अपनी मां के साथ विशाल का बॉन्ड बेहद अनूठा है.
सवाल: मान लीजिए अगर आपकी इस फिल्म को ऑस्कर मिल गया, तो क्या उसके बाद मम्मी सात्विक (विशाल जेठवा का पेट डॉग) को साइड में करके आपको अपने पास सुलाने लगेंगी.
जवाब: (हंसते हुए…) नहीं मुझे नहीं लगता. मम्मी अभी भी सात्विक को ही ज्यादा प्यार करती हैं और ऑस्कर आ जाएगा तब भी उसे ही ज्यादा प्यार मिलेगा. लेकिन खुद सात्विक भी मुझे ज्यादा भाव नहीं देता. उसका जब मन करता है वो मुझपर भौंकता है, मुझे काट लेता है. उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है.
अपने छोटे भाई और बड़ी बहन और अपने पेट डॉग सात्विक के साथ विशाल.
सवाल: ‘हॉमबोन्ड’ एक बेहद इमोशन जर्नी है. इस फिल्म का कोई ऐसा सीन रहा है, जिसे शूट करते वक्त आप भीतर तक हिल गए हों या जिसे शूट करना आपके लिए भी मुश्किल भरा रहा हो?
जवाब: फिल्म के क्लाइमैक्स सीन में मेरे साथ ऐसा हुआ. जब चंदन और शोएब लौट रहे हैं और चंदन मर गया है शोएब की गोद में.. मैं जब वो सीन कर रहा हूं तो उस दौरान मुझे मरने का सीन करना है पर ईशान की आवाज मेरे कानों में आ रही है. मैं उस सीन में जब थर्ड पर्सन उन बातों को सुन रहा हूं तो मुझे यहां तक महसूस हो रहा था कि काश मैं उठ जाउं शोएब के लिए. मतलब मैं चाहता था कि चंदन शोएब के लिए उठ जाए. क्योंकि उन दोनों का बॉन्ड बहुत ही खूबसूरत रहा है.
इसके अलावा एक सीन में मेरी बहन मुझे एहसास दिलाती है कि मैं क्या कर रहा हूं. वो भी काफी हिट करता है. एक दूसरा सीन है जब मेरी मां शोएब को एक अचार का डिब्बा देती है और कहती है कि ‘उसे खिला देना, वो खाता नहीं हैं.’ क्योंकि मैं खुद भी अपनी मां से बहुत क्लोज हूं तो ये बात इतनी हिट करती है कि क्या बताउं आपको. जबकि अगर आप मेरा किरदार फिल्म में देखेंगे तो कभी बिरियानी तो कभी कुछ, मैं खाता ही रहता हूं सीन में. पर मां को हमेशा लगता है कि उसका बच्चा खा नहीं रहा है. ये सीन बहुत छोटा है पर मुझे काफी भीतर तक हिला देता है.
सवाल: फिल्म ‘मर्दानी’ हो या टीवी सीरियल ‘महाराणा प्रताप’ में अकबर का रोल हो, आपकी एक्टिंग की हमेशा तारीफ हुई है. पर वो कौनसी फिल्म है, जिसे करने के बाद आपको लगा कि अब मैंने इंडस्ट्री में अपनी एक जगह बना ली है?
जवाब: वैसे तो मुझे हर फिल्म के साथ प्यार मिला लेकिन ‘होमबाउंड’ ही वो फिल्म है, जिसने मुझे ये एहसास कराया. जब मैं प्रीमियर के लिए गया तो अक्सर लोग मेरे नाम से मुझे बला रहे थे. इससे पहले वो उतना नाम से नहीं जानते थे. लेकिन मैं बहुत इमोशनल हो गया कि वो मुझे मेरे नाम से बुला रहे थे. ये मेरे लिए काफी भावुक करने वाला था. ये सब देखकर मुझे रोना ही आ गया था. ये दिन देखने के लिए मुझे 16 साल लग गए.
सवाल: ईशान खट्टर या जाह्नवी कपूर, दोनों ही इंडस्ट्री से जुड़े लोग हैं. ‘स्टार किड’ कह सकते हैं. ऐसे में जब आपको ये फिल्म ऑफर हुई तो क्या आपको किसी भी तरह का संदेह या डाउट था कि कैसे फिट कर पाएंगे, या आपको वैसा मौका मिलेगा या नहीं जैसा बाकी 2 किरदारों को मिलने वाला है?
