बीना/सोनभद्र/एबीएन न्यूज। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन सोनभद्र के अधिवक्ताओं ने बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में यूजीसी बिल कानून के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने उच्च शिक्षा में समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की मांग को लेकर नारेबाजी की तथा महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी सोनभद्र को सौंपा।
प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जगजीवन सिंह एडवोकेट ने कहा कि उच्च शिक्षा में समान अवसर और सामाजिक न्याय की स्थापना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यूजीसी बिल उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना था कि लंबे समय से अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षण संस्थानों में अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। यह कानून उन वर्गों के हितों की रक्षा करते हुए उन्हें समान अवसर प्रदान करेगा।
पूर्व अध्यक्ष श्याम बिहारी यादव एडवोकेट ने कहा कि कुछ संगठन यूजीसी बिल को लेकर भ्रम फैलाकर छात्रों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे सामाजिक समरसता प्रभावित हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के साथ-साथ छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

वरिष्ठ उपाध्यक्ष पवन कुमार सिंह एडवोकेट ने प्रशासन से मांग की कि यूजीसी बिल को बिना किसी देरी के प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर विरोध या बाधा उत्पन्न हो रही है तो सरकार को छात्रों के हित में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
प्रदर्शन एवं ज्ञापन सौंपने के दौरान पवन कुमार सिंह, प्रदीप कुमार मौर्य, हीरालाल पटेल, सत्यप्रकाश कुशवाहा, राजेश यादव, राजेश कुमार मौर्य, महेंद्र कुशवाहा, कमलेश सिंह, चतुर्भुज शर्मा, कामता यादव, सुरेश कुशवाहा, रामगुल्ली यादव, राजेंद्र यादव, रविंद्र पटेल, संतोष कुमार, संतोष पटेल, शाहनवाज़ आलम खान, प्रदीप सिंह, शैलेन्द्र कुमार सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। अधिवक्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को सशक्त, न्यायसंगत और सर्वसमावेशी बनाना है, ताकि देश के प्रत्येक वर्ग के छात्रों को समान अवसर प्राप्त हो सके।
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