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Bollywood Songs based on Raag Bhairavi : भारतीय जीवन का आधार संगीत है. शायद यही है वजह है कि बॉलीवुड में बिना म्यूजिक के फिल्मों की कल्पना नहीं की जा सकती. फिल्म को हिट करवाने के लिए मेकर्स एक-दो गाने रख ही लेते हैं. भारतीय संगीत का आधार राग हैं. राग-रागिनी पर बने इन सदाबहार गाने को आज भी लोग गुनगुनाते हैं. इन गीतों में एक रवानगी है, सुकून है. कई हिंदी फिल्मों को सुपरहिट-ब्लॉकबस्टर बनाने में इन गीतों की अहम भूमिका है. पिछले 7 दशकों में राग भैरवी पर बने कुछ फिल्मी गीतों भारतीयों के दिल में समाए हुए हैं. दिलचस्प बात यह है कि ये गाने जिन फिल्मों में थे, वो मूवी भी बॉक्स ऑफिस पर जबर्दस्त हिट रहीं. ये गाने कौन से हैं, आइये जानते हैं………
बॉलीवुड की कई हिट-सुपरहिट फिल्मों को हम उनके नाम से ज्यादा गानों से पहचानते हैं. जैसे ही हम किसी पॉप्युलर सॉन्ग सुनते हैं तो फिल्म का नाम जरूर लेते हैं. कई बार उसे किसने गाया है, संगीतकार कौन है, किस पर यह गाना फिल्माया गया है, इन सब बातों पर चर्चा करते हैं. 50 से लेकर 80 के दशक की फिल्मों के गाने लोगों को इसलिए भी कर्णप्रिय लगते हैं कि क्योंकि ये सॉन्ग राग-रागिनी पर बनाए जाते थे. ऐसा ही एक राग है : राग भैरवी. हिंदी फिल्मों में राग भैरवी पर बने गाने भी दिल में उतर गए. भक्ति गाने तो इसी राग पर ही ज्यादातर बनाए जाते हैं. इस राग पर आधारित गाने जिन फिल्मों में आए, वो मूवी भी सुपरहिट रहीं. ये फिल्में थीं : अमर प्रेम, आशा, प्रेमरोग, अवतार, और बेताब.

इस लिस्ट में सबसे पहला नाम 1972 में आई राजेश खन्ना-शर्मिला टैगोर की फिल्म अमर प्रेम का है. 70 के शुरुआती दशक में राजेश खन्ना का बॉक्स ऑफिस पर जलवा था. 1969 में आराधना की अपार सफलता के बाद शक्ति सामंत ने ही अमर प्रेम फिल्म बनाई थी. कहानी विभूति भूषण बंधोपाध्याय ने, स्क्रीनप्ले अरविंद मुखर्जी ने जबकि डायलॉग रमेश पंत ने लिखे थे. यह फिल्म 1970 में आई बंगाली मूवी ‘निशि पदमा’ का रीमेक थी. फिल्म में म्यूजिक आरडी बर्मन का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. इस फिल्म का मशहूर गाना ‘चिंगारी कोई भड़के…’ राग भैरवी पर बनाया गया था. फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद इस गाने के लिए सिएचुशन क्रिएट की गई और इसे जोड़ा गया. इस गाने ने इतिहास रच दिया.

