राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी देखने वाले डॉक्टर्स की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है. इसके साथ ही अस्पतालों में उनकी ओपीडी को सीमित कर दिया गया है. इसे लेकर डॉक्टर्स ने गहरी नाराजगी जताते हुए अपने इस्तीफे सौंपने शुरू कर दिए हैं.
राजधानी जयपुर में राजस्थान के सबसे बड़े एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े सभी सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर्स ने आज अपना इस्तीफा प्रिंसिपल को दे दिया है. इस्तीफा देने वाले डॉक्टर्स का साफ तौर पर कहना है कि नियमों में बदलाव उन्हें कतई मंजूर नहीं है.
वहीं अगर इस मामले में जल्द ही कोई बीच का रास्ता नहीं निकलता है तो इसका असर राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ना तय है. वैसे सरकार स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक पदों पर अब चिकित्सकों के बजाय राज्य सरकार की प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े हुए अधिकारियों को भी बिठाने की तैयारी में है. हालांकि चिकित्सक ऐसा होने पर उसका भी विरोध करेंगे.
आदेश का शुरू हुआ जमकर विरोध
राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने हाल ही में बड़ा आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि राजकीय मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल, कंट्रोलर और संबद्ध अस्पतालों के अधीक्षक प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे. आदेश जारी होते ही इसका तीखा विरोध शुरू हो गया है.
इस बीच जयपुर के सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज से जुड़े सभी अस्पतालों के अधीक्षकों ने अपना इस्तीफा प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी को सौंप दिया. 11 नवंबर को जारी आदेशों में विभाग ने कई बड़े बदलाव किए हैं. डॉक्टर सीधे प्रिंसिपल नहीं बन सकेंगे, प्रिंसिपल पद के लिए अनुभव की शर्तें जोड़ी गई हैं और क्लीनिकल कार्य को 25 प्रतिशत तक सीमित किया गया है. इसके अलावा चार सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी प्रिंसिपल चयन करेगी.
मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन ने क्या कहा?
RMCTA यानी राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि यह वरिष्ठ चिकित्सकों के अधिकारों पर सीधा हमला है. एसोसिएशन का आरोप है कि सरकार बिना किसी उद्देश्य बताए संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही है और ऐसे आदेशों से योग्यता व वरिष्ठता दोनों प्रभावित होंगी.
एसोसिएशन ने दो दिन पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर आदेश वापस नहीं लिया गया तो सभी अधीक्षक सामूहिक इस्तीफा देंगे और अब वही हुआ है. कांवटिया, JK लोन, गणगौरी सहित कई अस्पतालों के अधीक्षक इस्तीफा दे चुके हैं.
मामले पर स्वास्थ्य मंत्री ने दी यह जानकारी
वहीं इस बारे में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र खींवसर ने कहा है कि सरकार ने यह निर्णय प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था सुधारने के लिए लिया है और इस पर आगे बातचीत की जा सकती है.
डॉक्टर्स फिलहाल आदेश वापस लेने की मांग पर डॉक्टर अड़े हुए हैं और सामूहिक इस्तीफों के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग पर दबाव और बढ़ गया है. आने वाले दिनों में बातचीत होती है या टकराव और बढ़ता है, इस पर सबकी नजर रहेगी.










