तेलंगाना में प्रतिबंधित नक्सली संगठन (सीपीआई) माओवादी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब संगठन के वरिष्ठ कमांडर बदसे सुक्का उर्फ देवा को पुलिस ने चेकिंग के दौरान पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद देवा ने हथियार छोड़ने का फैसला करते हुए तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। 75 लाख रुपये के इनामी देवा का आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के लिए बड़ी कमजोरी के तौर पर देखा जा रहा है।
देवा ने समाचार एजेंसी एनएनआई को दिए इंटरव्यू में बताया कि वह किसी काम से जा रहा था, तभी पुलिस ने उसकी गाड़ी रोकी और तलाशी के दौरान उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसे हैदराबाद लाया गया। देवा ने कहा कि पहले वे खुद से आत्मसमर्पण करने के लिए नहीं आ रहे थे, लेकिन पकड़े जाने के बाद उन्होंने हथियार छोड़ने का फैसला किया।
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देवा ने इंटरव्यू में क्या-क्या कहा?
देवा ने आगे बताया कि उनके पास कुछ नकद पैसे भी थे और उनकी डायरी में हथियारों के एक ठिकाने (आर्म्स डंप) का जिक्र था, जिसकी मदद से पुलिस ने और हथियार बरामद किए। देवा ने कहा कि उनके पास अपनी निजी हथियार थे, जिनमें 7 एके-47, 4 आईएनएसएएस और एसएलआर शामिल हैं। बाकी हथियार एक डंप से मिले। उनने यह भी माना कि कई हथियार पुलिस से लूटे गए थे। बता दें कि देवा, माओवादी नेता मदवी हिडमा का करीबी रहे है। उसने बताया कि उन्होंने हिडमा के साथ अलग-अलग इलाकों में करीब डेढ़ साल तक काम किया। हिडमा नवंबर में आंध्र प्रदेश में एक मुठभेड़ में मारा गया था।
तेलंगाना के डीजीपी ने दी थी जानकारी
इससे पहले तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी ने 3 जनवरी को बताया कि देवा समेत कुल 20 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है। इनके पास से कुल 48 आधुनिक हथियार मिले हैं, जिनमें AK-47, LMG, SLR, INSAS राइफल और इजरायल में बनी टेवर सीक्यूबी राइफल शामिल है। डीजीपी ने कहा कि इन आत्मसमर्पणों से इलाके में सीपीआई (माओवादी) काफी कमजोर हुआ है।
पुलिस के मुताबिक, माओवादी संगठन के अंदर काफी अंदरूनी कलह चल रही है। कई कैडर स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे हैं। सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के कारण उनकी आवाजाही लगभग बंद हो गई है। पहले वे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह जाते थे, लेकिन अब यह संभव नहीं है। इसी वजह से वे हथियार डालने को मजबूर हो रहे हैं।
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2003 में सीपीआई एमएल में शामिल हुए थे देवा
पुलिस ने बताया कि देवा 2003 में सीपीआई (एमएल) पीपुल्स वॉर ग्रुप में शामिल हुआ था और हिडमा से काफी प्रभावित था। दोनों एक ही गांव पुव्वार्थी के रहने वाले हैं। देवा को सैन्य रणनीति, विस्फोटक जुटाने, हथियार बनाने और IED तैयार करने में माहिर माना जाता था। नवंबर 2023 में जब हिडमा को प्रमोशन मिला और वह बटालियन से बाहर गया, तब उसी ने देवा को अपना उत्तराधिकारी बनाकर PLGA बटालियन का कमांडर बनाया था।
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