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किसी फिल्म में नजर आए चार हीरो-हीरोइन सांसद भी बन जाए तो इसे दुर्लभ संयोग ही कहा जाएगा. बॉलीवुड की एक कालजयी फिल्म के साथ ऐसा ही संयोग जुड़ा हुआ है. मूवी में नजर आए चार सितारों के अलावा स्क्रिप्ट लिखने वाले राइटर भी सांसद बने. इस फिल्म से एक और दिलचस्प संयोग जुड़ा है. मूवी में हीरो-हीरोइन के अलावा डायरेक्टर-राइटर ने दो-दो शादियां रचाईं. यह बॉलीवुड की संभवत: इकलौती फिल्म है जिसके साथ ऐसे संयोग जुड़े हैं. फिल्म इतनी कालजयी है कि देश की आधी आबादी इस मूवी को देखकर, इसके डायलॉग सुनकर ही बड़ी हुई है. यह फिल्म कौन सी है, आइए जानते हैं…..
बॉलीवुड की कालजयी फिल्मों के पर्दे के पीछे की कहानियां अक्सर सुनने को मिल जाती है. 50 साल पहले एक ऐसी कल्ट क्लासिक फिल्म आई जिसमें नजर आए चार सितारे सांसद बने. फिल्म की स्टोरी लिखने वाला स्क्रीनप्ले राइटर भी सांसद बने और संसद भवन पहुंचे. इस फिल्म में चार सितारों की किस्मत रातोंरात चमकी थी. इतना ही नहीं, फिल्म के चार सितारों ने दो-दो शादियां भी रचाईं. एक तो दो-दो बीवियों के साथ आज भी एक ही छत के नीचे रहता है. हम 1975 में रिलीज हुई ‘शोले’ फिल्म की बात कर रहे हैं. आइये जानते हैं इस मूवी से जुड़े दिलचस्प तथ्य……

‘शोले’ फिल्म की कहानी सलीम-जावेद की जोड़ी ने लिखी थी. यह एक 1975 एक्शन-एडवेंचर फिल्म थी. फिल्म 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी जिसका डायरेक्शन रमेश सिप्पी ने किया था. प्रोड्यूस जीपी सिप्पी थे. मूवी में धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, संजीव कुमार, जया बच्चन, अमजद खान लीड रोल में थे. फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मूवी के हर किरदार के डायलॉग लोगों की मुंहजुबानी याद हैं. शोले फिल्म की कहानी 1971 में आई मूवी ‘मेरा गांव मेरा देश’ से काफी कुछ मिलती-जुलती है. यह कहा जा सकता है कि इसी फिल्म से इंस्पायर होकर राइटर सलीम -जावेद ने शोले फिल्म की स्टोरी लिखी थी. दोनों फिल्मों में कई समानताएं हैं.

यह भी दिलचस्प संयोग है कि शोले फिल्म में नजर आया हर लीड एक्टर सांसद भी बना. फिल्म में अमिताभ बच्चन ने जयदेव उर्फ जय का रोल निभाया था. वहीं धर्मेंद्र वीरु बने थे. बसंती का कालजयी किरदार हेमा मालिनी ने निभाया था. जया भादुड़ी ने राधा (ठाकुर की बहू) के छोटे से में छाप छोड़ी थी. यही चारों सितारे फिल्म के मुख्य किरदार थे. इन चारों की निजी जिंदगी भी रोचक है. चारों सितारे सांसद बने.
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सबसे पहले अमिताभ बच्चन ने राजनीति में एंट्री ली. 1984 के चुनाव में उन्होंने इलाहाबाद (अब प्रयागराज) लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था. राजीव गांधी उनके दोस्त थे. गांधी परिवार से उनके पिता के बहुत अच्छे रिश्ते थे. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी उन्हें राजनीति में लाए. अमिताभ बच्चन ने आखिरी मिनट पर नामांकन किया. भारी मतों से जीते थे लेकिन सिर्फ तीन साल बाद ही राजनीति से उनका मोह भंग हो गया. अमिताभ ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘चुनाव जीतने के बाद जब मैंने इलाबाहाद में कुछ दिन बिताए तो एहसास हुआ कि यह बहुत मुश्किल काम है.’ 1987 में बोफोर्स घोटाले में अमिताभ का नाम आया. आरोपों से आहत उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली.

