जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में रविवार देर रात करीब डेढ़ बजे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और लेफ्ट छात्र संगठन से जुड़े छात्र आपस में भिड़ गए। छात्रों के बीच जमकर झड़प हुई। इससे परिसर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। छात्रों ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडे, रॉड से मारने और पत्थरबाजी का आरोप लगाया। जिसको लेकर सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल है। इस मारपीट में कई छात्र घायल भी हुए हैं। मारपीट से बचने के लिए छात्र परिसर में छिपते भी दिखे।
इस घटनाक्रम से सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा। मारपीट की घटना को लेकर एबीवीपी और लेफ्ट छात्र संगठनों ने एक-दूसरे पर कई गंभीर आरोप लगाए। विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने बयान जारी कर विश्वविद्यालय का माहौल बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। दरअसल, जेएनयू छात्र संघ की ओर से समता जुलूस का आह्वान किया था। जेएनयू कुलगुरु निवास के पास जुलूस के समाप्त होने के बाद निष्कासित छात्र संघ पदाधिकारियों ने अलग-अलग स्कूलों में लॉकडाउन का आह्वान किया।
स्कूल ऑफ सोशल साइंस में हुआ बवाल
इसको लेकर एबीवीपी ने विरोध दर्ज कराया। स्कूल ऑफ सोशल साइंस में लगे ताले को तोड़ने के लिए एबीवीपी के जेएनयू छात्र संघ के पूर्व संयुक्त सचिव वैभव मीणा पहुंचे। सामान्य छात्रों की पढ़ाई के लिए उन्होंने स्कूल पर लगे ताले को तोड़ा। इसके बाद मामला बिगड़ता चला गया और छात्र संगठन से जुड़े छात्रों के बीच आपस में मारपीट शुरू हो गई। वैभव मीणा ने कहा कि रीडिंग रूम से छात्रों को निकाला जा रहा था। सामान्य छात्रों को परिसर में भगाया जा रहा था। सूचना मिलने पर स्कूल पहुंचे थे। वहां लाइब्रेरी तोड़फोड़ मामले में निष्कासित छात्र संघ के पदाधिकारियों के साथ नकाबपोश छात्रों की भीड़ ने परिसर में जमकर आंतक मचाया। करीब 400 की भीड़ 50 छात्रों पर टूट पड़ी। डंडे, लोहे की रॉड और पत्थर से हमला किया। जान-बचाने के लिए इलेक्ट्रीशियन के कमरे में भागना पड़ा।
दौड़ा-दौड़ा कर छात्रों को पीटा
वैभव ने बताया कि दो शोधार्थियों विजय और मनीष को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। जैसे-तैसे स्कूल परिसर के शौचालयों एवं बिजलीघरों में वह छिपे। छिपे होने पर दरवाजों को उपद्रवी भीड़ ने तोड़ दिया। वामपंथी छात्र संगठनों का यह हमला सुनियोजित था। पुलिस और जेएनयू सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने रहे। छात्रों की मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। साथ ही यह भी अचंभित करने वाला है कि जेएनयू प्रशासन ने छात्र संघ पदाधिकारियों को निष्कासित किया है। लेकिन निष्कासन के बावजूद उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में इतनी बड़ी हिंसा को अंजाम दिया। इस हिंसा के पीछे जेएनयू प्रशासन भी उतना ही जिम्मेदार है जितना कि जेएनयू छात्रसंघ के निष्कासित पदाधिकारी दोषी है।
शौचालय में छिपे छात्र पर चलाया अग्निशमन यंत्र
मारपीट का शिकार हुए जेएनयू बायोटेक्नोलॉजी के छात्र प्रतीक भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने अपनी जान शौचालय में छिपकर बचाई। शौचालय के बाहर 50 लोगों की भीड़ थी। उस भीड़ ने अग्निश्मन यंत्र को चला दिया। इस वजह से शौचालय में मेरा दम घुट गया। सांस भी नहीं आ रही थी। इसको लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल है। जेएनयू एबीवीपी के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि इस हमले में 10-15 की तादाद में छात्र घायल हैं। इनका सफदरजंग अस्पताल में उपचार जारी है। एबीवीपी जेएनयू मंत्री प्रवीण पीयूष ने कहा कि इस घटना की निंदा करते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन एवं दिल्ली पुलिस से मांग है कि परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान कर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज और उनकी शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
स्कूलों में किया जा रहा था लॉकडाउन
जेएनयू छात्र संघ में महासचिव सुनील यादव ने कहा कि एसएस-एसआईएस लॉन में निष्कासन सहित कई दूसरे मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी है। जेएनयू कुलगुरु के यूजीसी रेगुलेशन के संबंध में दिए बयान के विरोध में आयोजित समता जुलूस के बाद यह सारा बवाल हुआ। स्कूलों में लॉकडाउन को लेकर जनरल बॉडी मीटिंग हो चुकी थी उसी के मद्देनजर स्कूलों को लॉकडाउन कराया जा रहा था। कहीं किसी स्कूल में कोई छात्र या प्रोफेसर अंदर तो नहीं उसकी जांच की जा रही थी। लॉकडाउन की कोशिश को विफल करने के लिए जेएनयू कुलगुरु ने एबीवीपी से जुड़े छात्रों को भेज दिया।
एबीवीपी के आरोप बेबुनियाद
