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Sunil Dutt Cult Classic Film : बॉलीवुड फिल्मों को सुपरहिट बनाने में सबसे बड़ा योगदान म्यूजिक का होता है. फिल्म की कहानी अगर शानदार हो और म्यूजिक भी उतना अच्छा हो तो मूवी के बॉक्स ऑफिस पर सफल होने की गारंटी बन जाती है. बॉलीवुड की कई फिल्मों में पाकिस्तान के सॉन्ग-सुरीली धुनें सुनाई दे जाती हैं. कुछ हिंदी मूवी ऐसी भी हैं, जिनका म्यूजिक पाकिस्तान की फिल्मों में सुनाई दिया. 1965 में एक ऐसी फिल्म आई थी जिसका म्यूजिक आज भी दिल को छू लेता है. फिल्म का म्यूजिक पाकिस्तान की फिल्म में कॉपी किया गया था. पाकिस्तान ने एक बहुत बड़े गायक ने अपनी महफिलों में इसी धुन पर बने गाने गाए. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं…..
बॉलीवुड के लिए 1965 का साल बेहद खास रहा था. इसी साल हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्म ‘गाइड’ आई थी. गाइड फिल्म के रिलीज होने के बाद 5 माह बाद एक मूवी ऐसी भी आई थी जिसने चार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते थे. सुनील दत्त को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसके एक गाने की धुन पाकिस्तान की फिल्म में सुनाई दे थी. इस फिल्म के टाइटल पर आगे चलकर एक और फिल्म बनाई गई. यह फिल्म थी : खानदान. इस फिल्म के लिए सुनील दत्त को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. आइये जानते हैं इस फिल्म से जुड़े कुछ दिलचस्प पहलू…….

खानदान नाम से बॉलीवुड में तीन फिल्में आ चुकी हैं. ये फिल्में 1942, 1965 और 1979 में रिलीज हुई थीं. 1942 में आई खानदान फिल्म में लीजेंडरी सिंगर नूर जहां की पहली फिल्म थी. प्राण लीड हीरो थे. आज हम 23 सितंबर 1965 को रिलीज हुई खानदान फिल्म की बात करने जा रहे हैं जिसमें सुनील दत्त-नूतन और ओम प्रकाश लीड रोल में नजर आए थे. फिल्म में ललिता पवार, हेलेन और मुमताज भी नजर आई थीं. मुमताज का रोल निगेटिव था.

खानदान एक इमोशनल फैमिली ड्रामा फिल्म थी जिसका निर्देशन ए. भीमसेन ने किया था. म्यूजिक रवि का था. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत कामयाब रही थी. यह 1965 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली 7वीं फिल्म थी. करीब 70 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने 1.4 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी. फिल्म की स्टोरी एमएस. सोलाइमलाई की थी. डायलॉग और गीत राजेंद्र कृष्ण ने लिखे थे. प्रोड्यूसर वासु मेनन थे. स्क्रीनप्ले-डायरेक्शन ए. भीमसिंह का था. खानदान डायरेक्टर भीम सिंह की एक तमिल फिल्म का रीमेक थी.
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फिल्म का म्यूजिक सदाबहार था और कहानी को सपोर्ट करने वाले थे. फिल्म की सफलता में म्यूजिक ने अहम रोल निभाया. फिल्म के पॉप्युलर गानों में ‘बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके ब्रिजबाला, नील गगन पर उड़ते बादल आ आ और ‘तुम्ही मेरे मंदिर तुम्ही मेरी पूजा’ शुमार थे. ‘तुम्ही मेरे मंदिर तुम्ही मेरी पूजा’ सॉन्ग के लिए लता मंगेशकर को बेस्ट फीमेल सिंगर का, राजेंद्र कृष्ण को बेस्ट लिरिसिस्ट और संगीतकार रवि को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. सुनील दत्त को शानदार एक्टिंग के लिए बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. 1963 की फिल्म ‘मुझे जाने दो’ के बाद यह दूसरा मौका था जब सुनील दत्त को फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

खानदान फिल्म का सदाबहार सॉन्ग ‘तुम्ही मेरे मंदिर, तुम्ही मेरी पूजा’ के मुखड़े की धुन से इंस्पायर्ड होकर पाकिस्तान के फेमस सिंगर अताउल्लाह खान ने 1978 में एक गाना रिलीज किया था. इस गाने के बोल थे : इधर जिंदगी का जनाजा उठेगा’. इतना ही नहीं 1984 में सिंगर नूर जहां ने इसी गाने को पाकिस्तानी फिल्म ‘नाम मेरा बदनाम’ में भी गाया था. 19 अगस्त 1951 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मियांवली इलाके में सिंगर अताउल्लाह खान का जन्म हुआ था.