फिल्म की रिलीज से पहले भारत-पाक युद्ध शुरू हो गया था. ऐसे में यह फिल्म जनवरी 1972 में रिलीज की गई. आनंद बाबू के रोल को राजेश खन्ना ने अमर कर दिया. मां बनने के बाद शर्मिला टैगोर ने इस फिल्म से वापसी की थी. राजेश खन्ना सुपरस्टार थे, फिर भी उन्होंने शक्ति सामंत के ऑफिस पहुंचकर यह रोल अपने लिए मांगा था. राजेश खन्ना चार घंटे ‘अमर प्रेम’ के लिए देते थे. इसी फिल्म का एक डायलॉग ‘आई हेट टियर्स पुष्पा’ ऑल टाइम क्लासिक डायलॉग बन गया. स्क्रीनप्ले राइटर अरविंद मुखर्जी मुखर्जी हिंदी नहीं जानते थे, उन्होंने यह डायलॉग इंग्लिश में लिखा था. रमेश पंत ने यह डायलॉग हिंदी में ज्यों का त्यो रख लिया था. नई पीढ़ी भी इस डायलॉग को उतना ही पसंद करती है. अमर प्रेम फिल्म को तीन फिल्म फेयर अवॉर्ड (बेस्ट स्क्रीनप्ले, बेस्ट डायलॉग, बेस्ट साउंड डिजाइन) मिले थे. राजेश खन्ना-किशोर कुमार-आरडी बर्मन का एक बार फिर से बेस्ट कॉम्बिनेशन फिल्म में देखने को मिला था. फिल्म ने 1.6 करोड़ का कलेक्शन किया था.
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अमर प्रेम के रिलीज होने के पूरे 8 साल बाद 4 मार्च 1980 को एक फिल्म आई थी जिसका नाम था : आशा. आशा फिल्म में जीतेंद्र, रीना रॉय और रामेश्वरी लीड रोल में थे. डायरेक्शन और प्रोडक्शन जे. ओम प्रकाश का था. कहानी राम केलकर ने लिखी थी. डायलॉग रमेश पंत ने लिखे थे. गीतकार आनंद बख्शी थे. लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत निर्देशन में सजे गानों ने तहलका मचा दिया था. आनंद बख्शी की कलम से दिल छूने वाले गाने निकले थे. इस फिल्म का एक गाना आज भी नवरात्र में हर पूजा-पंडाल में सुनने को मिलता है. इस गाने के बोल थे : ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिए…’ जिसे नरेंद्र चंचल और मोहम्मद रफी ने गाया था. यह गाना राग भैरवी पर बेस्ड है.

दिलचस्प बात यह है कि संजीव कुमार के भाई नकुल उन्हीं दिनों एक फिल्म ‘दो वक्त की रोटी’ बना रहे थे. इस फिल्म के लिए ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिये’ गाना रिकॉर्ड किया गया था. नकुल के असामयिक निधन के बाद यह फिल्म बंद कर दी गई तो यह गाना जे. ओम प्रकाश को बेच दिया गया. बाद में ‘दो वक्त की रोटी’ बनी और 1988 में रिलीज की गई. यह गाना उस फिल्म में है. दोनों फिल्मों में है. आशा फिल्म के लिए पहले धर्मेंद्र को साइन किया गया था. धर्मेंद्र ने फिल्म छोड़ी तो जीतेंद्र को लिया गया. दुल्हन वही जो पिया मन भाए फेम रामेश्वरी को फाइनल किया गया. इसी दौरान उनका एक एक्सीडेंट हो गया था, इसलिए उनके सीन हटा लिए गए थे. 1980 में आई यह फिल्म शुरुआत में नहीं चली थी. इसका क्लाइमैक्स बदलने पर भी विचार किया गया था लेकिन अचानक दर्शकों का झुकाव मूवी के प्रति बढ़ा और इतिहास रच दिया. यह उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर थी. 6 फिल्म फेयर अवॉर्ड अपनी झोली में डाले थे.

लेखिका कामना चंद्रा ने एक कहानी राज कपूर को सुनाई थी, जिस पर उन्होंने फिल्म बनाने का फैसला किया. कामना ने यह कहानी अपनी मां से सुनी थी जो कि एक रियल लाइफ स्टोरी थी. कहानी अधूरी थी. कई राइटर्स की मदद से पूरा किया. इस पर 1982 में जो फिल्म बनकर रिलीज हुई, उसने इतिहास रच दिया था. फिल्म का नाम था : प्रेम रोग. प्रेम रोग 30 जुलाई 1982 को रिलीज हुई थी. पद्मिनी कोल्हापुरे ने विधवा लड़की का रोल निभाया था. फिल्म में ऋषि कपूर, शम्मी कपूर, रजा मुराद जैसे सितारे नजर आए थे. फिल्म के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर राज कपूर थे. फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया था. म्यूजिक इंस्टेंटली हिट हुआ था. फिल्म का एक गाना ‘ये गलियां ये चौबारा’ राग भैरवी पर बना था. यह गाना आज भी शादी-फंक्शन में सुनाई देता है. इस फिल्म का एक गाना ‘मैं हूं प्रेम रोगी, मेरी दवा तो कराओ’ शिवरंजनी राग पर बेस्ड था. यह फिल्म बेहद कामयाब रही. फिल्म को चार फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड पद्मिनी कोल्हापुरे को मिला था. फिल्म का बजट करीब 2.75 करोड़ था और इसने 6 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी.

