नई दिल्ली. कपिल शर्मा का लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो ‘ शनिवार रात अपने नए एपिसोड के साथ दर्शकों के सामने आया, जिसमें सांसद मनोज तिवारी, पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ और भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह बतौर मेहमान नजर आए. शो में जहां राजनीति, संगीत और भोजपुरी इंडस्ट्री से जुड़े किस्सों पर खूब बातचीत हुई, वहीं पवन सिंह ने अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़ा एक दिलचस्प खुलासा भी किया.
एपिसोड के दौरान पवन सिंह अपेक्षाकृत शांत और संभलकर बोलते दिखाई दिए. उनके जवाब सीमित थे और साफ नजर आ रहा था कि वह हर बात सोच-समझकर कह रहे हैं. इसी बातचीत में उन्होंने बताया कि वह काले रंग के कपड़े पहनने से बचते हैं. इसके पीछे की वजह बताते हुए पवन सिंह ने कहा कि जब भी वह सिर से पांव तक ब्लैक आउटफिट पहनकर बाहर निकलते हैं, तो उस दिन कोई न कोई अप्रिय घटना या अनहोनी जरूर हो जाती है — कभी विवाद, कभी स्टेज पर गड़बड़ी या फिर ऐसा कुछ, जिससे पूरा दिन खराब हो जाता है.
पवन सिंह ने बताया अपना सीक्रेट
सिंगर-एक्टर ने यह भी कहा कि सिर्फ ब्लैक ही नहीं, बल्कि जिस किसी कपड़े को पहनने पर उनका दिन खराब बीतता है, वह उस आउटफिट को दोबारा नहीं पहनते. वहीं, अगर किसी खास पहनावे में सब कुछ अच्छा चलता है, तो वह उसे सालों तक रिपीट करते हैं. उनके मुताबिक, ऐसे लकी आउटफिट्स वह करीब पांच साल तक पहनते रहते हैं.
पावर स्टार की बातों पर छूटी मनोज तिवारी की हंसी
ब्लैक रंग को लेकर पवन सिंह की बात पर शो में मौजूद मनोज तिवारी हंस पड़े, क्योंकि वह खुद उसी एपिसोड में ब्लैक अटायर में नजर आ रहे थे. पवन सिंह ने आगे यह भी खुलासा किया कि उनके कपड़ों में लाल रंग का कोई न कोई कॉम्बिनेशन जरूर होता है, क्योंकि वह इसे अपने लिए बेहद शुभ मानते हैं.
शो में पवन सिंह ने अपनी जिंदगी की प्राथमिकताओं पर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि उनके लिए तीन चीजें सबसे अहम हैं — उनकी मां, उनका काम और दर्शक, जिनके प्यार और समर्थन की वजह से वह आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं.
एपिसोड में संघर्ष के दिनों की यादें भी ताजा हुईं. मनोज तिवारी ने बताया कि कॉलेज के दिनों में पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने तीन साल तक ड्राइवर की नौकरी की थी. वहीं पवन सिंह ने भी अपने बचपन की कठिन परिस्थितियों को याद किया. उन्होंने बताया कि गांव में होने वाली शादियों में बचा हुआ खाना गरीब बच्चों में बांटा जाता था, और उन बच्चों की कतार में वह खुद भी शामिल हुआ करते थे.










