उत्तराखंड के चर्चित काशीपुर किसान आत्महत्या मामले पर सियासत शुरू हो गई है. इस मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने पुलिस मुख्यालय के घेराव का ऐलान किया था. इस प्रदर्शन को लेकर पार्टी की ओर से कई दिनों से तैयारी की जा रही थी और इसे सरकार व पुलिस के खिलाफ एक बड़े आंदोलन के तौर पर पेश किया जा रहा था, लेकिन प्रदर्शन के दिन ही कांग्रेस की तैयारियों का दम निकल गया.
बताया गया कि, जिस वक्त पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन शुरू होना था, उसी वक्त कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गैरमौजूदगी साफ दिखाई देने लगी. तय समय पर न तो बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे और न ही भीड़ जुट पाई. हालात यह रहे कि कुछ ही देर में यह साफ हो गया कि यह प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने वाला. प्रदर्शन स्थल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से ज्यादा संख्या में पुलिसकर्मी और पत्रकार नजर आए.
ठंडा पड़ा कांग्रेसियों का जोश!
करीब आधा दर्जन विधायकों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पुलिस मुख्यालय पहुंचे. हालांकि, इनके साथ मौजूद कार्यकर्ताओं की संख्या बेहद सीमित रही. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शन में वह जोश और भीड़ नहीं दिखी, जिसकी उम्मीद पार्टी कर रही थी. इस वजह से पूरा कार्यक्रम फीका पड़ गया और विरोध प्रदर्शन लगभग फ्लॉप साबित हुआ.
कांग्रेस ने बनाई थी सरकार को घेरने की रणनीति
काशीपुर किसान आत्महत्या मामले को लेकर कांग्रेस सरकार और पुलिस पर लगातार सवाल उठाती रही है. कांग्रेस का आरोप है कि किसान को न्याय नहीं मिला और पुलिस-प्रशासन ने मामले में संवेदनहीनता दिखाई. इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरने की रणनीति बनाई थी, लेकिन कार्यकर्ताओं की कमजोर मौजूदगी ने पार्टी की रणनीति पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं.
फिलहाल, काशीपुर किसान आत्महत्या मामले को लेकर किया गया यह विरोध प्रदर्शन कांग्रेस के लिए सरकार पर दबाव बनाने की बजाय, खुद पार्टी की संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करता नजर आया.










