अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्म-सिद्ध नागरिकता आदेश की संवैधानिकता पर सुनवाई करने का निर्णय लिया। ट्रंप के आदेश के मुताबिक, जो बच्चे अमेरिका में जन्म लेते हैं लेकिन जिनके माता-पिता गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से अमेरिका में रहते हैं, वे अमेरिकी नागरिक नहीं माने जाएंगे। इस आदेश की कानूनी चुनौती पहले ही निचली अदालतों में सामने आ चुकी है, जिसमें इसे असंवैधानिक करार दिया था। फिलहाल यह आदेश देश में कहीं भी लागू नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की बहस अगले साल वसंत और इसपर अंतिम फैसला गर्मी के शुरू में आने की उम्मीद है।
बता दें कि ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन यानी 20 जनवरी को यह आदेश जारी किया। यह उनका विस्तृत इमिग्रेशन क्रैकडाउन का हिस्सा है। इसके अलावा प्रशासन ने कई शहरों में कड़े इमिग्रेशन नियम लागू किए और 18वीं सदी के विदेशी शत्रु अधिनियम का पहले कभी न किए गए शांति काल में इस्तेमाल भी किया।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के मिश्रित संकेत
हालांकि ये कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अब तक कई प्रशासनिक इमरजेंसी आदेशों पर मिश्रित संकेत दिए हैं। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि अदालत ने वेनजुएला के आरोपित गुटबंद अपराधियों को बिना सुनवाई के जल्दी पेश करने की योजना को रोक दिया, लेकिन लॉस एंजिलिस में व्यापक इमिग्रेशन रुकावटों की फिर से अनुमति दे दी। दूसरी ओर अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट अब यह भी देख रहा है कि क्या प्रशासन को शिकागो में नेशनल गार्ड तैनात करने की इजाजत दी जानी चाहिए।
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अधिकारियों और रिपब्लिकन नेताओं का मिला समर्थन
मामले में ट्रंप प्रशासन का कहना है कि गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से अमेरिका में रहने वाले माता-पिता के बच्चे अमेरिका के अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं हैं, इसलिए उन्हें नागरिकता का अधिकार नहीं है। उनके शीर्ष वकील डी जॉन सॉयर ने लिखा कि 14वें संशोधन का नागरिकता खंड केवल नए मुक्त हुए गुलामों और उनके बच्चों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया था, गैर-कानूनी या अस्थायी बच्चों के लिए नहीं। बता दें कि अमेरिका के 24 रिपब्लिकन नेतृत्व वाले राज्य और 27 रिपब्लिकन सांसद, जिनमें टेक्सास के टेड क्रूज और साउथ कैरोलिना के लिंडसे ग्राहम शामिल हैं, ट्रंप प्रशासन का समर्थन कर रहे हैं।
मामले की शुरुआत और कानूनी बहस
यह मामला न्यू हैम्पशायर से आया। जब बीते महीने जुलाई में एक संघीय जज ने आदेश को ब्लॉक कर दिया और क्लास-एक्शन मुकदमे में शामिल सभी बच्चों पर इसका प्रभाव नहीं होने दिया। साथ ही प्रशासन ने 9वें अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स के फैसले की भी समीक्षा की मांग की थी। उस अदालत ने जुलाई में कहा कि कुछ डेमोक्रेटिक राज्यों ने मुकदमा दायर किया था और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आदेश की जरूरत है ताकि जन्म-सिद्ध नागरिकता कुछ राज्यों में लागू और कुछ में न हो, जैसी स्थिति न बने।
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जन्म-सिद्ध नागरिकता का इतिहास और महत्व
अमेरिका में जन्म-सिद्ध नागरिकता 125 वर्षों से मान्यता प्राप्त है। संविधान के 14वें संशोधन के अनुसार, अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति अमेरिकी नागरिक माना जाता है, केवल दो अपवाद हैं, जैसे कि विदेश के राजनयिक के बच्चे और विदेशी कब्जे वाले बल के बच्चे। ऐसे में निचली अदालतों ने ट्रंप के आदेश को असंवैधानिक या संवैधानिक रूप से संदिग्ध करार दिया है। उनका कहना है कि यह आदेश मूल रूप से ब्लैक लोगों और उनके बच्चों को नागरिकता देने के लिए बने 14वें संशोधन के उद्देश्य के खिलाफ है।












