Bhairav Baba: भैरव बाबा के दरबार में घटी अद्भुत और रहस्यमयी घटना सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही है, जो भक्तों के बीच आस्था, भक्ति और चमत्कार का मिसाल बन गई है. जिस समय यह घटना घटी है, उस समय दरबार में मौजूद हर भक्त की आंखें खुली-खुली रह गईं और वातावरण “जय भैरव बाबा” के जयकारों से गूंज उठा.
कहा जाता है कि जहां भक्ति सच्ची होती है, वहां भगवान अपने किसी न किसी रूप में आकार भक्तों को अपने होने का एहसास दिलाते हैं. ऐसा ही अनुभव भैरव बाबा के दरबार में देखने को मिला.
यह घटना एक सामान्य पूजा अर्चना के दौरान हुई. मंदिर में रोज की तरह भोर के समय आरती चल रही थी. पुजारी मंत्र जाप कर रहे थे. ढोल-नगाड़ों की मधुर ध्वनि पूरे वातावरण को भक्तिमय बना रही थी और भक्त ध्यान में डूबे भैरव बाबा का नाप जप कर रहे थे.
तभी अचानक मंदिर के मुख्य दरवाजे से एक काला कुत्ता मंदिर के अंदर जाता दिखाई दिया. वैसे तो कुत्ते को मंदिर में आ जाना कोई बड़ी बात नहीं मानी जाती. जैसे ही वह काला कुत्ता गर्भगृह के सामने पहुंचा, उसने किसी सामान्य जानवर की तरह इधर-उधर देखने के बजाय सीधे भैरव बाबा की मूर्ति की ओर देखा. उसकी आंखों में न हताशा थी और न ही भय, बल्कि एक अजीब सी शांति साफ झलक रही थी.
कुछ ही देर में वह कुत्ता मंदिर के बीचो-बीच रुक गया और फिर अचानक भैरव बाबा के सामने दो पैरों पर खड़े होकर ताल की लय में हिलने-डुलने लगा, जिसे देखकर ऐसा प्रतीत हुआ कि मानो वह नृत्य कर रहा है.
यह नजारा इतना अप्रत्याशित था कि पल भर के लिए सब कुछ थम सा गया. आरती की थाली हाथों में थमी रह गई, मंत्रोच्चारण रुक गया, और हर नजर उसी काले कुत्ते पर टिक गई. भक्तों ने ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा. कुछ लोग तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे थे कि क्या यह सच है, जबकि मंदिर में मौजूद कई बुजुर्ग भक्तों ने इसे भैरव बाबा की लीला बताया.
बाबा भैरव कौन है?
भैरव बाबा भगवान शिव के उग्र और रौद्र अवतार हैं, जिनका शाब्दिक अर्थ ‘भय का हरण करने वाले’ या ‘भयंकर’ होता है; वे काल (समय) के स्वामी, नगर रक्षक और बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने वाले देवता माने जाते हैं.
भैरव बाबा की पूजा कैसे की जाती है?
भैरव बाबा की पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें. धुले साफ कपड़े पहन लें; लाला या काला वस्त्र धारण करना सबसे शुभ माना जाता है. घर के किसी शांत और पवित्र स्थान पर लकड़ी की चौकी पर लाला कपड़ा बिछाएं. चौकी पर भगवान कालभैरव की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें.
भगवान को फूल (गेंदा), माला, चंदन, चावल, जनेऊ, बेलपत्र, फल, मिठाई, पान, नारियल, पंचामृत, उड़द और सरसों का तेल अर्पित करें। ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ या ‘ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं’ मंत्र का जाप करें (108 बार)। उसके बाद आरती करें, फिर जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए माफ मांगे.
भैरव बाबा की पूजा करने से कष्ट दूर हो जाते हैं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भैरव बाबा की पूजा करने से जीवन की सभी परेशानियां, भय, रोग, मानसिक तनाव, कानूनी बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं; साहस, सुरक्षा और समृद्धि मिलती है; और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, जिससे व्यक्ति को हर मुश्किल से निजात और सही दिशा मिलती है.
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