प्रवर्तन निदेशालय की रायपुर जोनल टीम ने मेडिकल खरीद घोटाले से जुड़े मामले में बिजनेसमैन शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार किया है. शशांक मोक्शित कॉरपोरेशन में पार्टनर है. ED ने उसे बुधवार (14 जनवरी, 2026) को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत गिरफ्तार किया और गुरुवार (15 जनवरी, 2026) को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने उसे चार दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया, जो सोमवार (19 जनवरी, 2026) तक चलेगी.
स्वास्थ्य विभाग में फर्जी जरूरत दिखाकर किया घोटाला
ये मामला मेडिकल खरीद से जुड़े एक बड़े घोटाले से जुड़ा हुआ है. ये जांच ACB/EOW रायपुर की FIR और चार्जशीट के बाद ED ने शुरू की. आरोप है कि शशांक चोपड़ा ने स्वास्थ्य विभाग (DHS) और CGMSC के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की. फर्जी जरूरत दिखाई गई और मेडिकल उपकरण व टेस्टिंग सामग्री को बहुत ज्यादा रेट में सप्लाई किया गया. जिससे राज्य को नुकसान हुआ और आरोपियों को गैर-कानूनी फायदा मिला.
ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?
ED की जांच में ये भी सामने आया कि घोटाले से हुए गैर-कानूनी पैसे को छुपाने के लिए कई फर्मों का इस्तेमाल किया गया. फर्जी सर्विस एग्रीमेंट बनाए गए, जिनमें ट्रेनिंग और मेंटेनेंस जैसी सेवाओं का बहाना दिखाया गया. इसके बाद इस पैसे का बड़ा हिस्सा कैश में निकाला गया, जिसे रिश्वत देने और प्रॉपर्टी खरीदने में इस्तेमाल किया गया.
ईडी ने मामले में मारे कई छापे, 43 करोड़ की संपत्ति जब्त
इससे पहले ED ने कई जगहों पर छापे मारे थे और 43 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त और फ्रीज की थी. इसमें बैंक में जमा पैसा, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर और गाड़ियां शामिल थी. छापों के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी मिले, जिनसे पैसे को घुमाने और छुपाने की पूरी प्रक्रिया सामने आई. ED के मुताबिक मामले की जांच अभी जारी है.
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