प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने वाले बिल (130वां संविधान संशोधन बिल 2025) की जांच कर रही संसदीय समिति ने बुधवार (17 दिसंबर) को प्रस्तावित कानून के लिए सबूतों पर आधारित वजह पूछी, और पूछा कि क्या दुनिया में कहीं भी ऐसे कानूनों का कोई उदाहरण है। दरअसल, इस विधेयक के तहत भ्रष्टाचार या गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिनों से अधिक हिरासत में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को 31वें दिन अपने पद छोड़ना होगा। 20 अगस्त 2025 को गृह मंत्री अमित शाह ने इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था।
संयुक्त समिति की बैठक में तीन बिलों पर चर्चा
बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता में हुई संयुक्त समिति की बैठक में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक पर चर्चा हुई। बैठक में यह भी तय किया गया कि समिति संवैधानिक विशेषज्ञों, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, वकीलों और बार एसोसिएशन के सदस्यों से परामर्श करेगी।
सारंगी ने कहा कि बैठक में राजनीति के अपराधीकरण को खत्म करने की जरूरत पर सर्वसम्मति थी। उन्होंने बैठक के बाद मीडिया से कहा, “आज (बुधवार) की बैठक में खास तौर पर दो बातों पर चर्चा हुई। माननीय सांसदों ने बिलों के लिए सबूतों के आधार पर सफाई मांगी और जानना चाहा कि क्या ऐसे कानून किसी भी देश में मौजूद हैं।”
गृह मंत्रालय प्रतिनिधियों संग 7 जनवरी को बैठक
सारंगी ने कहा कि गृह मंत्रालय (MHA) के प्रतिनिधियों से अगली बैठक में अपना जवाब देने की उम्मीद है, जो 7 जनवरी को होगी। सूत्रों ने बताया कि सांसदों ने 25 सवाल पूछे और गृह मंत्रालय अगली बैठक में जवाब देगा। सूत्रों ने कहा कि गृह मंत्रालय ने सदस्यों से देश की राजनीतिक व्यवस्था में पवित्रता लाने और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को भ्रष्टाचार में शामिल होने से रोकने के तरीके पर सुझाव मांगे।
ये भी पढ़ें: One Nation-One Election: ‘एक साथ चुनाव होने से होगी 5 से 7 लाख करोड़ रुपये की बचत’, बोली संयुक्त संसदीय समिति
हालांकि, कुछ सांसदों ने सवाल उठाया कि लोगों द्वारा चुने गए विधायक या सांसद को हटाने के लिए कानून कैसे बनाया जा सकता है। कई विपक्षी दल समिति से दूर रहे, यह तर्क देते हुए कि ये बिल कानून के मूल सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं कि जब तक कोई दोषी साबित नहीं हो जाता, तब तक उसे निर्दोष माना जाता है और अगर वे गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के एक महीने के भीतर जमानत नहीं ले पाते हैं तो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को अपने आप बर्खास्त कर दिया जाएगा।
ये भी पढ़ें: क्या है वीबी-जी राम जी?: मनरेगा के किन प्रावधानों में और क्यों किया जा रहा बदलाव, सवाल-जवाब में जानें सबकुछ
भाजपा और उसके गठबंधन सहयोगियों के प्रभुत्व वाले 31 सदस्यीय पैनल में एनसीपी-एसपी नेता सुप्रिया सुले, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन सांसद असदुद्दीन ओवैसी और वाईएसआरसीपी के एस निरंजन रेड्डी ही एकमात्र विपक्षी सदस्य हैं।
अन्य वीडियो











