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Bollywood Most Infamous Movies : बॉलीवुड की कई यादगार फिल्में पर्दे पर जितनी अच्छी लगती हैं, उनके पीछे की सच्चाई उतनी ही कड़वी होती है. कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बेहद सफल रहीं लेकिन इनमें काम करने वाले बॉलीवुड सितारों के बीच कड़वाहट पैदा कर गईं. ऐसी ही कुछ फिल्में अमिताभ बच्चन-अमजद खान और अमिताभ-शत्रुघ्न सिन्हा की गहरी दोस्ती को तोड़ गईं. दिलों में इतनी गहरी दरार डाल गईं कि ये सितारे फिल्मों में एकसाथ नजर नहीं आए. नजर आए भी तो केमिस्ट्री मिसिंग रही. ये फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं इनसे जुड़े दिलचस्प तथ्य…..
1973 में आई प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘जंजीर’ से अमिताभ बच्चन रातोंरात सुपरस्टार बन गए. उनको ‘एग्रीमैन’ के नाम से जाना जाने लगा. 1975 में आई ‘दीवार’ और ‘शोले’ ने उनके स्टारडम को इंडस्ट्री में पूरी तरह से स्थापित कर दिया. शोले फिल्म से ही अमजद खान को पहचान मिली. उन्हें गब्बर सिंह के नाम से लोग जानने लगे. अमिताभ-अमजद के बीच गहरी दोस्ती थी. अमिताभ-शत्रुघ्न सिन्हा की भी गहरी दोस्ती थी. स्ट्रगल के दिनों में दोनों साथ में रहते थे. फिर कुछ ऐसी फिल्में आईं जो पर्दे पर तो सफल रहीं लेकिन इन सितारों के दिलों में कड़वाहट पैदा कर गईं. ये फिल्में थीं : सत्ते पे सत्ता और काला पत्थर. आइये जानते हैं कि कैसे बढ़ीं इन सितारों के बीच दूरियां…..

एनसी सिप्पी बॉलीवुड के मशहूर प्रोड्यूसर थे. उन्होंने गोलमाल, सत्ते पे सत्ता, चुपके-चुपके, आनंद, खूबसूरत, गुड्डी, आशीर्वाद, पड़ोसन जैसी सुपरहिट फिल्में प्रोड्यूस की है. इनकी ज्यादातर फिल्मों का निर्देशन हृषिकेश मुखर्जी ने किया. एनसी सिप्पी का अमिताभ के करियर में बहुत बड़ा हाथ रहा है. महमूद के कहने पर ही उन्होंने अमिताभ बच्चन को ‘आनंद’ और ‘बॉम्बे टू गोवा’, ‘चुपके-चुपके’ में काम दिया था. ‘बॉम्बे टू गोवा’ फिल्म देखकर ही प्रकाश मेहरा ने उन्हें ‘जंजीर’ फिल्म में काम दिया था. इस फिल्म में अमिताभ-शत्रुघ्न सिन्हा का एक फाइट सीन था. इस एक फाइट सीन ने अमिताभ की जिंदगी बदल दी. ‘शोले’ की कामयाबी ने उन्हें स्टारडम के अर्श पर बैठा दिया. फिर कुछ ऐसी फिल्में आईं, जिन्होंने अमिताभ शत्रुघ्न और अमिताभ-अमजद की दोस्ती तोड़ दी.

एनसी सिप्पी के बेटे राज एन. सिप्पी ने बतौर डायरेक्टर अपना करियर इनकार (1977) फिल्म से शुरू किया था. राज एन. सिप्पी ने एक और फिल्म ‘सत्ते पे सत्ता’ बनाई. इसके निर्माता उनके भाई रोमू सिप्पी थे. यह फिल्म 1978 में अनाउंस की गई थी. यह फिल्म 1954 की अमेरिकन म्यूजिक फिल्म ‘सेवन ब्राइड फॉर सेवन ब्रदर्स’ से इंस्पायर्ड थी. सत्ते पे सत्ता की कहानी, सॉन्ग, हेयरस्टाइल, डायलॉग, कॉस्ट्यूम्स सबकुछ इसी हॉलीवुड मूवी से कॉपी किया गया था. बस अमिताभ का डबल रोल अलग था. फिल्म 22 जनवरी 1982 को रिलीज हुई थी. म्यूजिक आरडी बर्मन का था. गीत गुलशन बावरा और आनंद बख्शी ने लिखे थे.
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सत्ते पे सत्ता में अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, अजमद खान, रंजीता कौर, सचिन पिलगांवकर, सुधीर, शक्ति कपूर, कंवरजीत पेंटल, कंवलजीत सिंह और विक्रम साहू नजर आए थे. फिल्म में पहले रेखा को लिया जाना था लेकिन अमिताभ ने जया भादुड़ी के चलते यह रोल हेमा मालिनी को दिलवाया. वो रेखा के साथ फिल्में करने से कतराने लगे थे. हेमा मालिनी उन दिनों मां बनने वाली थीं. उनके चेहरे के ग्लो को देखते हुए डायरेक्टर ने बहुत क्लोज शॉट लिए. हेमा मालिनी का सभी कलाकारों ने उनका खास ख्याल रखा. ‘परियों का मेला है’ सॉन्ग में हेमा प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर पर थीं. उन्होंने शॉल से अपना पेट कवर कर रखा था.

