'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- मरकत, जिसका अर्थ है- नौ प्रकार के रत्नों में से एक जो हरे रंग का होता है, पन्ना। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- है यह पतझड़ की शाम, सखे!
है यह पतझड़ की शाम, सखे!
नीलम-से पल्लव टूट गए,
मरकत-से साथी छूट गए,
अटके फिर भी दो पीत पात जीवन-डाली को थाम, सखे!
है यह पतझड़ की शाम, सखे!
लुक-छिप करके गानेवाली,
मानव से शरमानेवाली,
कू-कू कर कोयल मांग रही नूतन घूँघट अविराम, सखे!
है यह पतझड़ की शाम, सखे!
नंगी डालों पर नीड़ सघन,
नीड़ों में हैं कुछ-कुछ कंपन,
मत देख, नज़र लग जाएगी; यह चिड़ियों के सुखधाम, सखे!
है यह पतझड़ की शाम, सखे!
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एक घंटा पहले