1992 में टी-सीरीज ने अताउल्लाह खान का म्यूजिक एल्बम ‘बेदर्दी से प्यार’ नाम से रिकॉर्ड किया था. यह एल्बम सुपरहिट रहा. सड़कों पर दौड़ते ट्रकों में ये गाने खूब सुनाई देते थे. इस एल्बम के साथ एक अफवाह फैला दी गई कि अताउल्लाह खान को प्यार में धोखा मिला था. ऐसे में उन्होंने अपनी प्रेमिका का मर्डर कर दिया और जेल चले गए. फिर सभी गाने जेल से गाए. इस झूठी कहानी का फायदा म्यूजिक कंपनी टी सीरीज को खूब हुआ. लोगों में अताउल्लाख खान के प्रति हमदर्दी जगी. ज्यादा से ज्यादा संख्या में कैसेट खरीदे गए. पर्सनल लाइफ में अताउल्लाह खान ने 4 शादियां रचाई हैं.

<br />2002 में अताउल्लाह खान के वर्जन का रीमिक्स डीजे चीनो और प्रोफेशनल ब्रदर्स ने बनाया. 1993 में अताउल्लाह खान ने इसी ट्यून पर एक और गाना ‘खबर मेरे मरने की सुनते ही देखो’ बनाया. इधर, सिंगर सोनू निगम ने बेवफा सनम के लिए ‘इधर जिंदगी का जनाजा उठेगा’ का रीमिक्स वर्जन बनाया. सोनू निगम ने ‘खबर मेरे मरने की’ सॉन्ग का भी रीमिक्स बनाया. ये सभी सॉन्ग बेहद पॉप्युलर हुए. ‘बेवफा सनम’ फिल्म 1995 में आई थी जिसमें टी-सीरीज कंपनी के मालिक गुलशन कुमार के भाई कृष्ण कुमार हीरो थे. फिल्म में अरुणा ईरानी, बीना बनर्जी, शिल्पा शिरोडकर, शक्ति कपूर और किरन कुमार नजर आए थे. फिल्म के गाने हाल ही में बहुत पॉप्युलर हुए थे. फिल्म का एक गाना ‘तूने दिल के रकीबो संग मेरे, ओ दिल पे चलाए छुरियां’ भी हाल ही में बहुत वायरल हुआ था. इस गाने का नया वर्जन भी टी-सीरीज ने लॉन्च किया है.

सुनील दत्त और नूतन ने कई फिल्मों में एकसाथ काम किया. दोनों की जोड़ी ने की पहली आइकॉनिक फिल्म ‘सुजाता’ थी जो कि 1959 में आई थी. सुजाता फिल्म सुबोध घोष की इसी नाम की बंगाली कहानी पर बेस्ड थी. इस फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला था. साथ ही चार फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिले थे. खानदान के बाद सुनील दत्त और नूतन की फैमिली ड्रामा मेहरबान (1967) और पुनर्जन्म पर आधारित मिलन (1967) जैसी सुपरहिट फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था.

आगे चलकर ‘खानदान’ नाम से एक और फिल्म सिनेमाघरों में आई थी जो कि 18 जुलाई 1979 को रिलीज हुई थी. फिल्म में जीतेंद्र, सुलक्षणा पंडित, राकेश रोशन और बिंदिया गोस्वामी लीड रोल में थे. फिल्म का निर्देशन अनिल गांगुली ने किया था. यह 1952 की फिल्म ‘मां’ फिल्म का रीमेक थी जिसका डायरेक्शन विमल रॉय ने किया था. खानदान म्यूजिक का म्यूजिक खय्याम ने दिया था. फिल्म का सदाबहार गाना ‘ये मुलाकात तो बहाना है, प्यार का सिलसिला पुराना है’ आज भी रील्स-सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सुनाई देता है. गीतकार नक्श लायलपुरी ने लिखे थे. खानदान फिल्म 1976 में शुरू हुई और तीन साल बाद 1979 में रिलीज हुई. पहले फिल्म का टाइटल ‘किसको कहूं मां’ रखा गया था जिसे बाद में बदलकर ‘खानदान’ कर दिया गया था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म हिट साबित हुई थी.
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