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Bollywood Most melodious Romantic song : बॉलीवुड के कुछ गाने इतने मेलोडियस हैं कि उनके बोल भले ही समझ में ना आएं, लेकिन मन सुनते ही झूम उठता है. हर कोई बरबस ही इन गानों को गुनगुनाते लगता है. इन गानों की मेलोडी को शिद्दत से महसूस करता है. 37 साल पहले ऐसा ही एक सुपरहिट एवरग्रीन सॉन्ग बॉलीवुड की कल्ट क्लासिक मूवी में आया था. लव बर्ड्स अक्सर इस गाने को सुनते हैं. फिल्म भी सुपरहिट रही थी. इस गाने को सिंगर ने डरते-डरते गाया था. इस गाने को सुनते ही दिल एक अलग ही दुनिया में खो जाता है. मन रोमांटिक हो जाता है. ये गाना कौन सा था और ये फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं………
37 साल पहले एक ऐसी सुपरहिट फिल्म सिनेमाघरों में आई थी जिसके गाने बहुत ही मेलोडियस थे. आज भी जवां दिलों की पहली पसंद बने हुए हैं. यह फिल्म थी : कयामत से कयामत तक जिसने प्लेबैग सिंगर उदित नारायण, संगीतकार आनंद-मिलिंद, आमिर खान, जूही चावला की तकदीर बदल दी. दरअसल, जमाने को दिखाना है (1981), मंजिल मंजिल (1984) और जबर्दस्त (1985) इन तीन फिल्मों के फ्लॉप हो जाने के बाद प्रोड्यूसर नासिर हुसैन ने एक लव स्टोरी पर काम शुरू किया. उन्होंने अपनी नई फिल्म न्यूकमर्स के साथ बनाने का फैसला किया. उन्होंने अपने भांजे आमिर खान को लॉन्च किया. ऐसी फिल्म बनाई जिसका म्यूजिक बहुत ही मेलोडियस था. आमिर खान ने इस फिल्म में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया. फिल्म का डायरेक्शन आमिर खान के ममेरे भाई मंसूर खान ने किया था.

‘कयामत से कयामत तक’ 29 अप्रैल 1988 को रिलीज हुई थी. यह आमिर खान और जूही चावला की डेब्यू फिल्म थी. फिल्म में गोगा कपूर, दिलीप ताहिल, आलोक नाथ, रविंद्र कपूर, बीना बनर्जी, रीमा लागू, युसुफ परवेज और वीजू खोटे जैसे सितारे भी नजर आए थे. फिल्म की स्टोरी, स्क्रीनप्ले और डायलॉग नासिर हुसैन ने लिखे थे. नुजहत खान और आमिर खान फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर थे. म्यूजिक आनंद-मिलिंद का था. गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी थे. प्रोड्यूसर नासिर हुसैन थे. यह एक म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म थी. कयामत से कयामत तक जवान लड़का-लड़की की कहानी पर बताती है जो प्यार में पड़ जाते हैं. दोनों घर से भाग जाते हैं.

फिल्म का म्यूजिक 1980 का बेस्ट सेलिंग म्यूजिक था. फिल्म के गानों के 80 लाख ऑडियो कैसेट बिके थे. संगीतकार आनंद-मिलिंद की जोड़ी रातोंरात चर्चा में आ गई थी. टी-सीरीज कंपनी ने म्यूजिक जारी किया था. इस फिल्म ने उदित नारायण के करियर को बहुत बड़ा ब्रेकथ्रू दिया. फिल्म में कुल 6 गाने रखे गए थे. सभी गाने सुपरहिट थे. पॉप्युलर गानों में ‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा’, ‘ऐ मेरे हमसफर, एक जरा इंतजार’, ‘अकेले हैं तो क्या गम है’, ‘गजब का है दिन’ शामिल हैं.
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फिल्म का सबसे मेलोडियस सॉन्ग ‘ऐ मेरे हमसफर’ था जिसे गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने फिलॉसिफिकल टच देते हुए लिखा था. इस गाने को उदित नारायण और अलका याज्ञनिक ने रोमांटिक अंदाज में गाया था. फिल्म का एक और गाना ‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा’ भी बहुत पॉप्युलर हुआ था. इस गाने ने भी इतिहास रच दिया. आज भी यह सॉन्ग कॉलेज-स्कूल फंक्शन में सुनाई दे जाता है.

‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा’गाने की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह सॉन्ग कई फिल्मों में इस्तेमाल किया गया. 1999 में सूरज बड़जाता की फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ में इस गाने की पैरोडी यूज की गई. उदित नारायण ने ही पैरोडी गाई थी. आमिर खान की 1990 की फिल्म ‘दिल’ में कॉलेज पार्टी के एक सीन में इस गाने का इस्तेमाल किया गया. 1994 में अंदाज अपना-अपना फिल्म के एक कॉमेडी सीन में इसे यूज किया गया.

उदित नारायण ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ’36-37 साल भी ‘कयामत से कयामत’ फिल्म के मेरे गाने दर्शकों के दिल में बसे हुए हैं. मुझे अभी भी याद है कि इस फिल्म के गाने के लिए मैं स्टूडियो पहुंचा था. आमिर खान सामने बैठे थे. मुझसे कहा गया कि इस हीरो के लिए आपको गाना है. मैं तो डरा हुआ था. मुझे लगा कि अगर यह पिक्चर, यह गाना अगर अच्छा नहीं गाया तो मेरा बोरिया-बिस्तर बंध जाएगा. भगवान का लाख-लाख शुक्र कि गाने के कयामत ही ढा दी.’

प्लेबैक सिंगर अलका याज्ञनिक का किस्सा भी कम दिलचस्प नहीं है. उन्होंने गानों की रिकॉर्डिंग के दौरान कहा था कि अगर आमिर खान स्टूडियो से नहीं जाएंगे तो वो नहीं गाएंगी. हालांकि तब उन्हें पता नहीं था यह दुबला-पतला लड़का ही फिल्म का हीरो है. वो आमिर खान को तब पहचानती नहीं थीं. आमिर खान ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘यह बात ज्यादातार लोगों को पता नहीं है कि जब फिल्म के गानों के लिए पहली रिकॉर्डिंग हो रही थी, अलका ज्ञागनिक माइक पर थीं. उन्होंने मुझे रिकॉर्डिंग रूम से बाहर जाने के लिए कहा. यह भी कहा कि अगर आप बाहर नहीं जाएंगे तो मैं गाना नहीं गाऊंगी. उन्होंने मुझे रिकॉर्ड रूम से बाहर करवा दिया था. उन्हें लगा था कि ये कौन आ गया रिकॉर्डिंग रूम में. मेरी शक्ल हीरो जैसी नहीं थी.’ अलका ज्ञागनिक ने इस पर अपना बचाव करते हुए कहा था, ‘मुझे पता नहीं था कि ये आमिर खान हैं. बाद में पता चला कि ये आमिर खान हैं, फिल्म के हीरो हैं. मैं इस बात के लिए बहुत शर्मिंदा हूं.’

‘कयामत से कयामत तक’ फिल्म का टाइटल पहले ‘नफरत के वारिस’ था, जिसे बाद में बदला गया. 2.5 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 5 करोड़ का कलेक्शन किया था. उस 1988 की तीसरी सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म थी. फिल्म की कहानी नासिर हुसैन ने जरूर लिखी थी लेकिन उनके बेटे मंसूर ने इस फिल्म को अपनी शर्तों पर डायरेक्ट किया था. उन्होंने यह भी कहा था कि आरडी बर्मन इस फिल्म में म्यूजिक नहीं देंगे. फिल्म कंप्लीट होने के बाद पूरे एक साल तक इस मूवी को कोई डिस्ट्रीब्यूटर खरीद ही नहीं रहा था. फिल्म में हीरो-हीरोइन भी नए थे. मंसूर खान परेशान हो गए. नासिर हुसैन ने अपने जोखिम पर फिल्म रिलीज की. यह मूवी मैसिव हिट रही.
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