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संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त अक्सर निजी रिश्तों पर अपने बयान की वजह से सुर्खियों में रही हैं. सोशल मीडिया पर ‘टॉक्सिक फैमिली’ बयान के बाद लोग संजय दत्त के साथ उनके खराब होते रिश्तों की आशंका जताने लगे थे, जबकि वे पिता के लिए अपना प्यार भी जताती रही हैं. उन्होंने तब ‘फैमिली इमेज’ के बजाय मानसिक शांति को तवज्जो देने की बात कहकर तमाम कयासों को जन्म दिया था. उन्होंने अब रिश्तों में ‘चुप्पी’ के साइड इफैक्ट और ‘पावर गेम’ पर क्रिप्टिक पोस्ट शेयर करके नई बहस छेड़ दी है.
नई दिल्ली: त्रिशाला दत्त, संजय दत्त की पहली पत्नी दिवंगत ऋचा शर्मा से बेटी हैं. साल 1996 में मां के निधन के बाद त्रिशाला की परवरिश उनके नाना-नानी ने अमेरिका में की. हालांकि, वह बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर हैं, लेकिन अक्सर अपने परिवार, जिंदगी और निजी मद्दों पर क्रिप्टिक पोस्ट फैंस के बीच चर्चा का विषय बन जाते हैं. त्रिशाला ने कुछ महीनों पहले पोस्ट में ‘टॉक्सिक फैमिली’ का जिक्र किया था, जिसके बाद फैंस संजय दत्त के साथ उनके तल्ख रिश्ते के कयास लगाने लगे थे.
त्रिशाला एक प्रोफेशनल साइकोथेरेपिस्ट हैं, जिस पर उनके विचार अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं. उन्होंने हाल में रिश्तों में होने वाले ‘मानसिक शोषण’ पर एक मजबूत मैसेज दिया था. उन्होंने सोशल मीडिया पर रिश्तों में ‘चुप्पी’ के गलत इस्तेमाल का जिक्र किया, जो आज के दौर में रिश्तों की कड़वी सच्चाई को बयां करती है.
चुप रहकर सजा देना है एक मेंटल टॉर्चर
त्रिशाला ने उन लोगों पर निशाना साधा है जो बहस होने पर या अपनी बात मनवाने के लिए चुप्पी को हथियार बनाते हैं. स्टारकिड के मुताबिक, जानबूझकर की गई खामोशी सामने वाले शख्स को महसूस कराने की कोशिश है कि उसकी आवाज की कोई अहमियत नहीं है. त्रिशाला दत्त लिखती हैं, ‘वे चुपचाप आपको यह सिखा रहे हैं कि आपका बोलना खतरनाक है. वे यह डर पैदा करना चाहते हैं कि अगर आपने अपनी बात रखी, तो आपका रिश्ता टूट जाएगा.’

(फोटो साभार: Instagram@trishaladutt)
‘सेल्फ-केयर’ वर्सेज ‘कंट्रोल’
त्रिशाला ने बड़ी बारीकी से चुप्पी के दो अलग-अलग पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया, जिसे समझना हर किसी के लिए जरूरी है. वे बताती हैं कि जब कोई व्यक्ति गुस्से में कुछ गलत कहने से बचने के लिए या अपने मन को शांत करने के लिए कुछ घंटों का ब्रेक लेता है, तो यह ‘सेल्फ-डिफेंस’ है. यह मानसिक सेहत के लिए अच्छा है.
‘मन की शांति’ बेहद जरूरी
जब कोई व्यक्ति जानबूझकर बात करना बंद कर देता है, ताकि सामने वाले को दर्द महसूस हो या उसे झुकाया जा सके, तो यह ‘पावर प्ले’ और शोषण की कैटेगरी में आता है. त्रिशाला ने साइकोथेरेपी के तौर पर अपना अनुभव बयां किया. उन्होंने सलाह दी कि सच्चे और स्वस्थ रिश्ते वह होते हैं जहां बातचीत के जरिए मसलों को सुलझाया जाए, न कि सजा देकर. उन्होंने साफ कहा, ‘सच्चे रिश्ते दर्द देकर आपको सबक नहीं सिखाते, बल्कि बातचीत के जरिए आपको ठीक करते हैं.’ उन्होंने लोगों को सचेत किया कि जो लोग चुप्पी को शोषण के रूप में इस्तेमाल करते हैं, उनसे अपनी ‘मन की शांति’ को प्रोटेक्ट करना बेहद जरूरी है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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