाद हुआ था.
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