दुनियाभर में चर्चा का केंद्र बने अमेरिकी टैरिफ पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गए व्यापक टैरिफ को गैरकानूनी करार दे दिया है। यह वही टैरिफ हैं जिनके जरिए ट्रंप ने दोस्त हो या फिर दुश्मन सभी देशों पर सख्त आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश की थी। इस नीति का शिकार पहले भारत भी हुआ था। ऐसे में अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने वैश्विक राजनीति और व्यापार जगत में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन टैरिफ की मार झेलने वाली भारतीय निर्यातकों को कोई राहत या रिफंड मिलेगा?
पहले बात अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की करें तो कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से लगाए गए व्यापर आयात शुल्क (टैरिफ) को गैरकानूनी करार दे दिया है। अदालत ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) का उपयोग करते हुए अपनी कानूनी सीमा का उल्लंघन किया। यह फैसला उस कानून के तहत लगाए गए सभी व्यापक टैरिफ पर लागू होगा, जिनमें भारत पर लगाया गया अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है।
अब ट्रंप टैरिफ का पूरा खेल समझिए
बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला देते हुए कई देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाए थे। 2 अप्रैल 2025 को घोषित इन टैरिफ के तहत भारत पर भी भारी शुल्क लगाया गया। रूस से तेल खरीदने के मुद्दे को लेकर भारत पर कुल प्रभावी टैरिफ दर 50% तक पहुंच गई थी, जो किसी भी देश के लिए सबसे अधिक थी। हालांकि जनवरी 2026 में अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बाद इस दर को घटाकर 18% कर दिया गया, लेकिन तब तक भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
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टैरिफ नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को IEEPA के तहत इस तरह व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं था। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अब तक वसूले गए अरबों डॉलर के टैरिफ को वापस किया जाएगा या नहीं। मामले में अदालत के न्यायाधीश ब्रेट कवानौघ ने अपने असहमति नोट में लिखा कि अगर सरकार को पैसा लौटाना पड़ा तो यह प्रक्रिया बेहद जटिल और उलझी हुई हो सकती है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि रिफंड कैसे और किसे दिया जाएगा।
क्या भारतीय निर्यातकों को मिलेगा रिफंड?
कोर्ट के फैसले के बाद सवाल जब भारतीय निर्यातकों के रिफंड मिलेगा या नहीं यह पूछे जाने लगा, तब कई विशेषज्ञों का यह मानना है कि भारतीय निर्यातकों को सीधे तौर पर कोई रिफंड मिलने की संभावना बेहद कम है। इसका कारण यह है कि टैरिफ भारतीय निर्यातकों ने नहीं, बल्कि अमेरिकी आयातकों ने अमेरिकी सरकार को चुकाया था।
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि जब कोई अमेरिकी कंपनी भारत से सामान मंगाती है, तो वही कंपनी अमेरिकी कस्टम विभाग को टैरिफ का भुगतान करती है। बाद में यह अतिरिक्त लागत अमेरिकी उपभोक्ताओं से वसूली जाती है। इसलिए यदि कोई रिफंड प्रक्रिया शुरू होती है तो उसका लाभ अमेरिकी आयातकों को मिलेगा, न कि भारतीय निर्यातकों को।
कुछ कंपनियां पहले हीं मांग चुकी है रिफंड
रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ अमेरिकी कंपनियां, जिनमें खुदरा क्षेत्र की बड़ी कंपनी कॉस्टको भी शामिल है, पहले ही अदालत में रिफंड की मांग कर चुकी हैं। हालांकि व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि रिफंड की प्रक्रिया लंबी कानूनी लड़ाई के बाद ही संभव होगी और इसमें कई साल लग सकते हैं।
भारतीय निर्यातकों पर कैसा असर होगा, ये भी समझिए
इस बात ऐसे समझे कि एक तरफ टैरिफ का भुगतान अमेरिकी आयातकों ने किया, लेकिन इसका सीधा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ा। ऊंचे शुल्क की वजह से भारतीय उत्पाद अमेरिका में महंगे हो गए, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता कम हो गई। कई सेक्टर जैसे फार्मा, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और केमिकल्स को ऑर्डर घटने और कीमतें कम करने का दबाव झेलना पड़ा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भले ही टैरिफ अब अवैध घोषित हो गए हों, लेकिन जो नुकसान इस अवधि में हुआ, उसकी भरपाई के लिए अमेरिका में कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है।
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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। अतिरिक्त 18% टैरिफ हटने से भारत के लगभग 55% निर्यात फिर से सामान्य एमएफएन दरों के तहत आ सकते हैं। इससे भारत को चल रही व्यापार वार्ताओं में मजबूत स्थिति मिल सकती है। साथ ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भी महंगाई को लेकर दबाव रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि ऊंचे टैरिफ ने कीमतों को बढ़ाया और आर्थिक वृद्धि पर असर डाला। ऐसे में अदालत का यह फैसला व्यापक आर्थिक माहौल के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
अब संभावनाओं को भी समझिए
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब मामला इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी सरकार और निचली अदालतें रिफंड को लेकर क्या रुख अपनाती हैं। यदि रिफंड का रास्ता खुलता है तो अमेरिकी आयातकों को कस्टम प्रक्रिया और अदालतों के जरिए दावा करना होगा। बात अगर भारतीय निर्यातकों की करें तो उनके लिए यह फैसला तुरंत आर्थिक राहत नहीं लाता, लेकिन आगे चलकर अमेरिकी बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता बहाल हो सकती है।












