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बॉलीवुड में विलेन का नाम सुनते ही आमतौर पर मेल एक्टर्स के चेहरे दिमाग में आते हैं, लेकिन कुछ हीरोइन ऐसी रहीं, जिन्होंने न सिर्फ अपनी एक्टिंग से दर्शकों को डराया, बल्कि कई बार हीरो को भी पीछे छोड़ दिया. बदले की आग में जलती महिलाएं हों या सोशियोपैथिक किरदार, इन एक्ट्रेस ने साबित किया कि बुराई को परदे पर उतारने का अपना एक अलग ही जलवा होता है.
नई दिल्ली. भारतीय सिनेमा में लंबे समय तक खलनायक की छवि ज्यादातर पुरुष कलाकारों से जुड़ी रही, लेकिन कई फिल्मों में ऐसी महिला किरदार भी सामने आए जिन्होंने अपनी खतरनाक अदाकारी से हीरो तक के पसीने छुड़ा दिए. इन फीमेल विलेन ने न सिर्फ कहानी को दमदार बनाया, बल्कि अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से पूरी फिल्म पर छा गईं. इन खलनायिकाओं ने अपने दमदार अंदाज से फिल्मों को यादगार बना दिया. यही वजह है कि इन किरदारों ने न सिर्फ दर्शकों का ध्यान खींचा बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी मेकर्स के खूब नोट छपवाए.

श्रीराम राघवन की फिल्म ‘अंधाधुन’ में तबु ने सिमी खन्ना का किरदार निभाया था, जो आज भी लोगों के जेहन में ताजा है. सिमी एक ऐसी महिला है जो अपने अपराध छिपाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है. उसकी ठंडी मुस्कान और खतरनाक चालें इस थ्रिलर की सबसे डरावनी चीज बन जाती हैं.

टेलीविजन की बात करें तो ‘कहीं किसी रोज’ में सुधा चंद्रन की रामोला देवी ने विलेन की परिभाषा ही बदल दी. बड़ी-बड़ी बिंदियों और तेज दिमाग वाली यह खलनायिका टीवी के इतिहास की सबसे यादगार विलेन बनीं. उनका अंदाज और स्क्रीन प्रेजेंस आज भी मीम्स और रील्स में जिंदा है.
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‘इश्किया’ में विद्या बालन ने कृष्णा वर्मा के रोल में एक क्लासिक फेम फटाले का किरदार निभाया. जो अपनी मासूमियत और आकर्षण का इस्तेमाल कर दो पुरुषों को अपने जाल में फंसा लेती है. उनका यह किरदार बॉलीवुड की सबसे चालाक फीमेल विलेन में गिना जाता है.

1997 की फिल्म गुप्त भी इसी लिस्ट का हिस्सा है. ईशा दीवान के रोल में काजोल ने एक प्यार में पागल लड़की से खूंखार किलर बनने तक का सफर दिखाया. यह किरदार 90 के दशक की हीरोइनों के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ.

संजय लीला भंसाली की ‘रामलीला’ में सुप्रिया पाठक की ढाणकोर ने एक खूंखार मातृशक्ति का किरदार निभाया. अपनी बेटी की उंगली काट लेने वाली इस किरदार का खौफ आज भी दर्शकों को याद है.

साल 2004 में आई फिल्म ‘ऐतराज’ ने बॉलीवुड में महिला विलेन की छवि को पूरी तरह बदल दिया. प्रियंका चोपड़ा ने इस फिल्म में सोनिया रॉय का किरदार निभाकर एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है. यह किरदार एक ऐसी महिला का था, जो अपनी महत्वाकांक्षा और ताकत के लिए कुछ भी कर सकती थी.

साउथ सिनेमा की बात करें तो रजनीकांत की फिल्म ‘पदयप्पा’ में राम्या कृष्णन की नीलांबरी का नाम सबसे ऊपर आता है. अहंकार और बदले की आग में जलने वाली नीलांबरी साउथ सिनेमा की सबसे मजबूत विलेन रहीं. उनका डायलॉग और डेथ सीन आज भी आइकॉनिक है.

शाहरुख खान की फिल्म ‘चक दे इंडिया’ में विद्या मालवडे का किरदार भी एक तरह का विलेन ही था. बिंदिया नायक के रोल में विद्या ने टीम के भीतर की उस जलन और अहंकार को दिखाया जो कभी-कभी हीरो से भी बड़ा खलनायक बन जाता. बाद में उन्होंने सुधार जरूर किया, लेकिन शुरुआती सीन्स में उनकी कड़वाहट यादगार बनी.
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