जवाब: ये सही है कि ऑफ स्क्रीन मैं खुद को थोड़ा अलग महसूस करता था. मुझे कैमरे के सामने कभी नर्वस महसूस नहीं होता है कि मैं किसी के साथ कैसे परफॉर्म करूंगा या सीन कैसे होगा. पर मुझे ऑफ स्क्रीन ऐसा लगता था कि क्योंकि इनका बचपन बहुत ही अलग बीता है, इनका बचपन काफी प्रिवलेज रहा है. उनके स्कूल, उनका खानदान सब अलग है और मेरा खानदान और मेरा परिवार इन सारी चीजों से बहुत ही अलग है और मैं पहले खुद को इन चीजों को लेकर बहुत कम समझता था. मैंने तो अपने डायरेक्टर नीरज सर से भी इसके बारे में बात की थी. लेकिन ये कितना बड़ा इत्तेफाक है कि जैसे ‘हॉमबाउंड’ में मेरा किरदार चंदन खुद के वजूद को अपनाता है और अपने नाम के पीछे से ‘कुमार’ हटाता है, वैसे ही मैंने भी इन सारी चीजों से खुद को ऊपर उठाया. नीरज सर ने भी मुझे समझाया कि मैं यहां हूं अपने काम की वजह से, अपने हुनर की वजह से. मेरा सफर माइनस 10 से शुरू हुई और आज मैं 10 पर खड़ा हूं, जबकि इनकी जर्नी 1 से शुरू हुई और ये 10 पर खड़े हैं, तो मेरी जर्नी ज्यादा सफल रही न.. मैंने खुद को ये समझाया.

हालांकि ये भी सच है कि इन लोगों ने (जाह्नवी और ईशान) मुझे कभी महसूस नहीं कराया कि मैं अलग हूं. लेकिन सेट पर मौजूद बाकी लोग आपको कहीं न कहीं इस बात का एहसास कराते ही हैं. जैसे जिस तरीके से उनकी बात सुनी जाती है और जिस तरीके से मेरी बात सुनी जाती है, उसमें फर्क, बदलाव मैं महसूस कर पाता हूं. पर ये फर्क रहेगा और मैं इसपर शिकायत नहीं करता हूं. क्योंकि अब जब मैंने काम किया है और लोग मुझे पहचानने लगे हैं, मैं देखता हूं कि यही फर्क दूसरे सेट्स पर मेरे और मुझसे कम काम किए या जूनियर एक्टर्स के साथ होता है. मेरे और उनके बीच में फर्क होने लगा है. तो ये असल में बदल जाता है सभी के लिए. इसे हमे समय देना होगा.
सवाल: क्या आप आध्यात्मिक हैं? किस तरह की प्रैक्टिस करते हैं.
जवाब: हां, मैं बहुत स्प्रिच्युअल हूं. मैं धार्मिक भी हूं, प्रैटिकल भी हूं, मैं बहुत सारी चीजों का मिक्सचर हूं. मैं आध्यात्मिक तो हूं और मुझे ईश्वर पर भरोसा है. हालांकि मैं किसी एक चीज को आंख बंदकर के फॉलो नहीं करता. मैं हर चीज से खुद का जवाब ढूंढता हूं. पर ये सच है कि मैं एक अदृश्य सीक्रेट एनर्जी में पूरा भरोसा रखता हूं. मैंने एक सीक्रेट एनर्जी अपनी अंदर रखी है और मैं इसके बारे में किसी को नहीं बताता हूं. ये मेरे लिए ही है और इसके बारे में मैं किसी को भी नहीं बताता, कोई कितना भी क्लोज हो. पर मुझे इसपर पूरा भरोसा है. मैं जहां भी जाता हूं भरोसा करता हूं कि मेरा कभी बुरा नहीं होगा. बल्कि मुझे लगता है कि मेरे साथ कोई बुरा भी करता है तो कुछ समय बाद चीजें मेरे पक्ष में ही हो जाती हैं. मैं इसपर पूरा भरोसा करता हूं.

और हां, मैं अपनी मां पर बहुत ही भरोसा करता हूं और ये बात मेरे गुरुजी शोएब खान (एक्टिंग गुरू) सर ने डाली है. मुझे नहीं पता था कि परिवार की अहमियत क्या होती है. मैं स्कूल में बहुत ही बिगड़ैल बच्चा था, गालियां देता था, लड़ता था. पढ़ाई में भी ठीक था पर बहुत ही शैतान था. पर जब मैं 10वीं में था तब मैंने एक्टिंग क्लास जॉइन की और मैंने अपने गुरू से सिर्फ एक्टिंग नहीं सीखी, बल्कि उससे पहले इंसानियत सीखी. साथ ही मैंने अपने पापा को छोटी उम्र में खो दिया तब मुझे एहसास हुआ कि आपके पास जब जो इंसान है, उसकी कद्र कर लो, उसे प्यार दो. आपको पछतावा नहीं होना चाहिए कि जो प्यार आप जताना चाहते थे, जो प्यार आप देना चाहते थे उस इंसान को, वो नहीं दे पाए.
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