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बॉक्स ऑफिस पर इस साल रिलीज हुई फिल्मों से ज्यादा का कलेक्शन पिछले साल रिलीज हुई ‘धुरंधर’ का रहा. हाल में रिलीज हुई ‘बॉर्डर 2’ ने अबतक भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 190 और ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर 250 करोड़ रुपए से ज्यादा कलेक्शन कर लिया है.
‘बॉर्डर 2’ से पहले ‘राहू केतु’ और ‘हैप्पी पटेल’ जैसी फिल्में रिलीज हुईं, जो बुरी तरह फ्लॉप हुईं. साउथ में भी इस साल रिलीज हुई फिल्में कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकीं. यहां तक कि प्रभास कि पैन इंडिया फिल्म द राजा साब भी डिजास्टर साबित हुई. यहां हम आपको एक ऐसी एक्शन थ्रिलर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो महज 28 करोड़ रुफए के बजट में बनी और इसने 300 करोड़ रुपए से ज्यादा कलेक्शन कर लिया है. (फोटो साभारः यूट्यूब थंबनैल)

बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाने वाली यह फिल्म अभी तक बॉक्स ऑफिस पर बनी हुई है और 400 करोड़ रुपए के आंकड़े को छूने जा रही है. यह फिल्म मकर संक्रांति के मौके पर बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई थी. इसका मुकाबला ‘द राजा साब’, ‘पराशक्ति’, ‘वा वाथियार’, ‘भारत महासयुलाकु विज्ञानप्ति’ जैसी फिल्मों के साथ था. (फोटो साभारः यूट्यूब थंबनैल)

मकर संक्रांति के मौके पर रिलीज हुई इस फिल्म का नाम ‘मनम शंकर वरप्रसाद गरु’ है. निर्देशक अनिल रविपुडी ने मेगास्टार चिरंजीवी की पुरानी कॉमेडी का तड़का फिर से लगाया है, जिससे यह फिल्म फैंस और फैमिली ऑडियंस दोनों को खूब पसंद आ रही है. पहले ही दिन से फिल्म को जबरदस्त पॉजिटिव रिव्यू मिले और कड़ी टक्कर के बावजूद यह बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई है. (फोटो साभारः यूट्यूब थंबनैल)
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फिल्म ने अब तक 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर सबको हैरान कर दिया है. वर्ल्डवाइड, फिल्म ने 120 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा लिए हैं, जो इसके 240 करोड़ रुपये के ब्रेक-ईवन टारगेट से कहीं आगे है. मौजूदा रफ्तार को देखते हुए ट्रेड सर्कल्स का मानना है कि फिल्म 400 करोड़ क्लब की ओर बढ़ रही है. (फोटो साभारः यूट्यूब थंबनैल)

निर्देशक अनिल रविपुडी ने हाल ही में बताया कि यह फिल्म सिर्फ 28 करोड़ रुपये के बजट में बनी है. शुरुआत में इसका बजट 25 करोड़ रुपये रखा गया था, लेकिन 3 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च हो गए. आज के समय में जब फिल्मों के बजट आसमान छू रहे हैं, ऐसे में मेगास्टार की फिल्म इतने कम बजट में बनाना और उसे सुपरहिट बनाना वाकई काबिल-ए-तारीफ है. (फोटो साभारः यूट्यूब थंबनैल)

कहानी भले ही नई न हो और नरेशन भी बहुत हार्ड नहीं है, लेकिन फिल्म की ट्रीटमेंट ताजगी और त्योहार के रंग से भरी है. अनिल रविपुडी जानते हैं कि संक्रांति के मौके पर क्या चलता है- साफ-सुथरी कॉमेडी, इमोशंस और फैमिली एंटरटेनमेंट. ढाई घंटे तक फिल्म पूरी तरह एंटरटेन करती है, जिससे हर उम्र के दर्शकों को यह पसंद आ रही है. (फोटो साभारः यूट्यूब थंबनैल)

कहानी एनआईए ऑफिसर शंकर वरप्रसाद (चिरंजीवी) के इर्द-गिर्द घूमती है. वह सशिरेखा (नयनतारा) को पहली नजर में ही दिल दे बैठते हैं, वो भी उसकी सगाई के दौरान. सशिरेखा अपने पिता के दबाव में सगाई के लिए मान जाती है, लेकिन एक अनहोनी के चलते सगाई टूट जाती है. किस्मत बार-बार शंकर वरप्रसाद और सशिरेखा को मिलाती है और दोनों मान लेते हैं कि उनकी जोड़ी ऊपरवाले ने बनाई है, इसलिए आखिरकार दोनों शादी कर लेते हैं. (फोटो साभारः यूट्यूब थंबनैल)

पिता के विरोध के बावजूद सशिरेखा शंकर वरप्रसाद से शादी कर लेती है और ऐशो-आराम छोड़कर सादा जीवन चुनती है. लेकिन बाद में उसका पिता उनकी जिंदगी में वापस आता है और दोनों को अलग करने की ठान लेता है. शुरुआत में शंकर को सीईओ की पोस्ट ऑफर की जाती है, लेकिन धीरे-धीरे यह अपमान, भावनात्मक दूरी और चालबाजी में बदल जाता है—जिससे दोनों के रिश्ते में दरार आ जाती है. टकराव इतना बढ़ जाता है कि दोनों अलग हो जाते हैं और तलाक तक बात पहुंच जाती है. इसके बाद की कहानी शंकर वरप्रसाद के अपनी टूटी शादी को फिर से जोड़ने की कोशिशों पर आधारित है. (फोटो साभारः यूट्यूब थंबनैल)
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