जेएनयू छात्र संघ में महासचिव सुनील यादव ने कहा कि 25-30 की तादाद में मुंह पर कपड़ा बांधकर हाथ में ईंट और रॉड लेकर छात्रों पर हमला किया जाता है। छात्र संघ पदाधिकारियों को गाली और धमकी दी जाती है। छात्र संघ पदाधिकारियों में से कोई भी हिंसा में शामिल नहीं था। यह नकारात्मक माहौल बनाया जा रहा है। अगर छात्र संघ पदाधिकारी के शामिल होने का एक भी सबूत दिखाएंगे तो इस्तीफा दे देंगे। पुलिस को कॉल करने पर वह भी छात्रों की सुरक्षा मुहैया नहीं करा पाई। एबीवीपी की तरफ से जो भी आरोप लगाए जा रहे है वह बेबुनियाद है।
लाइब्रेरी में छिपकर बचाई जान
जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने आरोप लगाया कि सभी स्कूल में शांतिपूर्वक लॉकडाउन था। छात्रों पर हमले के लिए जेएनयू कुलगुरु की ओर से भीड़ भेजी गई थी कि कहीं आंदोलन सफल न हो जाएं। सेंट्रल लाइब्रेरी में छिपकर 150-200 छात्रों ने अपनी जान बचाई है। सुबह सात बजे तक छात्र लाइब्रेरी में बैठे रहे। हिंसा करना हमारी आदत और फितरत नहीं है। वहीं जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष के गोपिका बाबू और संयुक्त सचिव दानिश अली ने कहा कि एबीवीपी ने हमला कर सामान्य छात्रों को निशाना बनाया। कई छात्राएं भी चोटिल हुई हैं। सब कुछ शांतिपूर्वक चल रहा था। छात्रों के मुद्दों को भटकाने के लिए एबीवीपी ने यह हिंसा की है।
जेएनयू हिंसा मामले में मुकदमा दर्ज
जेएनयू हिंसा मामले में मुख्य सुरक्षा अधिकारी से मिली शिकायत के आधार पर वसंतकुंज नाॅर्थ थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मुख्य सुरक्षा अधिकारी से जेएनयू छात्र संघ पदाधिकारियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ मिली शिकायत पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है। इसमें सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाने का मामला शामिल है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।
जेएनयू प्रशासन ने हिंसा पर चिंता की व्यक्त, बीएनएस के तहत होगी कार्रवाई
जेएनयू परिसर में रविवार रात दो छात्र समूहों के बीच झड़प और हिंसा पर प्रशासन ने चिंता जताई है। इस संबंध में जेएनयू प्रशासन ने बयान जारी किया है कि परिसर के भीतर कई शैक्षणिक भवनों को कथित तौर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के एक समूह ने बंद कर दिया था। प्रदर्शनकारी छात्र केंद्रीय पुस्तकालय में घुस गए और कथित तौर पर अनिच्छुक छात्रों को धमकाया और उन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मजबूर किया। जेएनयू प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। वर्तमान में सभी कक्षाएं और अन्य गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
जेएनयू प्रशासन ने कहा कि परिसर में इस तरह के अराजक व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं। विश्वविद्यालय के नियमों और विनियमों और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत परिसर में उचित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन सभी छात्रों के शैक्षणिक हितों और कल्याण की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी हितधारकों से अनुरोध है कि वह किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि में शामिल होने से बचें और परिसर में शांति और सद्भाव बनाए रखने में सहयोग करें। अन्यथा नियमों के अनुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
किसी छात्र को नहीं लगी गंभीर चोट
इस मामले को लेकर जेएनयू के एक अधिकारी ने कहा कि किसी छात्र को गंभीर चोट का मामला उनके संज्ञान में अभी तक नहीं आया है। सीसीटीवी कैमरे से पूरे हंगामे की फुटेज खंगाली जा रही है। एक महिला सुरक्षाकर्मी के चोटिल होने के बात जरूर सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। हिंसा में शामिल छात्रों पर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस हिंसा को लेकर जेएनयू शिक्षक संघ ने भी बयान जारी कर चिंता व्यक्त की है।
पांच जनवरी 2020 की हिंसा की याद ताजा घटनाक्रम ने ताजा कर दी है। जेएनयू कुलगुरु शांतिश्री डी.पंडित पहले वाले कुलगुरु की रणनीति को अपना रही हैं। साक्षात्कार में जाति पर उनका बयान आश्चर्यजनक नहीं है। जेएनयू कुलगुरु के इस्तीफे की मांग को दोहराते है। साथ ही सभी से संयम बनाने की अपील करते हैं।
-सुरजीत मजूमदार, अध्यक्ष शिक्षक संघ
मानव शृंखला बनाकर हिंसा के खिलाफ जताया विरोध
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में हुई हिंसा के खिलाफ छात्र संघ ने सोमवार शाम को मानव शृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया। इसके लिए छात्र साबरमती टी पॉइंट पर जुटे और स्कूल एरिया तक मानव शृंखला बनाई गई। छात्र संघ ने जेएनयू कुलगुरु के बयान वाले मामले पर फिर से इस्तीफे और माफी की मांग को दोहराया। छात्र संघ ने एबीवीपी पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर ईंटों ओर रॉड से हमले का आरोप भी लगाया। छात्र संघ के अनुसार हमलावर यूजीसी के नियमों के खिलाफ थे। जेएनयू कुलगुरु भी इसके विरोध में है। वहीं एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठनों ने हिंसा मामले पर पुलिस में शिकायत देने की बात भी की और चोटिल हुए छात्रों की एमएलसी कराने की जानकारी भी दी।












