सोमवार (22 सितंबर) की सुबह दिल्ली के पहाड़गंज चौक के पास एक दर्दनाक हादसे ने 16 साल की राधिका सोलंकी की जिंदगी छीन ली. राधिका जब स्कूल जा रही थीं, तभी उसकी ई-रिक्शा पलट गई. इस हादसे में उनके साथ सफर कर रही 11 साल की वंशिका और एक अन्य यात्री मोहम्मद जाहिद घायल हो गए.
राधिका को गंभीर सिर की चोटें आईं और अस्पताल पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. यह हादसा सुबह करीब 7:30 बजे हुआ, जब ई-रिक्शा चालक कथित तौर पर रेड सिग्नल को नजरअंदाज कर तेजी से निकलने की कोशिश कर रहा था.
राधिका का सपना जो अधूरा रह गया
राधिका की जिंदगी आसान नहीं थी. पांच साल पहले उन्होंने अपने पिता को खो दिया था और एक साल बाद उनकी मां भी चल बसीं. तब से वह अपने चाचा अशोक सोलंकी के साथ रह रही थीं. अशोक अपने छोटे से घर के किराए से राधिका और उनकी 8 साल की छोटी बहन की पढ़ाई और जरूरतों का ख्याल रखते थे.
राधिका की मेहनत और लगन की मिसाल उनके रिश्तेदार आज भी देते हैं. वह एक अनुशासित छात्रा थीं, जो अपने और अपनी बहन के लिए बेहतर भविष्य का सपना देखती थीं.
उनके चाचा अशोक ने बताया, “वह बहुत होनहार थी. हमेशा कहती थी कि पढ़ाई करके कुछ बनूंगी, परिवार का नाम रौशन करूंगी.” उनकी आवाज में दर्द साफ झलक रहा था. “वह अपने माता-पिता को खोने के बाद भी टूटी नहीं. जब पैसे की तंगी होती थी, तब भी उसने कभी शिकायत नहीं की. वह कहती थी, ‘मैं पढ़ूंगी, और एक दिन सब बदल जाएगा.”
राधिका की छोटी बहन को अभी यह भी नहीं पता कि उसने अपनी बहन को खो दिया है. उनके घर में राधिका की कमी ने एक खालीपन छोड़ दिया है, जिसे भरना मुश्किल है.
चालक की लापरवाही से हुआ हादसा
पुलिस के मुताबिक, हादसा उस वक्त हुआ जब ई-रिक्शा चालक दिलीप (46) ट्रैफिक में तेजी से निकलने की कोशिश कर रहा था. सह-यात्री मोहम्मद जाहिद ने बताया कि चालक ने रेड सिग्नल को नजरअंदाज किया और संतुलन खो बैठा, जिससे रिक्शा पलट गई. हादसे में राधिका को सिर में गहरी चोटें आईं, जबकि वंशिका के सिर और पैर में चोटें आईं और जाहिद की टांग टूट गई.
स्थानीय लोगों ने चालक को मौके पर ही पकड़ लिया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. दिलीप का ई-रिक्शा जब्त कर लिया गया है. मामला मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल में भेजा गया है. पुलिस ने बताया कि चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने और ट्रैफिक नियम तोड़ने का मामला दर्ज किया गया है.
सदमें में परिवार
राधिका के चाचा के लिए यह हादसा किसी बुरे सपने से कम नहीं. उन्होंने बताया कि उस सुबह राधिका ने पड़ोसी का फोन उधार लिया था क्योंकि उनका फोन नहीं मिल रहा था. हादसे के बाद एक अन्य चालक ने राधिका को अस्पताल पहुंचाया और उनके चाचा को फोन करके सूचना दी.
अशोक ने कहा, “मैं उसे उस हालत में देख भी नहीं पाया. वह मेरे लिए बेटी जैसी थी. हम देर रात तक चाय पीते हुए बातें करते थे. वह कहती थी कि अपने मम्मी-पापा को सपनों में देखती है. मैंने कभी उसे यह महसूस नहीं होने दिया कि वे नहीं हैं.”
वंशिका के परिवार को भी इस हादसे ने झकझोर दिया है. उनके एक रिश्तेदार ने बताया, “वंशिका महीनों से ई-रिक्शा से स्कूल जाती थी, कभी कोई दिक्कत नहीं हुई. हमें क्या पता था कि ऐसा कुछ हो जाएगा.” वंशिका अब अपनी चोटों से उबर रही है, लेकिन इस हादसे का डर उसके मन में बना रहेगा.
ई-रिक्शा की सुरक्षा पर सवाल
यह हादसा दिल्ली में ई-रिक्शा की सुरक्षा और नियमों पर फिर से सवाल उठा रहा है. दिल्ली में ई-रिक्शा स्कूल और ऑफिस जाने वालों के लिए आम और सस्ता परिवहन साधन बन गया है. लेकिन इनकी लापरवाही और नियम तोड़ने की आदतें कई बार जानलेवा साबित होती हैं.
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 जनवरी से 20 अगस्त तक ई-रिक्शा से जुड़े 108 हादसे हुए, जिनमें 26 लोगों की मौत हुई और 130 लोग घायल हुए.
इसी अवधि में ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ 2.3 लाख से ज्यादा चालान जारी किए गए. इनमें लापरवाह ड्राइविंग, गलत पार्किंग, बिना लाइसेंस गाड़ी चलाना और तय समय से ज्यादा चलाने जैसे उल्लंघन शामिल हैं.
दिल्ली में करीब 1.2 लाख ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, लेकिन हजारों बिना परमिट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं. इससे ट्रैफिक जाम और हादसों का खतरा और बढ़ जाता है.
राधिका के चाचा ने गुस्से में कहा, “ये चालक बिना किसी जांच के सड़कों पर गाड़ी चलाते हैं. लाल बत्ती पर नहीं रुकते, नियमों की परवाह नहीं करते. और कितनी जिंदगियां जाएंगी, तब जाकर कोई कदम उठाएगा?”
अधूरी रह गई राधिका की कहानी
राधिका का स्कूल बैग आज भी उनके कमरे के कोने में पड़ा है, जिसमें उनकी किताबें खुली हुई हैं. उनके सपने, उनकी मेहनत, और उनकी हंसी अब केवल यादों में बची है. उनके चाचा ने आंसुओं के बीच कहा, “उसके इतने सपने थे, लेकिन जिंदगी ने उसे मौका ही नहीं दिया.”
यह हादसा न सिर्फ राधिका के परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है. सवाल यह है कि क्या दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले इन ई-रिक्शों पर सख्त नियम लागू होंगे? क्या राधिका जैसे और बच्चों को इस तरह की त्रासदी से बचाया जा सकेगा? यह वक्त सोचने और कदम उठाने का है, ताकि कोई और परिवार ऐसा दर्द न झेले.











