सबसे पहले बात करते हैं अमजद खान की. अमजद खान का जन्म पाकिस्तान के पेशावर शहर में 12 नवंबर 1940 को हुआ था. अमजद के पिता जयंत भी एक्टर थे. भाई इनायत खान और इम्तियाज खान ने भी एक्टिंग में अपने हाथ आजमाए थे. 1971 में आई ‘नाजनीन’ फिल्म से अमजद खान ने बॉलीवुड में कदम रखा था. शोले में डैनी डेन्जोंगपा गब्बर सिंह का किरदार निभाने वाले थे. जब उन्होंने फिल्म करने से इनकार कर दिया तो अमजद खान की किस्मत खुल गई. शोले के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी पर दर्शक खूब प्यार बरसते थे. दोनों के बीच बहुत अच्छी दोस्ती थी. फिर एक वक्त ऐसा भी जब अमजद खान ने अमिताभ पर फिल्मों से निकलवाने का आरोप लगाया था. दरअसल, अजूबा फिल्म के विलेन का रोल पहले अमजद खान खान को निभाना था. बाद में अमरीश पुरी इस फिल्म में नजर आए थे.
1990 में ‘सितारे नाइट शो’ में अमजद खान ने मंच से अमरीश पुरी को फिल्म इंडस्ट्री का अजूबा कहा था. अमजद खान ने ये लाइनें अमरीश पुरी को मंच पर बुलाने के दौरान उनका परिचय देते हुए कहीं थीं. उन्होंने कहा था, ‘अब मौका आया है, आपके सामने इस सदी का अजूबा पेश करने का. वाकई जिसे भारतीय सिनेमा का अजूबा कह सकते हैं, एक ऐसा शख्स जिसने पिछले 40 साल से फिल्म इंडस्टी पर कब्जा जमा रखा है. कोई उनके अंदाज की नकल उतारता है, तो कोई उनके बालों की, कोई उनके बोलने के अंदाज की नकल उतारता है, यहां तक कि हिंदुस्तानी फिल्म हीरोज की चार जनरेशन वो अकेले ही बर्बाद कर चुके हैं.’
अमरीश पुरी की लाइफ जर्नी भी हैरान करने वाली है. 22 जून 1932 को पंजाब में अमरीश पुरी के दो बड़े भाई चमन पुरी और मदन पुरी भी मशहूर एक्टर रहे हैं. अमरीश पुरी सत्यदेव दुबे को अपना गुरु मानते थे. 21 साल की अमरीश पुरी ने सरकारी नौकरी भी की. 40 साल की उम्र में पहली फिल्म की. अमरीश पुरी ने समानांतर सिनेमा में भी खूब नाम कमाया. निशांत, मंथन, भूमिका और सूरज का सातवां घोड़ा जैसी फिल्मों में उनकी भूमिका को खासा सराहा गया. मिस्टर इंडिया में ‘मोगैंबो खुश हुआ’ जैसा अमर डायलॉग बोलने वाले अमरीश पुरी अपनी भारी भरकम आवाज से रोल में जान डाल देते थे.
एक्सीडेंट से जुड़ा है दोनों एक्टर्स की मौत का कनेक्शन
अमरीश पुरी की मौत भी हादसे से जुड़ी हुई है. ‘फिल्मफेयर’ को दिए इंटरव्यू में अमरीश पुरी के बेटे राजीव पुरी ने इस हादसे के बारे में बताया था. राजीव के म्ताबिक, ‘2003 में हिमाचल प्रदेश में गुड्डू धनोआ की फिल्म ‘जाल: द ट्रैप’ की शूटिंग के दौरान मेरे पापा का एक्सिडेंट हुआ था. चेहरे-आंख पर काफी चोटें आईं थीं. आनन-फानन में उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया. डॉक्टरों ने जो खून चढ़ाया, उसी दौरान कुछ गड़बड़ हो गई. इसके बाद पापा को खून से जुड़ी बीमारी माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम हो गया. यह दुर्लभ बीमारी थी. उनकी ब्रेन सर्जरी हुई. अंततः 12 जनवरी, 2005 को ब्रेन हैमरेज के कारण उनका निधन हो गया.’












