अमेरिकी प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल ने व्यापारिक बाधाओं और आव्रजन नीतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे भारत–अमेरिका आर्थिक संबंध और लोगों के बीच संपर्क प्रभावित हो रहे हैं। वह विदेश मामलों की संसदीय समिति और उसकी दक्षिण एवं मध्य एशिया उपसमिति की सुनवाई में बोल रही थीं, जिसका विषय ‘अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी: एक मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना’ था।
जयपाल ने जारी आयात शुल्क (टैरिफ) से दोनों देशों में पैदा हुई मुश्किलों की ओर फोकस किया और कहा कि इनका असर कारोबार और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, हम अमेरिका और भारत दोनों जगह टैरिफ की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ये टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं और अमेरिकी कारोबार और उपभोक्ताओं को भी चोट पहुंचा रहे हैं।
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इसके लिए उदाहरण देते हुए अपने राज्य की एक 120 साल पुरानी कंपनी का जिक्र किया। उन्होंने कहा, पिछले हफ्ते ही मुझे वॉशिंगटन राज्य की एक पांचवीं पीढ़ी से चल रही कंपनी ने बताया कि वह भारत से कृषि उत्पाद मंगाती है, जिन्हें अमेरिका में बड़े पैमाने पर हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ये टैरिफ उनके 120 साल पुराने कारोबार के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं और वे बढ़ी हुई लागत का सामना करने के लिए या तो उत्पादन कम करने या फिर विदेश स्थानांतरित करने पर विचार कर रहे हैं।
व्यापार से जुड़ी इन चिंताओं के साथ ही जयपाल ने हाल की आव्रजन नीतियों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने कानूनी तरीकों से होने वाले आव्रजन को लगभग बंद करके लोगों के बीच संपर्क को नुकसान पहुंचाया है। यह उस भेदभावपूर्ण कोटा प्रणाली की याद दिलाता है, जिसने पहले भी भारतीयों के लिए अमेरिका आना बेहद कठिन बना दिया था।
जयपाल ने यह चिंता उस समय जताई है, जब मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी दी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी बाजार में ‘सस्ते चावल की डंपिंग’ कर रहा है, जिससे अमेरिकी किसानों को नुकसान हो रहा है।












