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फिल्म इंडस्ट्री में अफेयर, ब्रेकअप, तलाक और कई शादियां आम बात हैं. कई एक्ट्रेसेज पर आरोप लगा है कि उन्होंने किसी डायरेक्टर या एक्टर का घर तोड़ा है. हालांकि, इसके लिए वो डायरेक्ट और एक्टर खुद भी जिम्मेदार होते हैं. लेकिन एक ऐसी स्टार एक्ट्रेस रहीं हैं, जिन्होंने शादीशुदा डायरेक्टर से प्यार किया.
इस स्टार डायरेक्टर ने भले ही शादीशुदा डायरेक्टर से प्यार किया, लेकिन वह किसी का घर नहीं तोड़ना चाहती थी. इसलिए उसने अपने प्यार को दबाया. उन्होंने कभी किसी और से शादी नहीं. धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, शम्मी कपूर, मनोज कुमार जैसे कलाकारों के साथ काम करने वाली इस एक्ट्रेस ने एक डायरेक्टर के डायरेक्शन में कई फिल्में की.

यह एक्ट्रेस केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सीबीएफसी की पहली महिला अध्यक्ष भी बनी थीं. हम बात कर रहे हैं आशा पारेख की. उनका जीवन सिनेमा की सफलताओं से भरा हुआ था, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक शांत प्रेम कहानी, संयम और गरिमा की कहानी छिपी हुई थी.

फिल्म निर्माता नासिर हुसैन के प्रति आशा पारेख का एकतरफा प्रेम बॉलीवुड की सबसे मार्मिक अनकही कहानियों में से एक है. अपनी आत्मकथा ‘द हिट गर्ल’ में, आशा पारेख ने निर्देशक नासिर हुसैन के प्रति अपने गहरे स्नेह को खुलकर प्रकट किया, जिनके साथ उन्होंने कई प्रतिष्ठित फिल्मों में काम किया.

आशा पारेख ने नासिर हुसैन की ‘तीसरी मंजिल’, ‘कारवां’ और ‘यादों की बारात’ समेत कई फिल्मों में काम किया. सेट पर अक्सर मिलते थे. दोनों की बॉन्डिंग एक्ट्रेस-डायरेक्टर की बॉन्डिंग से परे थी. दोनों का प्यार कभीऔपचारिक नहीं हुआ. क्योंकि नासिर शादीशुदा थे.

आशा पारेश ने एक इंटरव्यू में कहा था, “मैं कभी घर तोड़ने वाली नहीं थी.” यह बयान उनके जीवन भर की व्यक्तिगत नैतिकता के प्रति कमिटमेंट को दर्शाता है. अपनी फीलिंग्स के बावजूद, उन्होंने एक ऐसे रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया जो एक परिवार के रिश्ते को तोड़ सकता था. उनका अविवाहित रहने का निर्णय दिल टूटने से नहीं, बल्कि सिद्धांतों से प्रेरित था.

आशा पारेख 1960 और 70 के दशक की सबसे डिमांडि एक्ट्रेसेज में से एक थीं. नासिरक हुसैन के निर्देशन के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने जादू बिखेरा, लेकिन ऑफ-स्क्रीन, उन्होंने एक सम्मानजनक दूरी बनाए रखी. वह अक्सर उनके घर जाती थीं, उनके परिवार के करीब थीं, और उनके आखिर समय तक उनकी देखभाल भी की. लेकिन हमेशा एक दोस्त के रूप में.

आशा पारेख-नासिरक हुसैन की कहानी किसी स्कैंडल की नहीं, बल्कि शांत शक्ति की है. उन्होंने कभी शादी नहीं की, और जब उनसे पूछा गया कि क्यों, तो उन्होंने अक्सर नासिर हुसैन के प्रति अपने प्रेम और किसी भी चीज़ से कम पर समझौता न करने की अनिच्छा की ओर इशारा किया.

आशा पारेख ने कई बैरियर को तोड़ा. वह केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की पहली महिला अध्यक्ष बनीं. उन्हें 1992 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया. 2022 में, उन्हें भारत के सर्वोच्च फिल्म सम्मान, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
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