अलीगढ़ शहर के हृदय स्थल सराय हकीम क्षेत्र में बृहस्पतिवार को हुई फायरिंग की घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि सत्ताधारी दल के भीतर चल रही आपसी खींचतान को भी सड़क पर ला खड़ा किया है। भाजपा युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष पद के लिए मची ‘’गुटबाजी’’ ने हिंसक मोड़ ले लिया, जिससे व्यापारियों और आम लोगों ने चिंता जताई है।
इस घटना ने आगामी विधानसभा चुनाव लक्ष्य-2027 की तैयारी में जुटे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। व्यापारी संगठनों का मानना है कि यदि युवाओं को समय रहते अनुशासन का पाठ नहीं पढ़ाया गया, तो पार्टी की छवि को भारी नुकसान हो सकता है। व्यापारी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में इस हिंसक आचरण की निंदा की है और नेताओं को आत्ममंथन की सलाह दी है।
अलीगढ़ उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष विशाल भगत कहते हैं कि युवाओं का यह आचरण चिंताजनक है। जिम्मेदार नेताओं का फर्ज है कि वे युवाओं की ऊर्जा को गुटबाजी के बजाय सही दिशा में लगाने का काम करें। अलीगढ़ उद्योग व्यापार मंडल के युवा अध्यक्ष ध्रुवेश चंद्र वार्ष्णेय कहते हैं कि संगठन में जिम्मेदारी हासिल करने के लिए खुद को साबित करना होता है, न कि हथियार उठाना। युवाओं को धैर्य और संयम से काम लेना चाहिए।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष सतीश माहेश्वरी कहते हैं कि ऐसी घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। जोश में आकर युवा अपना ही भविष्य अंधकार में डाल लेते हैं।उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष कमल कुमार गुप्ता कहते हैं कि स्थानीय पुलिस को सतर्कता बरतनी होगी। पुलिस और नेताओं को मिलकर युवाओं के साथ संवाद करना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।कानून-व्यवस्था पर सवाल : भरे बाजार में हुई इस फायरिंग ने पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। व्यापारियों का कहना है कि राजनीतिक रसूख के चलते अक्सर ऐसे मामलों में ढिलाई बरती जाती है, जिससे उपद्रवियों के हौसले बुलंद होते हैं। लोगों की मांग है कि राजनीतिक दलों के पदाधिकारी अपने कार्यकर्ताओं पर लगाम कसें।











