लखनऊ/एबीएन न्यूज। पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री गौरव अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद के निर्देशन में गोंडा स्थित उपमंडलीय रेलवे चिकित्सालय में नेत्र रोग जांच शिविर तथा डायबिटिक रेटिनोपैथी विषय पर जागरूकता संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।
शिविर में मुख्य नेत्र रोग परामर्शदाता डॉ. बी.एन. चौधरी द्वारा कुल 48 मरीजों की विस्तृत नेत्र जांच की गई। जांच के दौरान 15 मरीजों में मोतियाबिंद, 20 में रिफ्रेक्टिव एरर, 2 में ग्लूकोमा, 2 में डायबिटिक रेटिनोपैथी तथा 2 मरीजों में एज रिलेटेड मैकुलर डिजनरेशन की पुष्टि हुई। मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों को लखनऊ स्थित मंडल चिकित्सालय बादशाहनगर में ऑपरेशन के लिए रेफर किया गया, जबकि अन्य मरीजों को आवश्यक उपचार एवं आगे की जांच संबंधी परामर्श दिया गया।
संगोष्ठी के दौरान डॉ. बी.एन. चौधरी ने बताया कि मधुमेह से ग्रसित मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी की समस्या आम है, जिससे समय पर इलाज न होने पर आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने डायबिटीज रोगियों को सलाह दी कि वे वर्ष में कम से कम एक बार, अथवा आवश्यकता अनुसार अधिक बार, आंखों की रेटिना की जांच अवश्य कराएं। समय रहते जांच और उपचार से अंधता को रोका जा सकता है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्तमान में डायबिटिक रेटिनोपैथी का इलाज इंट्राविट्रियल इंजेक्शन के माध्यम से किया जा रहा है, जो पहले अत्यधिक महंगा था, लेकिन अब यह सुविधा रेलवे अस्पतालों में भी उपलब्ध है।
उल्लेखनीय है कि मंडल चिकित्सालय बादशाहनगर, लखनऊ में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए आधुनिक टॉपिकल फेकोइमल्सीफिकेशन तकनीक की शुरुआत की गई है, जिसमें न तो इंजेक्शन लगाया जाता है और न ही आंख पर पट्टी बांधनी पड़ती है। इस तकनीक से मरीज को ऑपरेशन के तुरंत बाद छुट्टी दी जा सकती है। इस शिविर के सफल आयोजन में अपर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सरोज मिश्रा एवं डॉ. दीपक मोरे की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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