मुरादाबाद में जेल से छूटने के बाद पिता बाबूराम शर्मा अंदर ही अंदर अपने 28 वर्षीय बेटे अनिकेत से इतनी नफरत करने लगा था कि वह उसे हर हाल में मौत के घाट उतारना चाहता था। उसे अनिकेत का अपनी सौतेले मां से भी ज्यादा बातचीत करना पसंद नहीं था। उसने अपने साथी अधिवक्ता आदेश कुमार से बातचीत की और बताया कि उसे अपने बेटे से कई तरह की शिकायतें हैं।
दुर्घटना बीमा क्लेम दिलाने वाले अधिवक्ता आदेश कुमार को ऐसे ही मामले की तलाश थी। उसने बाबूराम को बीमा कराकर बेटे से बदला लेने की सलाह दी जिसमें बदला और रकम मिलने का लालच दे दिया था।
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