लखनऊ/एबीएन न्यूज़। आरडीएसओ (रेलवे डिजाइन एवं मानक संगठन) में 26 नवंबर 2025 को संविधान दिवस बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। बिरसा मुंडा प्रेक्षागृह में कार्मिक निदेशालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत उपस्थितजनों द्वारा संविधान की उद्देशिका के सामूहिक पाठ से हुई, जिसने कार्यक्रम को गंभीरता और राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत कर दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रधर्म के निदेशक श्री मनोज कांत ने संविधान की उद्देशिका, उसके महत्व और व्यवहारिक अनुपालन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित सदस्यों के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रश्न प्रस्तुत किए— क्या आज संविधान की उद्देशिका संविधान सभा की बहसों के अनुरूप है?
पंथनिरपेक्षता जैसे शब्द, जिन्हें संविधान सभा ने उद्देशिका में शामिल नहीं किया था, बाद में संशोधन के माध्यम से क्यों जोड़े गए? क्या इस शब्द के बाद इसके भावनात्मक और राजनीतिक दुरुपयोग नहीं हुए?
उन्होंने आगे कहा कि यदि संविधान की मूल भावनाओं को देश ने अंगीकृत किया है, तो फिर पूजा-पद्धतियों के प्रति आदर में कमी, सामाजिक समरसता में गिरावट, राष्ट्र की अखंडता के प्रति उदासीनता और सामान्यजन के प्रति सम्मान में कमी जैसी परिस्थितियाँ क्यों जन्म ले रही हैं।
श्री मनोज कांत ने सभी से संविधान के मूल तत्वों को गहराई से समझने, उन्हें अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में अपनाने तथा इसके प्रभावी अनुपालन हेतु ठोस व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री क़ाज़ी मेराज अहमद, अपर महानिदेशक, आरडीएसओ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व के उन कुछ सौभाग्यशाली देशों में से है जिनके पास इतना विस्तृत, प्रगतिशील और समृद्ध संविधान है। उन्होंने सभी सहकर्मियों से सत्यनिष्ठा, उत्कृष्टता और नवाचार को अपने कार्य-संकल्प का आधार बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को अपने कार्य को राष्ट्रसेवा मानते हुए 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान देने की दिशा में सर्वोत्तम प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आरडीएसओ के अधिकारी, कर्मचारी तथा विभिन्न एसोसिएशनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने संविधान दिवस को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण के संकल्प के रूप में मनाया।
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