‘शोले’ में जया बच्चन भी नजर आई थीं. जया बच्चन ने राजनीति में एंट्री ली. समाजवादी पार्टी उन्हें 2004 से राज्यसभा भेज रही है. अमिताभ बच्चन जहां राजनीति में नहीं जम पाए, वहीं जया बच्चन पिछले 20 साल से लगातार पॉलिटिक्स में एक्टिव है. इतना जरूर है कि उन्होंने लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा. अपने गुस्से के चलते हमेशा सुर्खियां बटोरने वाली जया बच्चन को अमर सिंह राजनीति में लाए थे.

शोले फिल्म में वीरू का कालजयी रोल निभाने वाले ही मैन के नाम से मशहूर रहे धर्मेंद्र बीजेपी में शामिल हुए थे. 2004 में राजस्थान की बीकानेर लोकसभा सीट से सांसद का चुनाव लड़ा. 5 लाख से ज्यादा मतों से चुनाव जीता था. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी रामेश्वर लाल को हराया था. धर्मेंद्र ने किसी तरह अपना कार्यकाल पूरा किया. फिर चुनाव नहीं लड़ा और राजनीति से दूरी बना ली. धर्मेंद्र का पिछले साल 24 नवंबर 2025 को 89 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया था. यह भी दिलचस्प संयोग है कि जिस साल धर्मेंद्र लोकसभा सांसद बने, उसी साल जया बच्चन राज्य सभा सांसद बनीं. शोले फिल्म के लीड सितारे धर्मेंद्र ने निजी जिंदगी में दो-दो शादियां रचाईं. पहली शादी उन्होंने प्रकाश कौर से की थी. दूसरी शादी उन्होंने हेमा मालिनी से 1980 में की थी. अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर से तलाक लिए बिना धर्म बदलकर शादी की थी. उस समय धर्मेंद्र चार बच्चों के पिता भी थे. हेमा मालिनी से उम्र में 13 साल बड़े थे. इस शादी से उन्हें दो बेटियां ईशा देओल और अहाना देओल हैं. एक और हैरान करने वाली बात यह है कि हेमा मालिनी कभी अपनी ससुराल नहीं गई.

शोले फिल्म में बसंती का रोल निभाने वालीं हेमा मालिनी ने ही 2003 में राजनीति में एंट्री ली थी. बीजेपी ने उन्हें राज्य सभा सांसद बनाया था. बीजेपी ने 2014 में पहली बार मथुरा से हेमा मालिनी को लोकसभा का टिकट दिया. हेमा ने आरएलडी चीफ जयंत चौधरी को 3.30 लाख वोट से हराया. मथुरा को आरएलडी का गढ़ माना जाता है लेकिन हेमा मालिनी को जीत मिली. दूसरी बार 2019 में बीजेपी ने एक बार फिर से उन पर भरोसा जताया और मथुरा से चुनाव मैदान में उतारा. इस बार आरएलडी ने कुंवर नरेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया था.

हेमा मालिनी ने उन्हें 2.93 लाख वोट से हराया और दूसरी बार सांसद बनीं. 75 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी बीजेपी ने 2024 के चुनाव में उन्हें मथुरा से मैदान में उतारा. इस बार भी वह पार्टी के विश्वास पर खरी उतरीं. इस बार आरएलडी एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी. ऐसे में उनका मुकाबला बसपा प्रत्याशी सुरेश सिंह से हुआ. हेमा मालिनी ने 1.88 लाख वोट से शिकस्त देकर जीत की हैट्रिक लगाई.
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