बांग्लादेश में हिंसा बदस्तूर जारी है। ढाका से लेकर चटगांव तक भीड़ के प्रदर्शन और उससे जुड़ी हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के छात्र नेता उस्मान हादी को गोली मार दी गई थी। इसके बाद 18 दिसंबर को हादी का सिंगापुर में निधन हो गया और तब से लेकर अब तक बांग्लादेश में लगातार माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। हिंसा के इस दौर में वहां के अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, हर्षवर्धन त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
हर्षवर्धन त्रिपाठी: चिंता इस बात की है कि संघ और भाजपा से जुड़े लोगों के अलावा किसी भी संगठन ने एक भी प्रदर्शन नहीं किया है। बांग्लादेश में 22 दिन में 11 हिंदू मार दिए गए उन्हें लेकर कोई कुछ नहीं बोल रहा है। मोहम्मद यूनुस सिर्फ कठपुतली हैं। तारिक रहमान लौट कर आएं हैं उनसे एक उम्मीद की किरण दिख रही है।
अनुराग वर्मा: भारत ऐसे मामले में शांत नहीं बैठेगा। इससे पहले भी हो चुका है। आज की जो स्थिति है, जिस तरह से बांग्लादेश में हिंसा हो रही है ये एक भारत सरकार के लिए बहुत ही सोचने वाला विषय है वहां के अल्पसंख्यकों के लिए हम क्या कर सकते हैं। आप अपने पड़ोसी को नहीं बदल सकते हैं। जिस तरह से कठपुतली सरकारें हमारे पड़ोस में हैं, वो कट्टरपंथियों की हाथ की कठपुतली बनी हुई हैं।
पूर्णिमा त्रिपाठी: यूनुस की सरकार चीन और पाकिस्तान की कठपुतली बन चुकी है। ये हमारे लिए बहुत की चिंता का विषय है। जिस तरह से हत्याएं हो रही हैं ये अपने आप में बहुत चिंता का विषय है। जो हो रहा है उस पर अगर समय रहते हमने अंकुश नहीं लगाया तो ये हमारे लिए बहुत मुश्किल स्थिति हो जाएगी। तारिक रहमान खालिदा जिया के बेटे हैं 17 साल बाद वो वापस आए हैं, लेकिन भारत के लिए उनकी पार्टी नीति बहुत अच्छी नहीं रही है। इसलिए उनके आने को भारत को कैसे देखना चाहिए इस पर मैं कुछ नहीं कह सकती है।
राकेश शुक्ल: जिस तरह की हिंसा हो रही हैं क्या ये साजिश नहीं है? वो पार्टियां जो मुस्लिम राजनीति करती हैं वो इस वक्त मौन हैं। जिस दिन मोहम्मद यूनुस को बाहर से लाकर बैठाया गया था उसी दिन स्पष्ट हो गया था कि वो किसलिए इस पर बैठाए गए हैं। तारिक रहमान अचानक कैसे प्रकट हो गए। क्या उनकी एंट्री कराई गई। मुझे लगता है कि एक पटकथा तैयार करके बांग्लादेश को कट्टरपंथ की तरफ ले जाने की कोशिश है।
समीर चौगांवकर: जिस तरह से बांग्लादेश के अंदर एक चुनी हुई सरकार को अपदस्थ किय गया। उसके बाद मोहम्मद यूनुस को बैठाया गया। लंबे समय तक उन्होंने चुनाव नहीं कराया। अब जो हो रहा है उससे स्पष्ट है कि वो चुनाव टालने की कोशिश कर रहे हैं। जिस तरह से हिंसा हो रही है मुझे लगता है कि ये सोची समझी साजिश है और इसमें पाकिस्तान की बड़ी भूमिका है।
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