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नई दिल्ली. सुरों की मल्लिका श्रेया घोषाल ने छोटे सी उम्र में सिंगिंग का सफर शुरू किया था. अपनी मधुर आवाज और मेहनत के दम पर श्रेया घोषाल ने म्यूजिक जगत में अपनी अलग पहचान हासिल की. 12 मार्च 1984 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में जन्मीं श्रेया घोषाल राजास्थान के कोटा में पली-बढ़ीं. आज उनके जन्मदिन के मौके पर उनकी जिंदगी के कुछ अनसुने पहलुओं के बारे में जानते हैं-
श्रेया घोषाल आज 12 मार्च को अपना 41वां जन्मदिन मना रही हैं. उन्होंने क्लास 8 से अपने सिंगिंग के सफर की शुरुआत की थी. कहा जाता है कि मां ही बच्चों की पहली गुरु होती है और श्रेया के साथ भी ऐसा ही था. उन्हें सिंगिंग का हुनर मां से विरासत में मिला है.(फोटो साभार इंस्टाग्राम shreyaghoshal)

श्रेया की मां बहुत अच्छा गाती थीं और यही कारण था कि वे अपनी बेटी को संगीत की तालीम देने के पक्ष में भी. उन्होंने श्रेया को 6 साल की छोटी उम्र में ही म्यूजिक की ट्रेनिंग दिलानी शुरू कर दी थी. छोटी सी श्रेया अपनी सिंगिंग से अपने स्कूल के एनुअल फंक्शन में सबको मंत्रमुग्ध कर देती थीं.(फोटो साभार इंस्टाग्राम shreyaghoshal)

इसके बाद उन्होंने पद्मश्री स्वर्गीय कल्याणजी भाई और स्वर्गीय मुक्ता भिडेजी से प्रशिक्षण प्राप्त किया. बहुत कम लोग इस बात के वाकिफ होंगे कि श्रेया बचपन से पढ़ाई-लिखाई में काफी अच्छी थी. वो क्लास 12 तक साइंस की स्टूडेंट थीं जिसके बाद उन्होंने सिंगिंग में करियर बनाने के लिए आर्ट्स चुना.(फोटो साभार इंस्टाग्राम shreyaghoshal)
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श्रेया ने कम उम्र में सिंगिंग रियालिटी शो में हिस्सा लिया था. जब उन्होंने इस शो में हिस्सा लिया था तो उन्हें अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि ये उनकी किस्मत बदलकर रख देगा. इस रियालिटी शो पर श्रेया की आवाज सुनकर संजय लीला भंसाली ने उन्हें ऑडिशन के लिए कॉल किया था.(फोटो साभार इंस्टाग्राम shreyaghoshal)

सिंगर ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि संजय लीला भंसाली ने उन्हें रियालिटी शो पर गाते सुना था और फिर उन्होंने शो के प्रोड्यूसर को फोन करके उनकी खोज की थी. उन्होंने फोन कर उस लड़की का पता किया जिसे उन्होंने गाते सुना था और फिर ऑडिशन के लिए बुला लिया.(फोटो साभार इंस्टाग्राम shreyaghoshal)

संजय लीला भंसाली ने ‘देवदास’ के लिए श्रेया घोषाल का ऑडिशन लिया था. उन्होंने छोटी सी लड़की की मधुर आवाज सुनते ही उसे पारो की आवाज के लिए फाइनल कर लिया था. श्रेया घोषाल को ‘देवदास’ के बैरी पिया गाने के लिए फाइनल किया गया था और उस वक्त उनकी उम्र महज साढ़े पंद्रह साल थी.(फोटो साभार इंस्टाग्राम shreyaghoshal)

खास बात यह रही कि पहले ही गाने से श्रेया की जिंदगी बदल गई और पहले ही गाने ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी दिलवा दिया. ‘बैरी पिया’ का गाना श्रेया के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था क्योंकि उनका बैकग्राउंड क्लासिकल म्यूजिक से जुड़ा हुआ था. ‘बैरी पिया’ के लिए श्रेया ने पहला नेशनल अवॉर्ड जीत लिया था.(फोटो साभार इंस्टाग्राम shreyaghoshal)

इस गाने से जुड़ी एक और दिलचस्प बात है कि संजय लीला भंसाली ने श्रेया को गाने की प्रैक्टिस करने के लिए बुलाया था, लेकिन पहली बार में उन्होंने इतना अच्छा गाया कि डायरेक्टर ने उन्हें सीधे गले लगा लिया. श्रेया ने पहली ही बार में गाने की रिकॉर्डिंग कर ली थी.(फोटो साभार इंस्टाग्राम shreyaghoshal)

इस मौके के बाद श्रेया ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और हिंदी समेत 20 से ज़्यादा भाषाओं में गाने भी गाए. उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वल्ड रिकॉर्ड में सबसे ज़्यादा गाना गाने वाली फीमेल सिंगर के तौर पर दर्ज है. उन्होंने हिंदी सिनेमा के लिए मैं तेनू समझावां, मनवां लागे, सुन रहा है न तू, जादू है नशा है और तुझमें रब दिखता है जैसे कई रोमांटिक गाने गाए हैं. श्रेया ने अपने अबतक के करियर में कुल 5 नेशनल अवॉर्ड और कई स्टेट अवॉर्ड जीते हैं.(फोटो साभार इंस्टाग्राम shreyaghoshal)
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