इस्राइल और हमास के बीच 22 महीनों से चल रहे संघर्ष में अब एक नया मोड़ आ गया है। जहां शनिवार को इस्राइल ने घोषणा की कि वह गाजा के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सैन्य अभियान शुरू करने से पहले वहां रह रहे फलस्तीनियों को दक्षिण गाजा की ओर भेजने की तैयारी कर रहा है। मामले में इस्राइली सेना की मानवीय सहायता एजेंसी सीओजीएटी ने कहा कि रविवार से टेंट और अन्य आश्रय सामग्री की आपूर्ति फिर से शुरू की जाएगी ताकि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा सके। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि लोगों को हटाने की प्रक्रिया कब शुरू होगी।
तनाव के बीच बढ़ी इस्राइली परिवार की चिंता
वहीं, गाजा में बचे 50 इस्राइली बंधकों के परिवारों में चिंता बढ़ रही है। उनका कहना है कि संभावित सैन्य हमले से इन बंधकों की जान को और खतरा हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन 50 में से केवल 20 के ही जीवित होने की उम्मीद है। हाल ही में कुछ बंधकों के वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वे बहुत कमजोर हालत में मदद और भोजन के लिए गुहार लगा रहे हैं। इसके बाद देशभर में आक्रोश बढ़ा है।
बंधकों के परिजनों ने किया बंद का आह्वान
बंधकों के परिजनों ने रविवार को पूरे इस्राइल में राष्ट्रीय स्तर पर बंदी का आह्वान किया है। उन्होंने सरकार से युद्ध रोकने और बंधकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए समझौते की मांग की है। तेल अवीव में एक साप्ताहिक रैली के दौरान डाना सिलबरमैन सिट्टन, जिनकी बहन और दो भतीजे बंधक बनाकर मार दिए गए, ने कहा कि मैं चाहती हूं कि लोग उम्मीद ना छोड़ें। यह उम्मीद ऊपर से नहीं आएगी, यह हमसे ही आएगी। वहीं बंधकों के परिवारों और कई पूर्व सैन्य अधिकारियों का मानना है कि अब समय आ गया है कि युद्ध को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और सभी बंधकों को घर वापस लाया जाए।
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