सोनभद्र/एबीएन न्यूज: उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनभद्र के अध्यक्ष राम सुलीन सिंह के मार्गदर्शन में 14 मार्च 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न प्रकार के लंबित वादों एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया जाएगा।
राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन और अधिकाधिक मामलों के निस्तारण के उद्देश्य से 10 मार्च 2026 को प्रातः 10 बजे जनपद न्यायाधीश के विश्राम कक्ष में न्यायिक अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक यादव, सिविल जज अमित कुमार, यादवेन्द्र सिंह, इंदू वर्मा, शिवेश राज जयसवाल, आकृति प्रकाश, अभिनव दूबे, विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट मुरलीधर सिंह और यमूनाशंकर पाण्डेय सहित अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि 14 मार्च को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों के निस्तारण के लिए संबंधित मामलों में नोटिस की तामीला सुनिश्चित कराई जाए। साथ ही न्यायालयों में लंबित मामलों और सुलह योग्य प्री-लिटिगेशन विवादों को आपसी सहमति के आधार पर निपटाने का प्रयास किया जाए।
राष्ट्रीय लोक अदालत के अंतर्गत आपराधिक शमनीय वाद, धारा 138 एनआई एक्ट के मामले, आर्बिट्रेशन, बैंक वसूली वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं, पारिवारिक विवाद, श्रम वाद, भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले, बिजली और पानी के बिल संबंधी विवाद, सेवा से संबंधित वेतन व भत्ते के मामले, सेवानिवृत्ति लाभ विवाद, राजस्व वाद तथा अन्य सिविल वाद जैसे किराया, सुखाधिकार और विशिष्ट अनुतोष से जुड़े मामलों का निस्तारण किया जाएगा।
इसी क्रम में 10 मार्च 2026 को सिविल जज (सीडी) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राहुल द्वारा जनपद सोनभद्र में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया गया और वहां विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। निरीक्षण के दौरान वृद्धाश्रम में कुल 42 वृद्धजन उपस्थित पाए गए।

इस दौरान उपस्थित बुजुर्गों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि भारत सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के हित में कई योजनाएं और कानून लागू किए गए हैं। अभिभावकों और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 तथा अन्य योजनाओं के माध्यम से माता-पिता और दादा-दादी को अपने बच्चों से आवश्यकतानुसार भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा वृद्धावस्था पेंशन और चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
इसके अतिरिक्त सिविल जज राहुल द्वारा वन स्टॉप सेंटर का भी निरीक्षण किया गया। इस दौरान सेंटर की अधीक्षिका दीपिका सिंह और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान वन स्टॉप सेंटर में चार नवजात शिशु पाए गए, जिनमें सूर्यांश (6 माह 6 दिन), कात्यायनी (5 माह 9 दिन), तन्वी (3 माह 15 दिन) और गौरी (1 माह 26 दिन) शामिल हैं। अधिकारियों ने बच्चों की देखरेख और पोषण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सेंटर में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक पाई गई और सभी अभिलेख अद्यतन मिले। साथ ही उपस्थित कर्मचारियों को महिलाओं और बच्चों से जुड़े विभिन्न कानूनों जैसे घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005, दहेज निषेध अधिनियम 1961, मातृत्व लाभ अधिनियम, कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम 2013, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 समेत अन्य महत्वपूर्ण कानूनों के बारे में जानकारी दी गई।
साथ ही राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए निर्देश दिया गया कि जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित कर आम जनता को इन कानूनों और योजनाओं के प्रति जागरूक किया जाए। यह जानकारी सिविल जज (सीडी) एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनभद्र राहुल द्वारा दी गई।
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