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हिट की गारंटी कहलाने वाले यश चोपड़ा की फिल्मों में स्ट्रगलर भी सुपरस्टार बन जाते थे.कितने ही ऐसे स्टार हैं, जिनका करियर उनकी फिल्मों से ही चमका है. लेकिन एक किस्मत के मारे एक्टर का करियर उनकी ही फिल्म से डूब गया.
नई दिल्ली. श्रीदेवी अपने दौर की वो एक्ट्रेस थी, जो अपने साथ काम करने वाले हीरो का करियर भी चमका देती थीं. लेकिन साल 1991 में एक ऐसे एक्टर ने श्रीदेवी के साथ काम किया, जिसे श्रीदेवी का स्टारडम भी नहीं बचा सका. किस्मत ने इस एक्टर की ऐसी वाट लगाई कि इस फिल्म के बाद ही एक्टर का करियर डूब गया.
डेब्यू करते ही हुआ गुमनाम
फिल्म में अनिल कपूर और श्रीदेवी के अलावा उस दौर के मॉडल भी एक अहम भूमिका में नजर आए थे. जिसे यश चोपड़ा ने देखते ही साल 1991 में आई फिल्म के लिए अप्रोच किया. वो एक्टर हैं दीपक मल्होत्रा. उनका लक इतना खराब निकला कि उनकी पहली फिल्म ही उनकी आखिरी फिल्म बनकर रह गई. सुपरमॉडल दीपक मल्होत्रा, ने साल 1980 के दशक में टॉप मॉडल के रूप में जगह बनाई.यश चोपड़ा की फिल्म में वह श्रीदेवी के पति के रोल में नजर आए थे. ये उनके करियर की पहली फिल्म थी. लेकिन ये फिल्म ही उनकी आखिरी फिल्म बनकर रह गई.

1989 में बतौर डायरेक्टर की थी शुरुआत
यश चोपड़ा ने 1959 में फिल्म ‘धूल का फूल’ से बतौर निर्देशक बॉलीवुड में कदम रखा. इसके बाद ‘धर्मपुत्र’ (1961), ‘वक्त’, ‘मशाल’, ‘त्रिशूल’ और ‘दाग’ जैसी फिल्मों ने उन्हें जबरदस्त सफलता दिलाई और उन्होंने हिंदी फिल्मों में एक नया दौर शुरू किया. साल 1973 में यश चोपड़ा ने ‘यशराज फिल्म्स’ की स्थापना की, जो आज भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा प्रोडक्शन हाउस माना जाता है. उनकी फिल्मों में भावनाएं, रिश्ते और जिंदगी के हर रंग देखने को मिलते थे.
बता दें कि आज यश चोपड़ा की पुण्यतिथि है. यश चोपड़ा को याद करते हुए उनकी फिल्म ‘आईना’ में काम कर चुके जैकी श्रॉफ ने पोस्ट शेयर कर उन्हें श्रद्धांजली दी है.
यश चोपड़ा को ‘एक्टर का डायरेक्टर’ कहा जाता था. वे किरदारों को इस तरह गढ़ते थे कि हर कलाकार उनमें जान डाल देता था. 1981 की फिल्म ‘सिलसिला’ में उन्होंने अमिताभ बच्चन, रेखा और जया बच्चन के अभिनय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया था. यह फिल्म न सिर्फ अपनी कहानी बल्कि रेखा-अमिताभ की रियल लाइफ अफवाहों की वजह से भी खूब चर्चा में रही थी.
यश चोपड़ा ने करियर में ‘लम्हे’, ‘डर’, ‘दिल तो पागल है’ और ‘वीर-जारा’ जैसी फिल्मों से रोमांस को एक नई पहचान दी. उनकी आखिरी फिल्म ‘जब तक है जान’ (2012) ने भी दर्शकों के दिलों को छू लिया था.

न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ…और पढ़ें
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