सोनभद्र/एबीएन न्यूज। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोनभद्र की ओर से अपर जनपद न्यायाधीश/सचिव श्री शैलेन्द्र यादव ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं माननीय जनपद न्यायाधीश श्री राम सुलीन सिंह, अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोनभद्र के निर्देशानुसार आगामी 10, 11 एवं 12 सितम्बर 2025 को विशेष लोक अदालत तथा 13 सितम्बर 2025 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।
इस क्रम में आज अपर जनपद न्यायाधीश/सचिव की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित विश्राम कक्ष में सभी न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं अधिकारियों की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में श्री आलोक यादव (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट), श्री अमित कुमार (तृतीय सिविल जज, सी.डि.), श्री राहुल (सिविल जज सी.डि./एफ.टी.सी.), श्री यादवेन्द्र सिंह (सिविल जज, जूनियर डिवीजन), श्रीमती इन्दू वर्मा (न्यायिक मजिस्ट्रेट), श्री नित्यानन्द त्यागी (ग्राम न्यायालय घोरावल), श्री शिवेश राज जायसवाल (अपर सिविल जज, कोर्ट नं.-03) एवं श्री मुरलीधर सिंह (विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट-1) उपस्थित रहे।
बैठक में निर्देशित किया गया कि 10 से 12 सितम्बर तक आयोजित विशेष लोक अदालत में (Petty Offences) मामलात एवं 13 सितम्बर की राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकाधिक वादों का निस्तारण सुलह-समझौते के आधार पर कराया जाए। सभी न्यायिक मजिस्ट्रेटों को वादों में नोटिस तामील सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
इसी क्रम में विद्युत विभाग एवं पुलिस अधिकारियों की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें अधिशासी अभियन्ता विद्युत वितरण खण्ड प्रथम श्री शशि भूषण ठाकुर, अधिशासी अभियन्ता विद्युत खण्ड पिपरी, थानाध्यक्ष/विवेचक एन्टी बेपट थाना राबर्ट्सगंज श्री राजेश कुमार गिरी एवं विद्वान अधिवक्ता विद्युत विभाग श्री रविन्द्र नाथ पाण्डेय उपस्थित रहे। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत (13 सितम्बर 2025) में विद्युत वादों का अधिकाधिक निस्तारण कराया जाएगा।
इसके अतिरिक्त 01 जुलाई से 30 सितम्बर 2025 तक “राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान” भी चलाया जा रहा है। इस अभियान के अन्तर्गत वैवाहिक विवाद, दुर्घटना वाद, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस, वाणिज्यिक विवाद, सेवा संबंधी प्रकरण, आपराधिक समझौता योग्य वाद, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली, भूमि अधिग्रहण, विभाजन एवं अन्य सिविल वादों का निस्तारण मध्यस्थता केन्द्र के माध्यम से कराया जाएगा।
बैठक में सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अधिक से अधिक वादों को मध्यस्थता केन्द्र को संदर्भित करें तथा अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार को भी सुनिश्चित करें।
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