सोनभद्र/एबीएन न्यूज़। ग्राम पंचायत पंडरी के बोदरा डोड़ टोले में मानो समय थम-सा गया है। आज भी यहां के ग्रामीण मनुष्य, पशु और जंगली जानवरों के साथ एक ही घाट से पानी पीने को मजबूर हैं। विकास के नाम पर सरकारी योजनाओं की बातें जहां कागजों में आगे बढ़ती दिखती हैं, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीणों को 65 साल बाद भी पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ नसीब नहीं हो पाई हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि हर घर नल जल योजना की पाइपलाइन सिर्फ आधे टोले तक ही बिछाई गई है। वह भी केवल पाइप तक सीमित है—न तो पानी की आपूर्ति शुरू हुई और न ही चौबीसों घंटे उपलब्धता का कोई इंतजाम दिख रहा है। ऊपर के पूरे हिस्से में न तो एक भी हैंडपंप, न सरकारी कुआं, न टंकी—किसी प्रकार का कोई जलस्रोत मौजूद है।
ग्रामीणों के अनुसार, 1960 से लेकर आज तक ग्रामीणों के घर तक चार किमी की पक्की सड़क भी नहीं बनी। कच्चा मार्ग बरसात में कीचड़ से भर जाता है और गर्मियों में धूल का गुबार बन जाता है। गांव की लगभग ढाई सौ की आबादी इसी रास्ते के सहारे है।
पूर्वी और उत्तरी टोले के लोग आज भी जलाशय या किनारे खुदाई की चूहाड़ से पानी पीने को मजबूर हैं। जनवरी आते-आते एकमात्र निजी कुआं भी सूख जाता है, जिसके बाद लोग जानवरों के साथ एक ही जगह से पानी भरते हैं।
72 वर्षीय जयमंगल, सुरेंद्र, मंजू, सुरेश गौतम, अनिल, ओमप्रकाश, हंसलाल, देवी शरण समेत दर्जनों ग्रामीण बताते हैं— “हमारे यहां सब एक ही घाट से पानी पीते हैं—मनुष्य, मवेशी और जंगल के जानवर। 65 साल से बस उम्मीद के सहारे हैं कि कोई हमारी पीड़ा सुने।”
ग्रामीणों ने बताया कि लगभग तीन वर्ष पहले तत्कालीन डीपीआरओ और बीडीओ गांव में आए थे और सोलर फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाने का स्थान भी देख गए थे, लेकिन प्लांट यहां लगाने के बजाय आठ किमी दूर चपरा टोला में स्थापित कर दिया गया।
ग्रामवासियों का कहना है कि वे विस्थापन का दर्द 65 वर्षों से झेल रहे हैं, फिर भी आज तक उन्हें पानी की बुनियादी सुविधा तक नहीं मिली। रोजमर्रा की जिंदगी पानी और सड़क की कमी से अस्त-व्यस्त है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से मांग की है कि— हर घर नल जल योजना की पाइपलाइन को हर घर तक पहुंचाया जाए। तत्काल स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।बोदरा डोड़ तक चार किमी सड़क को पक्की सड़क में बदला जाए। ग्रामीणों की पीड़ा अब भी समाधान की प्रतीक्षा में है।
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