बीना/सोनभद्र/एबीएन न्यूज। करीब साढ़े छह वर्ष पूर्व हुए किरन सोनकर उर्फ रेनू हत्याकांड में न्यायालय ने दोषियों को कड़ी सजा सुनाते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया है। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/सीएडब्लू, सोनभद्र अर्चना रानी की अदालत ने बुधवार को सुनवाई के बाद दोषी पति, सास एवं ससुर को दोषसिद्ध पाते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास तथा प्रत्येक को 35-35 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में दोषियों को 6-6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। साथ ही जेल में बिताई गई अवधि सजा में समाहित की जाएगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मृतका किरन सोनकर उर्फ रेनू के पिता श्यामलाल सोनकर पुत्र स्वर्गीय राम किसुन सोनकर, निवासी चकिया, थाना चकिया, जनपद चंदौली ने 20 मई 2019 को रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में तहरीर देकर अवगत कराया था कि उन्होंने अपनी पुत्री की शादी 14 दिसंबर 2015 को धरम सोनकर पुत्र मिश्रीलाल, निवासी चुर्क, थाना रॉबर्ट्सगंज, जनपद सोनभद्र के साथ की थी। शादी के बाद बेटी के ससुराल पहुंचते ही पति धरम सोनकर, सास लक्षन देवी, ससुर मिश्रीलाल तथा जेठ-जेठानी द्वारा दहेज में चार पहिया वाहन की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया जाने लगा।
मृतका द्वारा मायके में इसकी जानकारी दिए जाने पर दोनों पक्षों के संभ्रांत लोगों की मौजूदगी में सुलह-समझौता भी कराया गया, जिसके बाद वह कुछ समय मायके में रही। दो माह बाद पुनः ससुराल जाने पर भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। करीब चार माह पूर्व मृतका ने फोन कर पुनः दहेज उत्पीड़न की जानकारी अपने पिता को दी थी। 20 मई 2019 की सुबह लगभग 8 बजे सूचना मिली कि बेटी की हालत गंभीर है। जब परिजन ससुराल पहुंचे तो किरन की मौत हो चुकी थी। शरीर पर चोटों के कई निशान तथा पैर में जलने के निशान पाए गए, जिससे दहेज के लिए हत्या किए जाने की आशंका प्रबल हुई।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्क, गवाहों के बयान तथा अभिलेखों का अवलोकन करने के उपरांत पति धरम सोनकर, सास लक्षन देवी और ससुर मिश्रीलाल को दोषी ठहराया। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने प्रभावी पैरवी की। इस फैसले से दहेज हत्या के मामलों में न्याय की उम्मीद और मजबूत हुई है तथा समाज को सख्त संदेश गया है कि ऐसे अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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