Magh Mela 2026: प्रयागराज में माघ मेले की भव्य शुरुआत हो चुकी है. इस दौरान हजारों कल्पवासी संगम पर आकर एक महीने तक चलने वाले आध्यात्मिक साधना में हिस्सा लेते हैं, जो सादगी, अनुशासन और भक्ति से भरपूर है.
इस धार्मिक अनुष्ठानों में सुबह पवित्र स्नान से लेकर संयमी जीवनशैली पर विशेष ध्यान दिया जाता है. लेकिन जितनी चर्चा कल्पवासियों की हो रही है, उतनी ही कम चर्चा उनके भोजन पर हो रही है. बता दें कि, कल्पवासी रसोई पूरी तरह से सात्विक नियमों का पालन करते है.
कल्पवास में भोजन क्यों जरूरी?
कल्पवास हिंदू धर्म के माघ महीने (जनवरी-फरवरी) में मनाया जाने वाला एक आध्यात्मिक व्रत है, जिसमें कल्पवासी नदी के किनारे रहकर आध्यात्मिक साधना का सुख भोगते हैं.
ऐसे में कल्पवासियों के लिए भोजन की परिभाषा मात्र स्वाद या प्रचुरता से नहीं, बल्कि शरीर और मन की शुद्धि से है. हम जो भी खाते हैं उसका प्रभाव हमारे मन, विचारों और अनुशासन पर पड़ता है.
सात्विक आहार से जुड़े सिद्धांत
कल्पवासी आहार प्राचीन हिंदू दर्शन पर आधारित सात्विक सिद्धांतों का पालन करती है. सात्विक भोजन को पवित्र, शुद्ध, हल्का और मानसिक स्पष्टता के लिए लाभकारी माना जाता है.
इसमें उन सामग्रियों से दूरी बनाई जाती है, जो तामसिक प्रवृत्ति में आते हैं और जिनसे शरीर में अत्यधिक इच्छा, आक्रामकता और आलस्य आते हो.
माघ मेले में सात्विक भोजन पकाते समय इन बातों पर विशेष ध्यान दिया जाता है-
- ताजा पका हुआ भोजन, जिसे रोजाना तैयार किया जाता है.
- कम से कम मसाले और तेल का इस्तेमाल
- प्याज और लहसुन से परहेज
- खाने को अधिकतर उबालकर या धीमी आंच पर पकाया जाता है.
कल्पवासी आमतौर पर क्या खाते हैं?
- खिचड़ी और साधारण अनाज
- मोटे अनाज से बनी रोटियां
- मौसमी सब्जियां
- दूध और दुग्ध से निर्मित खाद्य पदार्थ
- फल और भीगे व सूखे हुए मेवे
कल्पवासियों को किस तरह के भोजन से परहेज करना चाहिए?
- प्याज और लहसुन
- मांस, मछली और अंडे
- पैकेटबंद खाद्य पदार्थ
- अधिक नमक, मसाले या तेल युक्त खाना
- बासी और दोबारा गर्म किया गया भोजन
- यहां तक की चाय और कॉफी का सेवन भी अक्सर छोड़ दिया जाता है और उसकी जगह साधा पानी और गर्म दूध पीना चाहिए.
भोजन के पीछे आध्यात्मिक वजह
- माघ मेले में आए कल्पवासियों के लिए भोजन करना भोग-विलास नहीं, बल्कि एक अनुशासन से जुड़ा कार्य है. मान्यताओं के मुताबिक सात्विक आहार खाने से-
- ध्यान और प्रार्थना करने में आसानी
- शारीरिक भोग-विलास को कम करने में सहायक
- आत्म-नियंत्रण और वैराग्य को बढ़ावा
शरीर और मन को शुद्ध करने के साथ स्वच्छ रखने में मददगार - भोजन अक्सर मौन में या भक्तिमय वातावरण के साथ तैयार किया जाता है, जो आध्यात्मिक और शारीरिक दोनों के लिए जरूरी है.
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