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Aamir Khan sarfarosh Movie : कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो दिल में बस जाती हैं. लीक से हटकर बनाई गई ऐसी फिल्में दर्शकों को एक खास तरह का सिनेमा दिखाती हैं. ऐसी ही एक फिल्म 30 अप्रैल 1999 में रिलीज हुई थी. फिल्म में पहली बार पड़ोसी मुल्क की जगह पाकिस्तान शबद का इस्तेमाल किया गया था. सेंसर बोर्ड ने पाकिस्तान शबद पर आपत्ति भी जताई थी लेकिन मेकर्स भी अपनी बात पर अड़े रहे. अंतत: उनकी जीत हुई.
अंग्रेजों जैसा नाम वाले शख्स ने 26 साल पहले एक ऐसी हिंदी फिल्म बनाई, जिसे देखकर पाकिस्तान भी हिल गया. बतौर डायरेक्टर उनकी यह पहली फिल्म थी. नाम था : सरफरोश जो 1999 में रिलीज हुई थी. फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले जॉन मैथ्यू मैथन ने लिखा था. सरफरोश फिल्म से पहले उन्होंने कई एड फिल्में बनाई थीं. आमिर खान ने जब फिल्म की कहानी सुनी तो 15 मिनट में ही तय कर लिया था वो इस फिल्म को करेंगे. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म में नसीरुद्दीन शाह ने निगेटिव रोल प्ले किया था.

सरफरोश फिल्म के रिलीज होने के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध शुरू हो गया था. ऐसे में इस फिल्म ने और भी दर्शक खींचे. सरफरोश एक एक्शन ड्रामा फिल्म थी जिसमें आमिर खान, नसीरुद्दीन शाह, सोनाली बेंद्रे, मुकेश ऋषि नजर आए थे. म्यूजिक जतिन-ललित ने दिया था. फिल्म को एक नेशनल अवॉर्ड और 4 फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिले थे. फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा था.

करीब 8 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने 33 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी. फिल्म के गाने बहुत पॉप्युलर हुए थे. पॉप्युलर सॉन्ग में ‘जिंदगी मौत न बन जाए, संभालो यारो, मुश्किलों में है वतन…’ ‘होशवालों को खबर क्या, जिंदगी क्या चीज है’, इस दीवाने लड़के को, कोई समझाए और जो हाल दिल का इधर हो रहा है’ शामिल हैं.

सरफरोश फिल्म के स्क्रिप्ट पर काम 1992 से शुरू हुआ था. पूरे सात साल रिसर्च में लगे. डायरेक्टर जॉन मैथ्यू ने रेडियो नशा को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मेरी खुशनसीबी यह है कि मैं आमिर खान से मिला. पहली ही सिटिंग में उन्होंने रोल के लिए हामी भर दी. मनमोहन शेट्टी ने मेरी बहुत मदद की.’

फिल्म में नसीरुद्दीन शाह एक पाकिस्तानी गजल गायक गुलफाम हसन का किरदार जो कि एक आतंकवादी निकलता है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करता है. नसीरुद्दीन शाह ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मुझे तो आज भी फेसबुक मैसेंजर पर नोटिफिकेशन आते हैं कि तुम्ही असली गुलफाम हसन हो. मुझे अपना कैरेक्टर बहुत पसंद आया. जगजीत सिंह की आवाज में गाकर मुझे खूब मजा आया.’

आमिर खान ने सरफरोश फिल्म के बारे में कहा था, ‘इस फिल्म की कहानी मेरे दिल को छू गई थी. जब मैंने जॉन मैथ्यू से कहानी सुनी तो मुझे बेहद पसंद आई. पहले मुझे लगा था कि जॉन का अंग्रेज नाम है. हिंदी फल्म बनाना है. एड फिल्में बनाता है. आधी घंटे से ज्यादा की फिल्म तो नहीं बना पाएगा. जब स्क्रिप्ट सुनी तो मैं हैरान रह गया. नसीरुद्दीन शाह और सोनाली बेंद्रे के साथ काम करने का अनुभव शानदार रहा.’

सरफरोश फिल्म में पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर लिया गया था. यह हिंदी सिनेमा के इतिहास का संभवत: पहला मौका था. आमिर खान ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘सेंसर बोर्ड कहता है कि पड़ोसी मुल्क बोलिए. पाकिस्तान शब्द नहीं बोलिए. सरफरोश में पहली फिल्म है इतिहास की, जिसमें हमने खुलकर पाकिस्तान और आईएसआई का खुलकर नाम लिया. मैंने कहा था कि जब संसद में सरकार कह सकती है कि पाकिस्तान हमारे खिलाफ आतंकवाद फैला रहा है तो हम क्यों पाकिस्तान का नाम नहीं ले सकते. इस आधार पर हमें भी सेंसर बोर्ड से परमिशन मिली थी.’

भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद के मुद्दे को सरफरोश में प्रमुखता से दिखाया गया था. आमिर खान ने एसीपी अजय सिंह राठौर का किरदार निभाया था. फिल्म को पुलिस अफसरों ने खूब पसंद किया था. नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने इस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. एक छोटा सा रोल उन्होंने फिल्म में निभाया था.
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