11 मार्च 1983 में राजेश खन्ना-शबाना आजमी स्टारर फिल्म अवतार आई थी, जिसके निर्माता-निर्देशक मोहन कुमार थे. अवतार फिल्म की कहानी भी प्रसिद्ध बंगाली लेखिका आशापूर्णा देवी के एक उपन्यास ‘जोग बियोग’ पर बेस्ड थी. यह उपन्यास 1953 में प्रकाशित हुआ था. मूल कहानी के स्वरूप को बदलकर स्क्रिप्ट लिखी गई. स्क्रीनप्ले मोहन कुमार ने ही लिखा था. डायलॉग मुश्ताक जलीली के थे. गीतकार आनंद बख्शी थे. संगीतकार लक्ष्मीकांत पयारे लाल थे. वैसे तो इस फिल्म के सभी गाने हिट थे, फिर भी एक गाना साल में दो बार 10-10 दिन तक पूरे देश में सुनने को मिलता है. यह गाना था : चलो बुलाया आया है, माता ने बुलाया है. गीतकार आनंद बख्शी ने यह गाना लिखा था जो कि राग भैरवी पर आधारित था. राजेश खन्ना-शबाना आजमी पर गाना फिल्माया गया था. दोनों वैष्णो देवी के दर्शन करने जाते हैं. इस गाने की शूटिंग पूरे चार दिन हुई थी.

पहले अवतार फिल्म का नाम राधा रखा गया था जिसे बदलकर अवतार किया गया. फिल्म में एके हंगल थे. दिलचस्प बात यह है कि उनका पूरा नाम अवतार किशन हंगल था. फिल्म में राजेश खन्ना का नाम अवतार किशन था. सचिन पिलगांवकर ने बहुत ही छोटा लेकिन इमोशनल रोल निभाया था. अवतार फिल्म ऐसे समय आई थी जब राजेश खन्ना का स्टारडम खत्म हो चुका था. इस फिल्म ने उनका करियर पटरी पर लौटाया. ‘अवतार’ फिल्म से इंस्पायर होकर 1980 के दशक में कई पारिवारिक फिल्में बनाई गईं. मजेदार बात यह भी है कि अवतार फिल्म के निर्माता-निर्देशक मोहन कुमार और आशा फिल्म के डायरेक्ट जे. ओमप्रकाश रिश्ते में साढ़ू भाई थे. दोनों ही फिल्मों में म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. दोनों फिल्मों के गीतकार आनंद बख्शी थे. दोनों ही फिल्मों में देवी मां का गीत सुनने को मिलता है. दोनों ही गीत राग भैरवी पर थे.

5 अगस्त 1983 को रिलीज हुई ‘बेताब’ से सनी देओल और अमृता सिंह ने बॉलीवुड में डेब्यू किया था. इस फिल्म को राहुल रवैल ने डायरेक्ट किया था. धर्मेंद्र ने अपने बेटे सनी को लॉन्च करने के लिए जावेद अख्तर का सहारा लिया. जावेद ने बेताब फिल्म की कहानी-डायलॉग-स्क्रीनप्ले लिखा. फिल्म के प्रोड्यूसर बिक्रम सिंह दहल थे जो कि रिश्ते में धर्मेंद्र के जीजा थे. धर्मेंद्र की बहन दर्शन कौर से उनकी शादी हुई थी. बेताब फिल्म का म्यूजिक आरडी बर्मन ने तैयार किया था. फिल्म का एक सॉन्ग ‘जब हम जवां होंगे, जाने कहां होंगे’ राग भैरवी पर आधारित था. यह सदाबहार गाना आज भी हर संगीतप्रेमी को पसंद है. यह फिल्म एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी.
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