लखनऊ/एबीएन न्यूज। भारत के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से एक लखनऊ (चारबाग) रेलवे स्टेशन ने अपने निर्माण के गौरवशाली 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर स्वतंत्रता दिवस से शुरू होकर तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें वृक्षारोपण, प्रतियोगिताएँ, नुक्कड़ नाटक, शॉर्ट फिल्म और पुस्तक विमोचन जैसे कई आयोजन शामिल रहे।
लखनऊ रेलवे स्टेशन की नींव वर्ष 1914 में बिशप जॉर्ज हर्बर्ट ने रखी थी। करीब नौ वर्षों की मेहनत और लगभग 70 लाख रुपये की लागत से स्टेशन का निर्माण कार्य पूरा हुआ। इसका पहला चरण 1923 में तथा दूसरा और अंतिम चरण 1925 में संपन्न हुआ। एक अगस्त 1925 को ईस्ट इंडिया रेलवे के जी.एल. काल्विन ने प्रथम श्रेणी पोर्टिको के पास एक संदूक गाड़ा था, जिसमें एक सिक्का और उस दिन का अखबार रखा गया।

कारीगरी का अनुपम नमूना, यह स्टेशन हवाई दृश्य से शतरंज की बिसात जैसा दिखाई देता है। इसकी खासियत यह है कि यहां चलने वाली ट्रेनों की आवाज स्टेशन परिसर से बाहर नहीं सुनाई देती। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह स्टेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि 26 दिसंबर 1916 को यहीं पर महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहली मुलाकात हुई थी। यह स्टेशन स्थापत्य कला, भारतीय रेल के विकास और स्वतंत्रता संग्राम की गाथाओं का साक्षी रहा है।

पिछले सौ वर्षों में लखनऊ रेलवे स्टेशन निरंतर प्रगति करता रहा है और आज यह आधुनिक यात्री सुविधाओं, तकनीकी उन्नयन और विश्वस्तरीय सेवाओं से लैस है। 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस पर मंडल रेल प्रबंधक सुनील कुमार वर्मा के नेतृत्व में अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा रेलवे स्टेडियम, गांधी पार्क और सेकेंड एंट्री स्टेशन परिसर में 100 पौधे लगाकर शताब्दी वर्ष कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 16 अगस्त को बच्चों के लिए ड्राइंग प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें बच्चों ने रेलवे और देशभक्ति विषय पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। 17 अगस्त को स्टेशन परिसर में स्टेशन के इतिहास पर आधारित नुक्कड़ नाटक का मंचन हुआ, जिसमें पुराने समय की कार्यप्रणाली और वर्तमान की आधुनिक सुविधाओं को दर्शाया गया।

इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक श्री वर्मा ने लखनऊ रेलवे स्टेशन के इतिहास पर आधारित एक विशेष शॉर्ट फिल्म का उद्घाटन किया तथा ब्रिटिश कालीन निर्माण, गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में स्टेशन की भूमिका पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया। ड्राइंग प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों को प्रमाण पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया।

श्री वर्मा ने कहा, “लखनऊ (चारबाग) रेलवे स्टेशन ने अपने गौरवशाली 100 वर्ष पूरे कर लिये हैं। यह केवल एक यात्री भवन नहीं है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत का प्रतीक है। पिछले सौ वर्षों में इस स्टेशन ने करोड़ों यात्रियों की सुखद यात्रा का साक्षी बनते हुए राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बनाई है। इस शताब्दी वर्ष पर हम संकल्प लेते हैं कि यात्रियों को और बेहतर सुविधाएँ, आधुनिक तकनीक से युक्त सेवाएँ तथा स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराएँगे।” इस अवसर पर लखनऊ मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएँ, रेल कर्मचारी और बड़ी संख्या में रेल यात्री उपस्थित रहे।
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