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‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना की पत्नी का किरदार निभाने वाली सौम्या टंडन ने उन आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया दी है, जिनमें कहा था रहा था कि फिल्म में महिलाओं को गलत तरीके से पेश किया गया है. ‘धुरंधर’ की तुलना ‘एनिमल’ और ‘कबीर सिंह’ से की जा रही है. सौम्या ने कहा कि फिल्म में महिलाओं को ऑब्जेक्टीफाई नहीं किया गया है.
मुंबई. ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाए हुए है. फिल्म ने 5 दिनों में ही भारत में 150 करोड़ रुपए से ज्यादा कलेक्शन कर लिया है. फिल्म की एक तरफ जहां तारीफ हो रही है, वहीं कुछ कई लोगों ने फिल्म को महिला विरोधी बताया है. इसे लेकर बहस तेज हो गई है. एक महिला के एक पोस्ट से शुरू हुई यह बहस अब एक बड़ा मुद्दा बन गई है, जिसमें ‘एनिमल’ और ‘पठान’ जैसी फिल्मों का भी जिक्र किया गया. आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘धुरंधर’ की एक्ट्रेस सौम्या टंडन ने एक पोस्ट शेयर किया और दावा किया कि फिल्म में महिलाओं को सम्मान के साथ दिखाया गया है.
बहस तब शुरू हुई जब एक दर्शक ने रणवीर सिंह और फिल्म दोनों पर तंज कसा. अपने एक्स पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि बॉलीवुड के तथाकथित सॉफ्ट-बॉय एक्टर जब उनकी लोकप्रियता कम होती है तो आक्रामक हो जाते हैं, दाढ़ी और बाल बढ़ा लेते हैं ताकि बेवकूफ गुफावासी जैसे दिखें. यूजर ने लिखा कि ऐसे एक्टर ऐसी फिल्मों में काम करते हैं जो मर्दानगी के नाम पर अग्रेसिव और महिला विरोधी सोच को बढ़ावा देती हैं और इससे फायदा उठाते हैं, जबकि असल पुरुष प्रभावित होकर महिलाओं को नुकसान पहुंचाते हैं. पोस्ट में शाहिद कपूर और रणबीर कपूर का भी नाम लिया गया और ‘धुरंधर’ को इसी कैटेगरी में रखा.

सौम्या टंडन का एक्स पोस्ट.
जैसे-जैसे बहस बढ़ी, एक अन्य यूजर ने फिल्म का बचाव किया और कहा कि आलोचना वे लोग कर रहे हैं जिन्होंने फिल्म देखी ही नहीं है. कमेंट में लिखा था, “दोनों महिला लीड्स ने पुरुषों को थप्पड़ मारा है, और वे प्रतिक्रिया भी नहीं देते. इस महिला ने शायद ‘धुरंधर’ देखी भी नहीं होगी, लेकिन हमेशा की तरह, बेकार तर्क देकर महिला कार्ड खेल रही है, जिसका फिल्म से कोई लेना-देना नहीं है.”
सौम्या टंडन ने दी सफाई
इसी प्रतिक्रिया के बाद सौम्या टंडन ने आगे आकर फिल्म पर हो रही आलोचना का जवाब दिया. महिला विरोधी होने के आरोपों को खारिज करते हुए सौम्या ने लिखा, “सहमत हूं. धुरंधर की दुनिया में, जिस समाज को निर्देशक ने दिखाया है, वह पुरुष प्रधान है, फिर भी महिलाओं को सम्मान के साथ पेश किया गया है. उन्हें पीटा नहीं जाता, वस्तु नहीं बनाया जाता, या कई पत्नियों में से एक नहीं दिखाया गया, जबकि उस समाज में यह संभव हो सकता था. यह याद रखना जरूरी है कि हम एक बिल्कुल अलग दुनिया की बात कर रहे हैं.”
धुरंधर के टोन पर सौम्या टंडन की राय
सौम्या टंडन ने आगे बताया कि फिल्म की टोन ऐसी है जिसमें चमकदार गाने या बीच साइड ग्लैमर जैसी चीजें फिट नहीं बैठतीं, जो दूसरी कहानियों में काम कर सकती हैं लेकिन इसमें नहीं. उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में वे महिलाओं पर केंद्रित कहानियों को और एक्सप्लोर करना चाहेंगी.
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रमेश कुमार, सितंबर 2021 से न्यूज 18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. इससे पहले एबीपी न्यूज, हिंदीरश (पिंकविला), हरिभूमि, यूनीवार्ता (UNI) और नेशनल दुनिया में काम कर चुके हैं. एंटरटेनमेंट, एजुकेशन और पॉलिटिक्स में रूच…और पढ़ें
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