अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर आए अदालत के ताजा फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी सरकार की बातों को सही तरीके से नहीं सुना गया। ट्रंप ने फैसले को निराशाजनक बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसे निर्णय की उम्मीद नहीं थी। उनके मुताबिक, यह फैसला हतोत्साहित करने वाला है और इससे अमेरिका के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है।
राष्ट्रपति ने निर्णय सुनाने वाले जजों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने संकेत दिया कि अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकी उद्योगों के हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। ट्रंप ने दोहराया कि उनका लक्ष्य अमेरिका को फिर से महान बनाना है और इसके लिए सख्त व्यापारिक नीतियां जरूरी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि टैरिफ को लेकर सरकार के पास अभी भी कई अन्य कानूनी और नीतिगत विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उनकी प्रशासनिक टीम सभी संभावनाओं पर विचार कर रही है और अमेरिकी उद्योगों तथा श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।
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भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने के लिए किया टैरिफ का इस्तेमाल
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्होंने वैश्विक टैरिफ का इस्तेमाल भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रोकने के लिए किया। ट्रंप ने दावा किया मैंने अब तक आठ युद्धों को टैरिफ के माध्यम से समाप्त किया है, जिनमें भारत और पाकिस्तान जैसी गंभीर, न्यूक्लियर स्थिति वाली लड़ाइयां भी शामिल हैं। इन टैरिफ की वजह से हम बड़े नुकसान से बचे। ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के हवाले से कहा कि उनके प्रयासों से लगभग 3.5 करोड़ जीवन बचाए गए और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत हुई। हालांकि भारत ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष रुकने में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से लगातार इनकार किया है। ट्रंप ने पिछले साल 10 मई के बाद से भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने का श्रेय 80 से अधिक बार लिया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गहराई से निराशाजनक बताया और कहा कि अदालत के कुछ सदस्यों में देशहित में सही निर्णय लेने का साहस नहीं था, जिसके लिए उन्हें शर्म महसूस होती है।
टैरिफ नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को IEEPA के तहत इस तरह व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के इस फैसले से डोनाल्ड ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ को खत्म कर दिया है। इस फैसले से वैश्विक व्यापार, व्यवसायों, उपभोक्ताओं, मुद्रास्फीति के रुझानों और देश भर के घरेलू वित्त पर व्यापक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति नहीं, कांग्रेस को
- अमेरिकी संविधान के अनुसार, कर और शुल्क लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि कांग्रेस को हासिल है।
- हालांकि ट्रंप ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना ही, अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति कानून (आईईईपीए) लागू करने हुए लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर शुल्क लगा दिया।
- आईईईपीए सिर्फ राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति को वाणिज्य को विनियमित करने का अधिकार देता है।
- ट्रंप ने अन्य कानूनों के तहत भी कुछ अतिरिक्त शुल्क लगाए हैं, जिनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
- अक्तूबर से मध्य दिसंबर तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ये शुल्क ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्कों से प्राप्त राजस्व का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं।
10 महीने पहले शुरू हुआ था ट्रंप टैरिफ
बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला देते हुए कई देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाए थे। 2 अप्रैल 2025 को घोषित इन टैरिफ के तहत भारत पर भी भारी शुल्क लगाया गया। रूस से तेल खरीदने के मुद्दे को लेकर भारत पर कुल प्रभावी टैरिफ दर 50% तक पहुंच गई थी, जो किसी भी देश के लिए सबसे अधिक थी। हालांकि जनवरी 2026 में अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बाद इस दर को घटाकर 18% कर दिया गया, लेकिन तब तक भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।