अमिताभ-अमजद खान के बीच का फेमस सीन प्रोड्यूसर एनसी सिप्पी के बंगले में ही शूट किया गया था. इस सीन में अमिताभ बार-बार कहते हैं कि दारू पीने से लिवर खराब होता है. यह बंगला अमिताभ को बहुत पसंद था. उन्होंने एनसी सिप्पी से यह बंगला खरीदा और इसका नाम बदलकर ‘जलसा’ रखा. अमिताभ को मिली फीस को एडजस्ट किया गया था.

अमिताभ-अमजद खान के बीच गहरी दोस्ती थी. अमिताभ अपनी कई बातें उनसे शेयर किया करते थे. दोनों खुलकर बातें करते थे. दोनों ने ‘दारू वाला’ फेमस सीन बहुत ही सहजता से मैत्रीय अंदाज में किया था. अमिताभ स्टारडम पर सवार थे. उनमें कुछ बदलाव अमजद खान ने महसूस किए. अमजद खान ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘अमिताभ के सिर पर स्टारडम सवार था. वो कई लोगों से घिरे रहते थे, जो उनकी तारीफों के पुल बांधते थे. सब उन्हें सर कहने लगे थे. मुझे यह सब बनावटी और नकली लग रहा था. मैंने अपनी फीलिंग्स अमिताभ से शेयर कर दीं. सभी ने अमिताभ को मुझसे दूरी बरतने की सलाह दी. फिर तो अमिताभ मेरी फिल्में में दूर भागने लगे. मेरे साथ काम करने से कतराने लगे.’ इस तरह अमिताभ-अमजद खान की दोस्ती का अंत हो गया. सत्ते पे सत्ता फिल्म बहुत हिट रही. फिल्म ने नेट कलेक्शन 4.25 करोड़ रुपये था.

अमिताभ बच्चन-शत्रुघ्न सिन्हा की दोस्ती पूरे बॉलीवुड में फेमस थी. दोनों ने बॉम्बे टू गोवा (1972), रास्ते का पत्थर (1972), परवाना (1971), दोस्त (1974), काला पत्थर (1979), दोस्ताना (1980), शान (1980) और नसीब (1981) जैसी फिल्मों में काम किया है. स्ट्रगल के दिनों में अमिताभ बच्चन शत्रुघ्न सिन्हा के बंगले पर ही वक्त बिताया करते थे. दोनों की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी. फिर ऐसा कुछ हुआ कि दोनों की दोस्ती दुश्मनी में बदल गई. दोनों ने फिर 26 साल तक साथ में काम नहीं किया. अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा की पहली मुलाकात महमूद के घर पर ही हुई थी. दोनों के बीच दोस्ती हो गई. शत्रुघ्न सिन्हा के पास उन दिनों एक कार थी. जो खराब हो जाती थी तो अमिताभ धक्का लगाया करते थे. दोनों के बीच पहला फाइट सीन ‘बॉम्बे टू गोवा’ में हुआ था. जैसे-जैसे अमिताभ का स्टारडम बढ़ा दोनों के बीच ईगो प्रॉब्लम शुरू हुई. दोनों की मुलाकातें कम होती गईं.

इसी बीच यश चोपड़ा ने 1979 में काला पत्थर नाम से एक फिल्म बनाई. इस फिल्म की शूटिंग से पहले से ही अमिताभ-शत्रुघ्न के बीच अनबन की खबरें इंडस्ट्री में जोरों पर थीं. अमिताभ नहीं चाहते थे कि शत्रुघ्न सिन्हा इस फिल्म में काम करें लेकिन राइटर जोड़ी सलीम-जावेद दोनों की रियल लाइन अनबन को पर्दे पर दिखाना चाहते थे. फिल्म में दोनों के बीच एक फाइट सीन रखा गया. फाइट सीन में अमिताभ को हावी रखा गया. शत्रुघ्न इससे नाराज हुई और 4 घंटे तक शूटिंग नहीं की. शूटिंग के दौरान अमिताभ को स्पेशल ट्रीटमेंट मिला. काला पत्थर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एवरेज रही. फिर दोनों दोस्ताना, शान और नसीब फिल्म में नजर आए. शान और नसीब की शूटिंग साथ-साथ हुई थी. दोनों फिर एक साथ 2008 की ‘यार मेरी जिंदगी’ में नजर आए जो कि 1972 की डिले फिल्म थी.

अमिताभ धर्मेंद्र के बीच गहरी दोस्ती 1980 में आई राम-बलराम फिल्म के निर्माण के दौरान टूट गई थी. राम-बलराम के डायरेक्ट-एडिटर विजय आनंद थे. फिल्म में अमिताभ बच्चन-धर्मेंद्र, रेखा-जीनत अमान, अजीत, प्रेम चोपड़ा, हेलेन और अमजद खान लीड रोल में नजर आए थे. धर्मेंद्र की मांग उन दिनों अमिताभ से ज्यादा थी. फीस भी वो अमिताभ से ज्यादा लेते थे. फिल्म बनने में चार साल का समय लगा. इसी दौरान अमिताभ की कई हिट फिल्में रिलीज हुईं. अब धर्मेंद्र अमिताभ से खुद को इनसिक्योर महसूस करने लगे. जब यह फिल्म बनकर पूरी हुई तब तक दोनों के दिल में खटास आ चुकी थी. फिर कभी दोनों ने साथ में काम नहीं किया.
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