सिंगरौली/सोनभद्र/एबीएन न्यूज। कोल इंडिया लिमिटेड की सिंगरौली स्थित अनुषंगी कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) द्वारा मंगलवार को “ऊर्जा सुरक्षा एवं पर्यावरणीय दायित्व के संतुलन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य कोयला उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के बीच संतुलन स्थापित करने को लेकर अधिकारियों और परियोजना टीमों की समझ को और सुदृढ़ करना रहा।
इस अवसर पर विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एक्सपर्ट अप्रैजल कमेटी–थर्मल प्लांट एवं कोल माइनिंग) के अध्यक्ष श्री इंद्र पाल सिंह मथारू के नेतृत्व में समिति के सदस्यगणों ने सहभागिता करते हुए पर्यावरणीय संतुलन के साथ सतत विकास पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।
कार्यशाला में एनसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) श्री मनीष कुमार, निदेशक (वित्त) श्री रजनीश नारायण, निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री सुनील प्रसाद सिंह, निदेशक (तकनीकी/परियोजना एवं योजना) श्री आशुतोष द्विवेदी, मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री अजय कुमार जायसवाल, सीएमपीडीआईएल के निदेशक (तकनीकी) श्री राजीव कुमार सिन्हा, एनसीएल की परियोजनाओं के महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए श्री इंद्र पाल सिंह मथारू ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने भारत की प्रकृति-पूजक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सतत विकास केवल नीति नहीं, बल्कि समय की अनिवार्यता है। विकास को नैतिक जिम्मेदारी, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि समाज, स्थानीय समुदाय और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के सदस्य सचिव श्री सुंदर रामनाथन ने भी संबोधित किया। कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में समिति के सदस्य डॉ. विनोद अग्रवाल ने टर्म्स ऑफ रेफरेंस एवं पर्यावरण स्वीकृति प्रक्रियाओं पर व्याख्यान दिया। डॉ. उमेश जे. कहालेकर ने कोयला परियोजनाओं में सतत विकास की अवधारणा पर विचार साझा किए। प्रो. एस.एस. सिंह ने खदान पुनर्स्थापन एवं जैव विविधता संरक्षण में पौधारोपण की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. संतोष कुमार हम्पन्नावर ने पर्यावरणीय प्रबंधन एवं अनुपालन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर जानकारी दी।

कार्यशाला के शुभारंभ पर एनसीएल के निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री सुनील प्रसाद सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि एनसीएल पर्यावरणीय स्वीकृतियों, खनन गतिविधियों एवं हरित पहलों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
समापन अवसर पर एनसीएल के निदेशक (तकनीकी/परियोजना एवं योजना) श्री आशुतोष द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यशाला के सफल आयोजन में महाप्रबंधक (पर्यावरण) श्री राकेश कुमार एवं उनकी टीम का विशेष योगदान रहा।
कार्यशाला के दौरान एक संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने पर्यावरणीय स्वीकृतियों, अनुपालन, सर्वोत्तम प्रथाओं, आधुनिक पर्यावरणीय तकनीकों, कार्बन उत्सर्जन में कमी एवं सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया।
गौरतलब है कि कार्यशाला से पूर्व विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने एनसीएल की जयंत ओपनकास्ट खदान का दौरा कर पर्यावरण प्रबंधन, भूमि सुधार, प्रदूषण नियंत्रण, जल प्रबंधन एवं खदान सुरक्षा से संबंधित उपायों की समीक्षा भी की।
![]()












